Pnews24- शारदीय नवरात्र की शुरुआत होने के साथ ही कोरबा जिले की प्रथम आराध्य देवी मां सर्वमंगला के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी लगी है। मां आदिशक्ति के दर्शन कर लोग विश्व कल्याण की कामना कर रहे है। सैकड़ों पुराने इस मंदिर को लेकर भक्तों की आस्था काफी गहरी है यही वजह है,कि हजारों की संख्या में यहां सर्वमनोकामना ज्योत प्रज्जवलित किए गए है। हर साल की तरह इस साल भी सिंगापुर और सउदी अरब से जलवाए गए है।
हसदेव नदी के तट पर मौजूद मां सर्वमंगला का मंदिर काफी पुराना है। मां सर्वमंगला को जिले की पहली आराध्य देवी माना जाता है। साल के दोनों नवरात्र में मां सर्वामंगला की विशेष पूजा आराधना होती है। इस साल भी चैत्र नवरात्र की शुरुआत होने के साथ ही मां आदिशक्ति की उपासना को लेकर भक्तों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा। सुबह से ही भक्तों की भीड़ मंदिर में जुटनी शुरु हो गई है। भक्त लंबी कतार लगाकर मां सर्वमंगला की पूजा पाठ करने में व्यस्त है। कोरबा में मां सर्वमंगला की पूजापाठ के साथ ही देवी की मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। माता का यह मंदिर करीब 130 साल पुराना है जिसे लेकर कोरबा वासियों की आस्था काफी गहरी है।
नवरात्र के प्रथम दिन रविवार को मां सर्वमंगला देवी मंदिर के प्रबंध व्यवस्थापक और राजपुरोहित नमन नन्हा पांडे ने मंदिर में सदियों से चली आ रही जोत प्रज्वलित की परंपरा का निर्वहन करते हुए अपनी धर्मपत्नी के साथ विधिवत पूजा अर्चना के बाद कलश में रखे जोत को प्रज्वलित किया l यहां बता दें की मां सर्वमंगला देवी की स्थापना कोरबा के राज परिवार के द्वारा की गई थी l तब से ही वर्ष के प्रत्येक नवरात्र में राजपुरोहित ही मंदिर के जोत कलश को सर्वप्रथम प्रज्वलित करते हैं इसी परंपरा का वर्तमान में मंदिर के राजपुरोहित नमन पांडे के द्वारा निभाया गया l
मां सर्वमंगला के प्रति भक्तों की आस्था काफी गहरी है। यही वजह है,कि घंटो लाईन में खड़े होकर भक्त अपनी बारी का इंतजार करते है और माता के दर्शन कर अपने परिवार व विश्व कल्याण की माना करते है। भक्तोें का मानना है,कि मां से मांगी गई हर मुराद अवश्य पूर्ण होती है l यही वजह है,कि माता के प्रति उनका विश्वास साल दर साल बढ़ते जा रहा है।नवरात्र के पहले दिन ही जिस तरह से भक्तों की भीड़ देखी गई उससे यह संख्या आने वाले दिनों में और भी बढ़ेगी। जैसे-जैसे नवरात्र के दिन बीतते चले जाएंगे वैसे-वैसे आस्था का सैलाब उमड़ेगा जिसे लेकर मंदिर प्रबंधन ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है।हसदेव तट के किनारे विराजी मां सर्वमंगला देवी के साथ ग्रामीण अंचलों में पहाड़ों में स्थापित चैतुरगढ़, मड़वारानी, कोसगई, चेपारानी एवं डंगनाई देवी के दरबार में भी शक्ति की उपासना शुरू हो गई है l
सर्वमंगला मंदिर के राजपुरोहित नमन पांडेय ने धर्मानुरागियों से प्रार्थना कि है, कि सर्वमंगला देवी के दर्शन लाभ लेकर अपना जीवन सफल बनाएं।

