विश्व आदिवासी दिवस 2026 के अवसर पर खरसिया विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बहुल गांवों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि रामकुमारी राठिया और अर्चना सिदार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, नशामुक्ति तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा को लेकर समाज को जागरूक रहने का संदेश दिया। पढ़ें पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
खरसिया CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विश्व आदिवासी दिवस पूरे उत्साह, गरिमा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न गांवों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और सामुदायिक सभाओं का आयोजन किया गया। आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करते हुए आने वाली पीढ़ियों तक अपनी परंपराओं और पहचान को सुरक्षित रखने का संकल्प भी दोहराया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन, महिलाएं, युवा और बच्चे शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिभागियों ने अपने लोकनृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से आयोजन को जीवंत बना दिया। पूरे आयोजन का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक सुधार का संदेश भी देना रहा।
रामकुमारी राठिया ने समाज सुधार का किया आह्वान
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रामकुमारी राठिया ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज प्रकृति के सबसे करीब रहने वाला समाज है। इसकी परंपराएं, जीवनशैली और संस्कृति देश की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब लोग अंधविश्वास, कुरीतियों और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूरी बनाएं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा, संस्कार और सकारात्मक वातावरण देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
रामकुमारी राठिया ने कहा कि बदलते समय के साथ आधुनिक शिक्षा और तकनीक को अपनाना जरूरी है, लेकिन अपनी संस्कृति और परंपराओं को भूलना नहीं चाहिए। उन्होंने समाज के प्रत्येक व्यक्ति से सामाजिक एकता बनाए रखने और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का आग्रह किया।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर दिया गया विशेष जोर
कार्यक्रम में मौजूद अर्चना सिदार ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से ही संभव है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि वे भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है जितनी शिक्षा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने, नियमित जांच कराने और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए लोगों को आगे आना चाहिए।
रोजगार के संबंध में उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर युवा स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। यदि समाज शिक्षित और आत्मनिर्भर बनेगा तो आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर मजबूत होगा।
जल, जंगल और जमीन की रक्षा पर दिया गया संदेश
अर्चना सिदार ने आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व से जुड़े जल, जंगल और जमीन के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल पर्यावरण की दृष्टि से ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए भी आवश्यक है।
उन्होंने समाज से अपील की कि सभी लोग एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करें और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि संगठित समाज ही अपने अधिकारों और हितों की प्रभावी रक्षा कर सकता है।
सांस्कृतिक विरासत को संजोने का लिया गया संकल्प

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों और युवाओं ने पारंपरिक लोकनृत्य एवं लोकगीत प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों ने आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली इतिहास को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में मौजूद बुजुर्गों ने युवाओं को अपनी मातृभाषा, लोककला, रीति-रिवाज और पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने का संदेश दिया। उनका कहना था कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
सामाजिक एकजुटता और नई पीढ़ी पर विशेष फोकस
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि समाज की नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यदि बच्चे और युवा शिक्षित, जागरूक और संस्कारित होंगे तो समाज का भविष्य भी मजबूत होगा।
इस अवसर पर समाज के लोगों ने नशामुक्ति, शिक्षा के प्रसार, महिलाओं के सम्मान, सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प भी लिया।
समाज के विकास के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता
विश्व आदिवासी दिवस का यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक जागरूकता और विकास का एक प्रभावी मंच भी बना। वक्ताओं ने कहा कि जब समाज शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सुधार जैसे मुद्दों पर मिलकर कार्य करेगा, तभी वास्तविक विकास संभव होगा।
खरसिया विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बहुल इलाकों में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण रहा कि अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक सुधार के माध्यम से समाज को नई दिशा दी जा सकती है। आयोजन में लोगों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश भी दिया कि आदिवासी समाज अपनी परंपराओं पर गर्व करते हुए विकास की राह पर मजबूती से आगे बढ़ना चाहता है।

