News24- सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की भक्ति का महीना माना जाता है। शिव के प्रिय महीने सावन का इंतजार उनके भक्तों को सबसे ज्यादा रहता है। यह महीना महादेव को समर्पित है। प्रकृति भी इस मौसम में बहुत खुश रहती है।
मान्यता है कि सावन में अगर किसी को भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद मिल जाए तो उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है। इसी महीने में भक्तों की कांवड़ यात्रा भी शुरु हो जाती है। जिसमें शिव-शंभू के भक्त हाथों में कांवड़ लिए, भगवा वस्त्र पहन कर, हर-हर महादेव और बम भोले के उद्घोष के साथ पैदल हरिद्वार से गंगाजल लाने के लिए निकल पड़ते हैं।
आपको बता दें भक्तगण पदयात्रा करके हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल लेकर आते हैं और अपने आराध्य स्थल के शिवलिंग का जल से अभिषेक करते हैं। इसी वजह से इस यात्रा को कांवड़ यात्रा कहते हैं, जो कि काफी कठिन होती है। मान्यता है कि कांवड़ यात्रा करने वाले भक्तों को अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। इस बार कांवड़ यात्रा की शुरुआत चार जुलाई से हो रही है। इसी दिन से ही सावन की शुरुआत हो रही है।
आपको बता दें कि इस साल ये यात्रा 4 जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलने वाली है। माना जाता है कि कांवड़ के जरिए गंगा जल शिव भगवान को अर्पित करने से भोलेनाथ काफी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को सारे कष्टों से मुक्त कर देते हैं। कांवड़ यात्रा का जिक्र ‘वाल्मिकी रामायण’ में भी मिलता है। श्रवण कुमार थे पहले कांवड़ यात्री। मालूम हो कि सबसे पहले त्रेता युग में श्रवण कुमार ने ‘कांवड़ यात्रा’ शुरू की थी और तब से ही ‘कांवड़ यात्रा’ चली आ रही है। तो वहीं द्वापर युग में इसका जिक्र है। कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान ही युधिष्ठिर, अर्जुन और भीम ने हरिद्वार से गंगाजल लाकर भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यह यात्रा प्रारंभ की थी।

