Pnews 24:तीसरे चरण के चुनाव के बाद पिक्चर साफ होने लगी है जिसे लेकर वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र पालीवाल का आकलन है कि तीसरे चरण में 2019 की तुलना में,मतदान कम हुआ।मतदान कम होने से किस पार्टी को नुकसान और किसे फायदा मिलेगा।इसका सही आंकलन नहीं किया जा सकता।1971 में मतदान कम हुआ और कांग्रेस को जीत मिली थी और 1977 में 1971की तुलना में थोड़ा मतदान का प्रतिशत बढ़ा था लेकिन कांग्रेस हार गई थी,हालांकि इस परिणाम को आपातकाल से जोड़कर देखा गया था।प्रश्न तीसरे चरण में मतदान का कम होना,मतदाताओं की उदासीनता को प्रमाणित जरूर करता है।स्कूल में जो विद्यार्थी लगातार दो बार फेल हो चुका हो,उसके लिए परीक्षा का तीसरी बार का परिणाम,उतनी चिंता का विषय नहीं होता।यह स्थिति कांग्रेस की है।कांग्रेस के पास खोने जैसा,कुछ नहीं है।क्लास में जो टापर रहता है,परीक्षा के परिणाम के लिए सबसे ज्यादा,चिंतित वही रहता है।बीजेपी की स्थिति,उस टापर के विद्यार्थी जैसी है।बंगाल में मतदान अच्छा रहा।जहां कांटे की टक्कर रहा,वहां मतदान अच्छा हुआ।वहीं,महाराष्ट्र में मतदान ओसत से भी कम हुआ।शिव सेना, एन सी पी के विभाजन से जनता की नाराजगी के रूप में इसे देखा जा रहा है।उत्तरप्रदेश के बाद 48 सीटें महाराष्ट्र में है।बिहार और महाराष्ट्र में बीजेपी की स्थिति 2019 जैसी नहीं है और राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की नाराजगी का असर भी चुनाव परिणाम को प्रभावित करेगा,इससे इंकार नहीं किया जा सकता।प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के द्वारा 8 मई को तेलंगाना में दिया गया भाषण,जिसमें उन्होंने अडानी, अंबानी को कांग्रेस से जोड़ा और इन दोनों के द्वारा टेंपो में काला धन बोरों में दिए जाने का उल्लेख।प्रधानमंत्री जी की बौखलाहट से जोड़कर देखा जा रहा है।अभी 282 सीटों पर वोट डाले गए हैं।केवल अनुमान लगाया जा सकता है लेकिन प्रधानमंत्री जी का विचलित होना,बीजेपी के भविष्य के आशंका को प्रमाणित करता है।

