बिलासपुर के टिकारी स्थित मिनीमाता शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने ऑपरेशन सिपाही रक्षासूत्र 0.4 अभियान के तहत देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों के लिए स्वयं निर्मित राखियां, भावनात्मक पत्र और अपने आंगन की मिट्टी भेजी। जानिए इस अनूठे अभियान का उद्देश्य और विद्यार्थियों का राष्ट्रप्रेम।
बिलासपुर टिकारी CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) । रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि उन वीर सैनिकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का भी अवसर है जो हजारों किलोमीटर दूर देश की सीमाओं पर दिन-रात तैनात रहकर हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इसी भावना को साकार करते हुए मिनीमाता शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, टिकारी के छात्र-छात्राओं एवं समस्त शाला परिवार ने ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षासूत्र 0.4’ अभियान के अंतर्गत देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक भाइयों के लिए स्वयं निर्मित राखियां, अपने हाथों से लिखी भावनात्मक चिट्ठियां तथा अपने घर-आंगन की पावन मिट्टी भेजी।
विद्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष अभियान के दौरान विद्यार्थियों में देशभक्ति और सैनिकों के प्रति सम्मान का अद्भुत उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने रंग-बिरंगी राखियां स्वयं तैयार कीं, जिनमें केवल धागे नहीं बल्कि उनके मन की भावनाएं भी जुड़ी हुई थीं। इसके साथ ही उन्होंने सैनिक भाइयों के नाम पत्र लिखकर उनके साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
रक्षाबंधन पर कोई सैनिक भाई न रहे अकेला
इस अभियान का मूल उद्देश्य उन सैनिकों तक बहनों और देशवासियों का स्नेह पहुंचाना है, जो हर त्योहार अपने परिवार से दूर देश की सेवा में समर्पित रहते हैं। रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व पर जब अधिकांश लोग अपने परिवार के साथ त्योहार मनाते हैं, तब सीमा पर तैनात जवान अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते हुए देश की सुरक्षा में जुटे रहते हैं।
इसी भाव को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों ने यह संकल्प लिया कि इस बार किसी भी सैनिक भाई की कलाई सूनी नहीं रहेगी। उनके द्वारा बनाई गई राखियां केवल एक धागा नहीं बल्कि पूरे देश की शुभकामनाओं, सम्मान और विश्वास का प्रतीक हैं।
आंगन की मिट्टी भेजकर जताया मातृभूमि से जुड़ाव
इस अभियान की सबसे विशेष बात यह रही कि विद्यार्थियों ने राखियों और चिट्ठियों के साथ अपने घर-आंगन की एक चुटकी मिट्टी भी भेजी। इस मिट्टी के माध्यम से बच्चों ने सैनिकों तक अपनी मातृभूमि की खुशबू और अपनापन पहुंचाने का प्रयास किया।
विद्यार्थियों का मानना है कि जब सैनिक इस मिट्टी को देखेंगे तो उन्हें यह महसूस होगा कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है और हर नागरिक उनके त्याग का सम्मान करता है। यह प्रतीकात्मक पहल सैनिकों और नागरिकों के बीच भावनात्मक संबंध को और अधिक मजबूत बनाने का संदेश देती है।
प्राचार्य तृप्ति कोसरिया ने बताया रक्षाबंधन का वास्तविक संदेश
इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्य तृप्ति कोसरिया ने विद्यार्थियों को रक्षाबंधन पर्व के महत्व के साथ-साथ सैनिकों के योगदान से भी अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक विषम परिस्थितियों, कठिन मौसम और अनेक चुनौतियों के बीच अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। वे अपने परिवार से दूर रहकर देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। ऐसे वीर सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि राष्ट्रप्रेम केवल शब्दों में नहीं बल्कि छोटे-छोटे कार्यों के माध्यम से भी व्यक्त किया जा सकता है। सैनिकों के लिए राखियां बनाना, उन्हें शुभकामनाएं भेजना और उनके प्रति सम्मान प्रकट करना बच्चों के भीतर देशभक्ति की भावना को मजबूत बनाता है।
तीन वर्षों से चल रहा है ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षासूत्र’ अभियान


‘ऑपरेशन सिपाही रक्षासूत्र’ अभियान पिछले तीन वर्षों से लगातार संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का संचालन सिपाही संगठन द्वारा किया जाता है, जिसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से विद्यार्थियों, महिलाओं और आम नागरिकों द्वारा तैयार की गई राखियां एकत्रित की जाती हैं।
इन सभी रक्षासूत्रों को व्यवस्थित रूप से सेना मुख्यालय भेजा जाता है, जहां से उन्हें देश के अलग-अलग सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिकों तक पहुंचाया जाता है। इस पहल का उद्देश्य सैनिकों को यह संदेश देना है कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है और उनके त्याग को कभी नहीं भूल सकता।
विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह से निभाई जिम्मेदारी
विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कई विद्यार्थियों ने अपने हाथों से आकर्षक राखियां तैयार कीं, जबकि कुछ ने सैनिक भाइयों के लिए प्रेरणादायक संदेश लिखे। बच्चों ने अपने पत्रों में सैनिकों के स्वस्थ रहने, सुरक्षित रहने और जल्द अपने परिवार से मिलने की शुभकामनाएं भी दीं।
विद्यालय के शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें बताया कि देश की सुरक्षा में लगे सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करना हर नागरिक का कर्तव्य है। अभियान के दौरान पूरे विद्यालय में राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व का वातावरण देखने को मिला।
शिक्षा के साथ संस्कारों का भी दिया जा रहा है महत्व

विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों में सामाजिक संवेदनशीलता, राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और जिम्मेदारी जैसे संस्कार विकसित करना भी विद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
इसी सोच के साथ विद्यालय समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता है, जिनसे बच्चों को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध हो सके। ऑपरेशन सिपाही रक्षासूत्र जैसे अभियान विद्यार्थियों में देशभक्ति की भावना को मजबूत करने के साथ-साथ उन्हें संवेदनशील नागरिक बनने की प्रेरणा भी देते हैं।
रक्षाबंधन का संदेश बना राष्ट्रीय एकता का प्रतीक

रक्षाबंधन का पर्व केवल पारिवारिक रिश्तों तक सीमित नहीं है। यह विश्वास, सुरक्षा और आत्मीयता का प्रतीक है। जब देशभर के बच्चे सैनिकों के लिए राखियां भेजते हैं तो यह संदेश जाता है कि पूरा भारत एक परिवार है और सीमा पर खड़ा प्रत्येक सैनिक इस परिवार का अभिन्न सदस्य है।
ऐसी पहलें समाज में राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और देशभक्ति की भावना को नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। यही कारण है कि ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षासूत्र’ जैसे अभियान लगातार लोगों का समर्थन प्राप्त कर रहे हैं।

