कोरबा जिले के पसान में ग्रामीणों, व्यापारियों और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सात सूत्रीय मांगों को लेकर चक्का जाम किया। स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी एमबीबीएस डॉक्टर की नियुक्ति समेत विभिन्न मांगों पर प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
कोरबा CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) । कोरबा जिले के पसान क्षेत्र में बुधवार को ग्रामीणों, स्थानीय व्यापारियों और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सात सूत्रीय मांगों को लेकर सड़क पर उतरकर चक्का जाम किया। प्रदर्शन के चलते कई घंटों तक सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लंबे समय से प्रशासन के सामने उनकी समस्याएं रखी जा रही हैं, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आखिरकार प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त किया गया।
सबसे प्रमुख मांग पसान के स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी एमबीबीएस डॉक्टर की नियुक्ति की रही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण क्षेत्र के लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। गंभीर मरीजों को मजबूरी में कटघोरा, कोरबा या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में भेजना पड़ता है, जिससे कई बार स्थिति और गंभीर हो जाती है।
स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से बढ़ रही परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि पसान और आसपास के गांवों की बड़ी आबादी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है। लेकिन लंबे समय से यहां स्थायी डॉक्टर नहीं होने के कारण मरीजों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, रात के समय यदि किसी मरीज की तबीयत बिगड़ जाए तो सबसे बड़ी चुनौती उसे समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना होता है। कई गांव दूरस्थ और वनांचल क्षेत्र में होने के कारण परिवहन व्यवस्था भी सीमित रहती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर योग्य चिकित्सक की उपलब्धता लोगों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा किसी भी नागरिक का अधिकार है और इस दिशा में लगातार उपेक्षा स्वीकार नहीं की जा सकती।
सात सूत्रीय मांगों को लेकर किया गया प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के समक्ष सात सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से रखा। इनमें स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय जनसुविधाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दे शामिल बताए गए। आंदोलन में शामिल लोगों का कहना था कि इन मांगों का संबंध सीधे आम नागरिकों के दैनिक जीवन से है और लंबे समय से इनका समाधान लंबित है।
स्थानीय व्यापारियों ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि क्षेत्र का समुचित विकास तभी संभव है जब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए।
एक सप्ताह पहले सौंपा गया था ज्ञापन
ग्रामीणों ने बताया कि आंदोलन अचानक नहीं किया गया। इसके पहले लगभग एक सप्ताह पूर्व तहसीलदार को मांगों के संबंध में ज्ञापन सौंपा गया था। उस समय प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई का भरोसा मिला था, लेकिन निर्धारित समय के भीतर कोई ठोस पहल नहीं होने के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ गई।
ग्रामीणों का कहना था कि जब बार-बार निवेदन के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तब मजबूर होकर लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करनी पड़ी।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य आम लोगों को परेशान करना नहीं था, बल्कि प्रशासन का ध्यान क्षेत्र की गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित करना था।
चक्का जाम से यातायात प्रभावित
प्रदर्शन के दौरान सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यात्री बसों, निजी वाहनों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही कुछ समय के लिए प्रभावित रही। पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर यातायात व्यवस्था संभाली और लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की।
कई यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना पड़ा, जबकि कुछ लोगों को गंतव्य तक पहुंचने में देरी का सामना करना पड़ा। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
तहसीलदार पहुंचे मौके पर, दिया लिखित आश्वासन
चक्का जाम की सूचना मिलते ही तहसीलदार वीरेंद्र सिंह श्याम पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना।
लंबी बातचीत के बाद प्रशासन की ओर से मांगों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया गया। आश्वासन मिलने के बाद आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की और सड़क पर यातायात सामान्य रूप से बहाल हो गया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि फिलहाल प्रशासन के भरोसे का सम्मान करते हुए आंदोलन समाप्त किया गया है, लेकिन यदि तय समय सीमा के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आगे फिर से आंदोलन करने पर विचार किया जाएगा।
ग्रामीणों की उम्मीदें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर
स्थानीय लोगों का कहना है कि लिखित आश्वासन मिलने के बाद अब उनकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। विशेष रूप से स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी एमबीबीएस डॉक्टर की नियुक्ति को लेकर लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं।
क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि वर्षों से स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग उठती रही है, लेकिन यदि इस बार सकारात्मक पहल होती है तो हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं युवाओं ने भी प्रशासन से समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।
क्षेत्रीय विकास से जुड़ी मांगों पर भी उम्मीद
ग्रामीणों का मानना है कि केवल स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि क्षेत्र की अन्य बुनियादी समस्याओं का भी समाधान आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन सात सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से काम करता है तो इससे पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति मिल सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से संवाद की प्रक्रिया लगातार बनाए रखने और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करने की मांग भी की है, ताकि भविष्य में लोगों को अपनी बात मनवाने के लिए सड़क पर उतरने की नौबत न आए।
पसान में हुआ यह प्रदर्शन केवल एक चक्का जाम नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी चिंताओं का संकेत भी है। स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, प्रशासनिक जवाबदेही और समय पर समस्याओं के समाधान जैसे मुद्दे ग्रामीणों की प्राथमिक चिंता बने हुए हैं। फिलहाल प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद स्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घोषित आश्वासन धरातल पर कितना उतरता है। यदि मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई होती है तो इससे न केवल स्थानीय लोगों का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच बेहतर संवाद का भी मार्ग प्रशस्त होगा।

