छत्तीसगढ़ के ट्रांसपोर्टरों ने बढ़ती परिचालन लागत और घटते मालभाड़े के विरोध में सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर पूरे प्रदेश में माल ढुलाई बंद कर ‘पहिया जाम’ आंदोलन की चेतावनी दी गई है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
बिलासपुर CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24)। लगातार बढ़ती परिचालन लागत और दूसरी ओर लगातार घटते मालभाड़े से परेशान छत्तीसगढ़ के ट्रांसपोर्टरों ने अब आर-पार की लड़ाई का संकेत दे दिया है। प्रदेशभर के ट्रक, हाइवा, ट्रेलर और अन्य व्यावसायिक वाहन मालिकों ने सरकार और उद्योग प्रबंधन के खिलाफ संयुक्त मोर्चा खोलते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो पूरे छत्तीसगढ़ में माल ढुलाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी और ‘पहिया जाम’ आंदोलन शुरू किया जाएगा।
यह निर्णय ट्रक मालिक संघ छत्तीसगढ़ प्रदेश की बिलासपुर स्थित व्यापार विहार के प्रांतीय कार्यालय में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया। बैठक में प्रदेश के सभी 33 जिलों से आए ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया और सर्वसम्मति से आंदोलन की रूपरेखा तैयार की।
बढ़ती लागत ने बिगाड़ा ट्रांसपोर्ट कारोबार का संतुलन
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में वाहनों के संचालन पर आने वाला खर्च लगातार बढ़ता गया है, लेकिन मालभाड़े में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई। उल्टा कई जगहों पर मालभाड़ा पहले से भी कम कर दिया गया है।
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार वर्तमान समय में इन मदों में भारी वृद्धि हुई है—
- डीजल की कीमत
- टायर और ट्यूब
- स्पेयर पार्ट्स
- ग्रीस और इंजन ऑयल
- वाहन बीमा
- आरटीओ टैक्स
- राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल टैक्स
- वाहन मरम्मत और रखरखाव
संघ का दावा है कि इन सभी खर्चों को मिलाकर वाहनों की परिचालन लागत में 35 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। इसके बावजूद उद्योगों, बड़े संयंत्रों और बिचौलियों की ओर से मिलने वाला मालभाड़ा परिचालन लागत से भी 30 से 40 प्रतिशत कम तय किया जा रहा है।
छोटे ट्रांसपोर्टरों पर सबसे ज्यादा संकट
बैठक में शामिल वाहन मालिकों ने कहा कि सबसे ज्यादा परेशानी छोटे ट्रांसपोर्टरों को झेलनी पड़ रही है। अधिकांश वाहन बैंक ऋण लेकर खरीदे गए हैं और घटते मालभाड़े के कारण वाहन मालिक समय पर मासिक किस्तें नहीं चुका पा रहे हैं।
संघ के अनुसार—
- प्रदेश के 80 प्रतिशत से अधिक छोटे वाहन मालिक आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
- बड़ी संख्या में वाहन मालिक बैंक की किस्तें समय पर जमा नहीं कर पा रहे।
- कई वाहन जब्ती की स्थिति तक पहुंच चुके हैं।
- यदि यही स्थिति बनी रही तो अनेक छोटे ट्रांसपोर्टरों का व्यवसाय पूरी तरह समाप्त हो सकता है।
चालकों और परिचालकों की रोजी-रोटी पर भी असर
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ट्रांसपोर्ट व्यवसाय केवल वाहन मालिकों तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र से हजारों चालक, परिचालक, मैकेनिक, वेल्डर, पंचर बनाने वाले, ऑटो पार्ट्स व्यापारी और अन्य छोटे व्यवसाय जुड़े हुए हैं।
संघ का कहना है कि यदि ट्रांसपोर्ट कारोबार लगातार घाटे में चलता रहा तो इसका सीधा असर हजारों परिवारों की आय पर पड़ेगा। कई वाहन पहले ही खड़े रहने लगे हैं, जिससे ड्राइवरों और हेल्परों को नियमित रोजगार नहीं मिल पा रहा।
व्यापार से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि मालभाड़ा वास्तविक लागत के अनुरूप तय नहीं किया गया तो आने वाले समय में रोजगार का संकट और गहरा सकता है।
33 जिलों के ट्रांसपोर्टरों ने बनाई संयुक्त रणनीति
बिलासपुर में आयोजित बैठक में प्रदेश के सभी जिलों से आए प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि अब केवल ज्ञापन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
बैठक में तय किया गया कि पहले शासन-प्रशासन, उद्योग प्रबंधन और संबंधित विभागों के सामने अपनी मांगें औपचारिक रूप से रखी जाएंगी। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर समाधान नहीं निकला तो लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से आंदोलन शुरू किया जाएगा।
संघ ने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर प्रदेशव्यापी स्तर पर माल परिवहन रोक दिया जाएगा।
सरकार को दिया 15 दिन का अल्टीमेटम
ट्रक मालिक संघ ने सरकार और संबंधित औद्योगिक संस्थानों को 15 दिनों का समय दिया है।
संघ की प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
- मालभाड़े की दरों का पुनर्निर्धारण
- परिचालन लागत के अनुरूप उचित भाड़ा तय करना
- उद्योगों और बिचौलियों द्वारा मनमाने भाड़े पर रोक
- ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के लिए राहतकारी नीतियां
- वाहन मालिकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्णय
संघ का कहना है कि यदि निर्धारित समय सीमा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो पूरे प्रदेश में माल ढुलाई बंद कर दी जाएगी।
माल ढुलाई बंद हुई तो कई क्षेत्रों पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रदेशव्यापी स्तर पर माल परिवहन बंद होता है तो इसका असर केवल ट्रांसपोर्ट उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा।
संभावित प्रभाव—
- उद्योगों में कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
- सीमेंट, स्टील, कोयला और खनिज परिवहन पर असर पड़ सकता है।
- कृषि उपज की आवाजाही बाधित हो सकती है।
- बाजारों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहेगी।
- निर्माण कार्यों की गति भी धीमी पड़ सकती है।
ऐसे में सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच समय रहते सकारात्मक संवाद बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संवाद से समाधान की उम्मीद
ट्रांसपोर्ट संगठन ने कहा है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि समाधान है। संगठन चाहता है कि सरकार, उद्योग प्रबंधन और ट्रांसपोर्ट प्रतिनिधि एक साथ बैठकर ऐसी व्यवस्था तैयार करें जिससे उद्योगों का संचालन भी प्रभावित न हो और वाहन मालिकों को भी उनके परिचालन खर्च के अनुरूप उचित मालभाड़ा मिल सके।
आने वाले 15 दिन इस पूरे मामले में निर्णायक साबित हो सकते हैं। यदि वार्ता सफल रही तो आंदोलन टल सकता है, लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में प्रदेश में बड़े स्तर पर परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

