सावन के दूसरे सोमवार पर रायगढ़ जिले के खरसिया के निकट स्थित सिद्धेश्वर नाथ बरगढ़ धाम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड सहित कई राज्यों से पहुंचे भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की। पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट।
रायगढ़ CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) । भगवान शिव की आराधना के पवित्र माह सावन का हर सोमवार श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। सावन के दूसरे सोमवार को रायगढ़ जिले के खरसिया के समीप स्थित प्रसिद्ध सिद्धेश्वर नाथ बरगढ़ धाम एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और आस्था का विराट केंद्र बन गया। तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर, मुख्य प्रवेश मार्ग और आसपास की सड़कों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा धाम शिवमय हो उठा।
छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के अलावा ओडिशा, झारखंड और आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की भीड़ बनी रही। श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
सुबह से शुरू हो गया श्रद्धालुओं का आगमन
सावन के दूसरे सोमवार को सुबह सूर्योदय से पहले ही श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे थे। जैसे-जैसे समय बीतता गया, श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई। मंदिर परिसर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा कर बाबा के दरबार पहुंचे तो कई लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ वाहनों से यहां पहुंचे।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन द्वारा दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने का प्रयास किया गया, जिससे भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। स्वयंसेवक भी श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से दर्शन कराने में सहयोग करते नजर आए।
कई जिलों और राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु
सिद्धेश्वर नाथ बरगढ़ धाम की ख्याति केवल रायगढ़ जिले तक सीमित नहीं है। सावन के अवसर पर यहां रायगढ़, कोरबा, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, रायपुर, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित प्रदेश के अनेक जिलों से श्रद्धालु पहुंचे।
इसके साथ ही रांची, झारखंड और ओडिशा के विभिन्न क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचे। कई परिवारों ने बताया कि वे हर वर्ष सावन में यहां आकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं और इसे अपनी पारिवारिक परंपरा मानते हैं।
जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का चला सिलसिला
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मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प और फल अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की। शिवलिंग पर जलाभिषेक के दौरान पूरा वातावरण “ॐ नमः शिवाय” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
कई श्रद्धालुओं ने सावन के व्रत का पालन करते हुए पूरे विधि-विधान से पूजा की। मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण के बीच भक्तों के चेहरों पर श्रद्धा और विश्वास स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
अटूट आस्था ही खींच लाती है बाबा के दरबार तक
दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि सिद्धेश्वर नाथ बरगढ़ धाम के प्रति उनकी आस्था वर्षों पुरानी है। उनका मानना है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना बाबा अवश्य सुनते हैं। यही विश्वास हर साल हजारों लोगों को इस पवित्र धाम तक खींच लाता है।
रायपुर से पहुंचे एक श्रद्धालु ने बताया कि वह कई वर्षों से लगातार सावन में यहां दर्शन करने आते हैं। वहीं कोरबा से आए एक परिवार ने कहा कि बाबा सिद्धेश्वर नाथ के दर्शन से उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
धार्मिक पर्यटन का भी बन रहा प्रमुख केंद्र
सिद्धेश्वर नाथ बरगढ़ धाम केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के प्रमुख आस्था और धार्मिक पर्यटन केंद्रों में भी शामिल होता जा रहा है। सावन के महीने में यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से आसपास के छोटे व्यापारियों, प्रसाद विक्रेताओं, फूल-माला विक्रेताओं और स्थानीय दुकानदारों को भी अच्छा व्यवसाय मिलता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
श्रद्धा के साथ दिखी अनुशासन और सेवा की भावना
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ दर्शन किए। स्वयंसेवकों द्वारा लगातार श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन दिया जाता रहा। कई सामाजिक संगठनों ने श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और विश्राम की व्यवस्था भी की, जिससे दूर-दराज से आए लोगों को राहत मिली।
पूरे दिन मंदिर परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा और श्रद्धालु शांतिपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते हुए दर्शन करते रहे।
सावन में क्यों बढ़ जाता है महत्व?
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस माह में भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है। यही कारण है कि सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है।
सिद्धेश्वर नाथ बरगढ़ धाम भी इसी आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा व्यक्त करने पहुंचते हैं। सावन का दूसरा सोमवार भी इसी अटूट विश्वास और भक्ति का साक्षी बना, जब पूरा धाम भगवान शिव के जयघोष और भक्तों की आस्था से सराबोर दिखाई दिया।

