कबीरधाम जिले के नेउर गांव की तीन सगी बहनों किरण, ज्योति और सुमन महोबिया ने एक साथ NEET परीक्षा उत्तीर्ण कर नया इतिहास रच दिया। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने उनके घर पहुंचकर सम्मानित किया और इसे पूरे प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया। पढ़ें पूरी खबर।
कवर्धा CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24)। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के छोटे से गांव नेउर से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश में रहते हुए तीन सगी बहनों—किरण महोबिया, ज्योति महोबिया और सुमन महोबिया ने इस वर्ष राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और परिवार का सहयोग मिले तो कोई भी सपना असंभव नहीं रहता।
इन तीनों बहनों की ऐतिहासिक उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा स्वयं उनके गांव नेउर पहुंचे। उन्होंने छात्राओं और उनके परिजनों से मुलाकात कर बधाई दी तथा इस उपलब्धि को पूरे प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
घर पहुंचकर दी शुभकामनाएं, परिवार की मेहनत को भी सराहा

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने तीनों छात्राओं के घर पहुंचकर सबसे पहले उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने छात्राओं की माता भगवती महोबिया, पिता राम महोबिया तथा अन्य परिजनों से आत्मीय मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार के लिए इससे बड़ी खुशी का अवसर नहीं हो सकता कि एक साथ तीन बेटियां मेडिकल जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्र में प्रवेश पाने की दिशा में सफलता प्राप्त करें। यह उपलब्धि केवल महोबिया परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कबीरधाम जिले और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है।
‘तीन बहनों की सफलता पूरे प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा’
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि एक ही घर में रहकर तीन बहनों का एक साथ नीट जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना और सफलता हासिल करना असाधारण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर विद्यार्थियों में यह धारणा बन जाती है कि बड़े शहरों और महंगे कोचिंग संस्थानों के बिना सफलता मुश्किल है, लेकिन महोबिया परिवार की बेटियों ने इस सोच को बदलने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि—
“इन तीनों बेटियों ने यह साबित किया है कि नियमित अध्ययन, अनुशासन, सही रणनीति और दृढ़ संकल्प के साथ गांव में रहकर भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।”
ऑनलाइन कोचिंग से की तैयारी, एक-दूसरे की बनीं सबसे बड़ी ताकत
तीनों बहनों की सफलता का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि उन्होंने किसी बड़े महानगर में जाकर तैयारी नहीं की। उन्होंने अपने गांव में रहकर ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से पढ़ाई की।
तैयारी के दौरान तीनों बहनें एक-दूसरे की सबसे बड़ी सहयोगी बनीं। पढ़ाई से जुड़े विषयों पर चर्चा करना, कठिन प्रश्नों का समाधान निकालना, समय-समय पर एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाना और नियमित अभ्यास करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा।
परिवार का सकारात्मक माहौल और बेटियों की मेहनत ने मिलकर इस ऐतिहासिक सफलता की नींव रखी।
दो बहनों ने पहले ही प्रयास में हासिल की सफलता
इस उपलब्धि की खास बात यह भी है कि ज्योति महोबिया और सुमन महोबिया ने अपने पहले ही प्रयास में नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर शानदार सफलता हासिल की है।
दोनों बहनों ने अपनी स्कूली शिक्षा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, बोड़ला से पूरी की। गुणवत्तापूर्ण विद्यालयी शिक्षा और स्वयं के निरंतर प्रयास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
वहीं बड़ी बहन किरण महोबिया ने अपने दूसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की। उन्होंने यह साबित किया कि यदि पहली बार सफलता नहीं मिले तो धैर्य और निरंतर मेहनत के साथ दोबारा प्रयास करने पर लक्ष्य अवश्य प्राप्त किया जा सकता है।
ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए बनी मिसाल
महोबिया परिवार की तीनों बेटियों की सफलता उन हजारों विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
आज भी प्रदेश के अनेक गांवों में संसाधनों की सीमाएं हैं, लेकिन इंटरनेट और डिजिटल शिक्षा ने नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। इन तीनों बहनों की उपलब्धि यह संदेश देती है कि यदि विद्यार्थी उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग करें तो राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जा सकता है।
परिवार की भूमिका भी रही अहम
किसी भी विद्यार्थी की सफलता के पीछे परिवार का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। महोबिया परिवार ने अपनी बेटियों की पढ़ाई के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया।
माता-पिता ने बेटियों का मनोबल बढ़ाया और उन्हें अपनी क्षमताओं पर विश्वास बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। यही विश्वास आज पूरे परिवार के लिए गर्व का कारण बना है।
शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उदाहरण समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करते हैं। जब छोटे गांवों के विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करते हैं तो आसपास के अन्य छात्र-छात्राओं में भी आत्मविश्वास बढ़ता है।
तीनों बहनों की उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि शिक्षा में अनुशासन, समय प्रबंधन और निरंतर अभ्यास का कोई विकल्प नहीं होता।
प्रदेश के लिए गौरव का क्षण

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ये तीनों बेटियां उत्कृष्ट चिकित्सक बनकर समाज की सेवा करेंगी और अपने गांव, जिले तथा प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करेंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी सफलताएं नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देती हैं और यह विश्वास मजबूत करती हैं कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती।
नई पीढ़ी के लिए सीख
नेउर गांव की तीनों बहनों की कहानी केवल परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, अनुशासन, पारिवारिक सहयोग और आत्मविश्वास की कहानी है। यह सफलता बताती है कि सीमित संसाधन कभी भी बड़े सपनों के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा नहीं बनते। सही दिशा, निरंतर अभ्यास और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कोई भी विद्यार्थी अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है।
कबीरधाम की इन तीन बेटियों ने न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के सामने एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो आने वाले वर्षों तक प्रेरणा देता रहेगा।

