Thursday, May 14, 2026
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भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी की झांकी, भक्त भावविभोर…

कोरबा pnews24- श्रीमद् भागवत कथा के षष्ठम दिवस दिवस वृंदावन धाम के वृंदावन धाम के भागवत प्रवक्ता श्री ललित वल्लभ जी महाराज ने श्रद्धालु श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत का पूजन करवाया तो इंद्र ने क्रोधित हो ब्रज मंडल में मूसलाधार वर्षा करवाई भगवान कृष्ण ने एक उंगली पर गिरिराज पर्वत उठाया और कहा आ जाओ गिरिराज की शरण में ऐसे ब्रज वासियों की रक्षा की ।कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए महाराज जी ने महारास वर्णन करते हुए बताया कि रास पंचाध्याई भागवत के पंचप्राण हैं रास पंचाध्याई के पठन श्रवण से सहज ही वृंदावन की भक्ति प्राप्त हो जाती है रासके दो स्वरूप नित्यऔर नैमित्तिक हैं नित आज भी वृंदावन में दर्शनीय होता है जो आज भी चल रहा है बृंदावनम परित्याज्यपादमेकम,न गच्छति, नित्य स्वरूप पल भर के लिए भी वृंदावन से बाहर नहीं जाता, रासलीला कामलीला ना होकर बल्कि काम पर विजय प्राप्त करने वाली लीला है कृष्ण के दो रूप वह साकार है और निराकार भी है साकार स्वरूप आज भी वृंदावन से बाहर नहीं जाता है महाराज जी ने आगे बताया भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा माली पर कृपा, रजक उद्धार कुब्जा अनुग्रह वर्णन करते हुए मामा कंस का वध किया ,गोपी उद्धव संवाद की सुंदर व्याख्या का वर्णन किया, श्री कृष्णा अवंतिकापुरी विद्या अध्ययन करने गए और 64 दिन में 64 विद्याओं को ग्रहण किया गुरु दक्षिणा में गुरु पुत्र लाकर के दिया विद्या अध्ययन के पश्चात द्वारकापुरी का निर्माण कराया और वहां के राजा द्वारकाधीश कहलाए द्वारका में भगवान श्री कृष्ण ने रुक्मणी जी के साथ विवाह किया विवाह में भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी की झांकी सजाई वैवाहिक गीतों पर भक्त भावविभोर हो नृत्य करने लगे

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