दुर्ग में आरक्षक भर्ती के नाम पर 12 लाख की ठगी, नौकरी का झांसा देने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

दुर्ग के उतई थाना क्षेत्र में पुलिस आरक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर 12 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

दुर्ग जिले के उतई थाना क्षेत्र में पुलिस आरक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर 12 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। नौकरी की तलाश कर रहे परिवार को कथित तौर पर पुलिस विभाग में भर्ती कराने का भरोसा दिया गया और इसी झांसे में बड़ी रकम ले ली गई। जब काफी समय बीतने के बाद न तो नौकरी मिली और न ही रकम वापस की गई, तब पीड़ित परिवार ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, मामले में उमेश दास मानिकपुरी और राजेश वर्मा को गिरफ्तार किया गया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2023 में सेलूद निवासी गैंदलाल बंछोर के बेटे को पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर भर्ती कराने का भरोसा दिलाकर 12 लाख रुपये लिए थे। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपियों ने नौकरी लगवाने की बात कही, लेकिन बाद में न तो भर्ती हुई और न ही पैसे लौटाए गए।

नौकरी की उम्मीद में दिए 12 लाख रुपये

बताया गया है कि गैंदलाल बंछोर के बेटे को पुलिस विभाग में भर्ती कराने का झांसा देकर आरोपियों ने परिवार से संपर्क किया था। पुलिस में नौकरी लगने की उम्मीद में परिवार ने आरोपियों को 12 लाख रुपये दे दिए। नौकरी के नाम पर इतनी बड़ी रकम देने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने पर बेटे का भविष्य सुरक्षित हो जाएगा।

लेकिन समय बीतने के साथ परिस्थितियां बदलती गईं। कथित तौर पर नौकरी नहीं मिली और रकम वापस मांगने पर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस की शरण ली और पूरे मामले की शिकायत उतई थाने में दर्ज कराई।

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि सरकारी नौकरी हासिल करने की चाह रखने वाले युवाओं और उनके परिवारों को अक्सर भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले लोग अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। नौकरी मिलने की उम्मीद में परिवार अपनी वर्षों की जमा पूंजी तक लगा देते हैं। ऐसे में 12 लाख रुपये की रकम का मामला सामने आना लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है।

शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच

गैंदलाल बंछोर की शिकायत मिलने के बाद उतई थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने कथित लेन-देन और आरोपियों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को खंगाला। पुलिस ने आरोपियों के बैंक खाते और मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

इन बैंक खातों और मोबाइल फोन के माध्यम से रकम के लेन-देन तथा मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 12 लाख रुपये का लेन-देन किस माध्यम से हुआ और आरोपियों तथा शिकायतकर्ता के बीच पैसों को लेकर किस तरह की बातचीत हुई थी।

मोबाइल फोन की जांच इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पुलिस को आरोपियों और पीड़ित पक्ष के बीच हुई बातचीत, संपर्क तथा लेन-देन से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिल सकते हैं। हालांकि जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।

दो आरोपियों की गिरफ्तारी, न्यायिक अभिरक्षा में भेजा

जांच के दौरान पुलिस ने मामले में उमेश दास मानिकपुरी और राजेश वर्मा को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश किया। न्यायालय के आदेश के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

पुलिस की कार्रवाई के बाद अब मामले में आगे की जांच जारी है। बैंक खातों और मोबाइल फोन से मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस कथित ठगी के पूरे लेन-देन की पड़ताल कर रही है।

यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति पर आरोप लगना और अदालत द्वारा दोष सिद्ध होना अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस की कार्रवाई के बाद न्यायिक अभिरक्षा में हैं और मामले से जुड़े आरोपों की कानूनी प्रक्रिया आगे चलेगी।

सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी से रहें सावधान

दुर्ग का यह मामला उन युवाओं और अभिभावकों के लिए भी बड़ा सबक है, जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। किसी भी सरकारी भर्ती में चयन निर्धारित प्रक्रिया और आधिकारिक नियमों के अनुसार होता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति किसी पद पर नियुक्ति कराने के बदले पैसे की मांग करता है या व्यक्तिगत संपर्क के आधार पर नौकरी दिलाने का दावा करता है, तो ऐसे दावे पर तुरंत भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।

विशेषज्ञों और पुलिस की ओर से आम तौर पर लोगों को सलाह दी जाती है कि सरकारी नौकरी से जुड़ी भर्ती की जानकारी केवल आधिकारिक माध्यमों से ही सत्यापित करें। भर्ती की अधिसूचना, आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा, मेरिट और नियुक्ति से संबंधित जानकारी संबंधित विभाग के आधिकारिक स्रोतों से जांचना जरूरी है।

खासकर तब, जब कोई व्यक्ति यह दावा करे कि वह बिना सामान्य भर्ती प्रक्रिया के नौकरी लगवा सकता है, तो परिवारों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। पैसे देने से पहले दस्तावेज, नियुक्ति प्रक्रिया और संबंधित विभाग से जानकारी की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

12 लाख की ठगी ने उठाए कई सवाल

उतई थाना क्षेत्र का यह मामला सिर्फ 12 लाख रुपये की ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले परिवार किस तरह कथित फर्जी वादों के शिकार हो सकते हैं। एक तरफ युवा रोजगार की तलाश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसी उम्मीद का फायदा उठाकर आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और बैंक खातों तथा मोबाइल फोन की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रकम का पूरा लेन-देन किस तरह हुआ और कथित ठगी से जुड़े अन्य पहलुओं में क्या तथ्य सामने आते हैं।

फिलहाल दुर्ग के उतई थाना क्षेत्र में आरक्षक भर्ती के नाम पर 12 लाख रुपये की ठगी का मामला पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही है। वहीं, यह घटना नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं और उनके परिवारों को यह संदेश देती है कि सरकारी नौकरी के नाम पर किसी भी व्यक्ति को रकम देने से पहले हर दावे और प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

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