लोक शिक्षण संचालनालय ने पहली बार प्रदेशभर के सभी सरकारी स्कूलों में एक समान तिमाही और अर्धवार्षिक परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। जानिए परीक्षा की तिथियां, समय, विषयवार शुरुआत, परीक्षा समिति, नए नियम और छात्रों-शिक्षकों पर इसका प्रभाव।
CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए इस शैक्षणिक सत्र में परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। पहली बार ऐसा होगा जब प्रदेशभर के सभी स्कूलों में तिमाही और अर्धवार्षिक परीक्षाएं एक समान तिथि और एक समान कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएंगी। अब तक इन परीक्षाओं का आयोजन जिला स्तर पर अलग-अलग समय पर किया जाता था, लेकिन इस वर्ष लोक शिक्षण संचालनालय ने पूरे प्रदेश के लिए एक साझा परीक्षा कैलेंडर जारी कर दिया है।
शिक्षा विभाग का उद्देश्य सभी जिलों में परीक्षा प्रक्रिया को एक समान बनाना, मूल्यांकन की गुणवत्ता बढ़ाना तथा समय पर परिणाम घोषित करना है। इसके साथ ही नए शिक्षा सत्र को समयबद्ध तरीके से संचालित करने की तैयारी भी की गई है।
31 मार्च 2027 तक पूरा होगा शैक्षणिक सत्र
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार वर्तमान शैक्षणिक सत्र 31 मार्च 2027 तक पूरा किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि वार्षिक परीक्षाएं समय पर पूरी कराकर मार्च के अंतिम सप्ताह तक परिणाम भी घोषित करने की योजना बनाई गई है।
इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तिमाही और अर्धवार्षिक परीक्षाओं का कार्यक्रम पहले से तय कर दिया गया है, ताकि विद्यार्थियों का मूल्यांकन समय पर हो सके और अगले चरण की पढ़ाई बिना किसी देरी के शुरू हो सके।
पहली बार पूरे प्रदेश में एक समान परीक्षा व्यवस्था
अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में तिमाही और अर्धवार्षिक परीक्षाएं जिला शिक्षा कार्यालयों के स्तर पर अलग-अलग तिथियों में आयोजित होती थीं। इससे परीक्षा कार्यक्रम, प्रश्नपत्रों और मूल्यांकन प्रक्रिया में भी अंतर देखने को मिलता था।
इस बार शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए सभी सरकारी स्कूलों के लिए एक समान परीक्षा कार्यक्रम लागू किया है। इससे परीक्षा संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी विद्यार्थियों का मूल्यांकन एक समान आधार पर किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था भविष्य में बोर्ड परीक्षाओं जैसी एकरूपता विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
तिमाही परीक्षा सितंबर में, अर्धवार्षिक दिसंबर में
जारी परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार—
तिमाही परीक्षा
- प्रारंभ: 21 सितंबर 2026
- समापन: 30 सितंबर 2026
अर्धवार्षिक परीक्षा
- प्रारंभ: 1 दिसंबर 2026
- समापन: 12 दिसंबर 2026
इन परीक्षाओं में कक्षा पहली से लेकर 12वीं तक के सभी विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा।
कक्षावार परीक्षा का समय
लोक शिक्षण संचालनालय ने विभिन्न कक्षाओं के लिए परीक्षा का समय भी निर्धारित कर दिया है।
प्राथमिक (कक्षा 1 से 5)
- सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
माध्यमिक (कक्षा 6 से 8)
- सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक
हाई एवं हायर सेकेंडरी (कक्षा 9 से 12)
- दोपहर 1:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक
इस समय निर्धारण का उद्देश्य सभी स्तरों की परीक्षाओं का सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करना है।
पहले दिन किन विषयों की होगी परीक्षा
जारी कार्यक्रम के अनुसार पहले दिन विभिन्न कक्षाओं के लिए अलग-अलग विषय निर्धारित किए गए हैं।
- कक्षा 1 से 8: हिन्दी
- कक्षा 9 और 11: हिन्दी
- कक्षा 10: गणित
- कक्षा 12: अंग्रेजी
इन्हीं विषयों की परीक्षा दिसंबर में आयोजित होने वाली अर्धवार्षिक परीक्षा में भी संबंधित कार्यक्रम के अनुसार ली जाएगी।
हर जिले में बनेगी परीक्षा समिति
परीक्षा संचालन को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक जिले में जिला परीक्षा समिति का गठन किया जाएगा।
समिति में शामिल होंगे—
- जिला शिक्षा अधिकारी – अध्यक्ष
- सहायक संचालक – सदस्य सचिव
- वरिष्ठ प्राचार्य
- विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO)
- समन्वयक
- प्रधानपाठक
यह समिति परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र वितरण, गोपनीयता, मूल्यांकन और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं की निगरानी करेगी।
देर से पहुंचीं किताबें, शिक्षकों के सामने बड़ी चुनौती
इस बार कई सरकारी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति निर्धारित समय से देर से हुई है। ऐसे में शिक्षकों के सामने सीमित समय में विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए तैयार करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
तिमाही परीक्षा शुरू होने में लगभग डेढ़ महीने का ही समय बचा है। ऐसे में शिक्षकों को नियमित कक्षाओं के साथ-साथ पुनरावृत्ति, अभ्यास प्रश्न और परीक्षा की तैयारी पर विशेष ध्यान देना होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों में अभी भी पाठ्यक्रम पूरा कराने की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में विद्यार्थियों और अभिभावकों दोनों को अतिरिक्त तैयारी करनी होगी।
सिलेबस को लेकर अब भी संशय
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तिमाही परीक्षा में कितने प्रतिशत पाठ्यक्रम से प्रश्न पूछे जाएंगे।
हालांकि अधिकांश शिक्षक पिछले वर्षों की व्यवस्था को देखते हुए फिलहाल लगभग 25 प्रतिशत पाठ्यक्रम के आधार पर विद्यार्थियों को तैयार करा रहे हैं। यदि विभाग की ओर से आगे कोई नया निर्देश जारी होता है तो उसी के अनुसार तैयारी की रणनीति में बदलाव किया जाएगा।
इस विषय पर शिक्षा विभाग से विस्तृत दिशा-निर्देश आने की संभावना भी जताई जा रही है।
क्या होगा इस नई व्यवस्था का फायदा?
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेशभर में एक समान परीक्षा आयोजित होने से कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
- सभी जिलों में एक जैसी परीक्षा प्रणाली लागू होगी।
- मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
- विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर की वास्तविक तुलना संभव होगी।
- समय पर परिणाम जारी करने में सुविधा मिलेगी।
- अगले शैक्षणिक चरण की तैयारी बिना देरी के हो सकेगी।
- शिक्षा विभाग को राज्य स्तर पर विद्यार्थियों के प्रदर्शन का बेहतर विश्लेषण करने का अवसर मिलेगा।
विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए क्या करें?
परीक्षा कार्यक्रम जारी होने के बाद विद्यार्थियों को अब नियमित अध्ययन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अभिभावकों को भी बच्चों की दैनिक पढ़ाई की निगरानी करनी चाहिए और समय-समय पर पुनरावृत्ति करवानी चाहिए।
शिक्षकों का भी मानना है कि यदि विद्यार्थी अभी से विषयवार तैयारी शुरू कर दें तो तिमाही और अर्धवार्षिक दोनों परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
प्रदेश में पहली बार लागू की गई यह एकीकृत परीक्षा व्यवस्था शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। एक समान परीक्षा कैलेंडर से न केवल परीक्षा प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी, बल्कि विद्यार्थियों के मूल्यांकन में भी समानता आएगी। हालांकि पुस्तकों की देर से उपलब्धता और पाठ्यक्रम की तैयारी जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन समयबद्ध योजना के साथ स्कूल, शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर इन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। आने वाले दिनों में शिक्षा विभाग द्वारा पाठ्यक्रम और मूल्यांकन से जुड़े अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी होने की भी संभावना है।

