कोरबा (pnews 24) कोरबा जिले में लगातार बढ़ती गर्मी के बीच हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पुनः जिले के जंगलों से वन्यप्राणियों का भटक कर आबादी क्षेत्रों में आने का सिलसिला शुरू हो गया है। वन्य प्राणी आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचकर लोगों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही जंगल के समीप बसे गांव में भी पहुंचकर पानी की तलाश कर रहे हैं। इसके साथ ही ये वन्य प्राणी भी जंगलों से भटककर आबादी क्षेत्रों में आने के बाद कभी-कभार ही सुरक्षित जंगलों में लौट पाते हैं। उनका गांव के ही लोग उनका शिकार कर लेते हैं या फिर वे गांव के आवारा कुत्तों के शिकार बन जाते हैं।
बढ़ती गर्मी के साथ जंगलों में मौजूद प्राकृतिक जल स्रोतों में पानी की मात्रा तेजी से घट रही है। वहीं कई जल स्त्रोत तो अप्रैल माह के शुरूआती दिनों में ही दम तोड़ चुके हैं। माना जा रहा है कि यही वजह है कि वन्य प्राणी पानी की तलाश में भटकते हुए जंगलों से लगे आसपास के गांवों में पहुंच रहे हैं। इसकी एक वजह ग्रीष्म ऋतु के दौरान जंगलों में प्राकृतिक रूप से अथवा मानवीय चूक के कारण लगने वाली आग भी है। क्योंकि जंगलों में आग लगने के बाद कई प्राणी न सिर्फ भयभीत हो जाते हैं बल्कि शाकाहारी वन्यप्राणी की खुराक भी नष्ट हो जाती है और मजबूरन उन्हें भोजन पानी के लिए भटकना पड़ता है।

