गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरदर्री के पास सड़क किनारे बड़ी मात्रा में दवाइयां और मेडिकल वेस्ट मिलने से हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से जांच, जिम्मेदारों पर कार्रवाई और मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण की मांग की है।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) । जिले के मरवाही विकासखंड अंतर्गत स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरदर्री एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। स्वास्थ्य केंद्र के आसपास सड़क किनारे पड़े कचरे के ढेर में बड़ी मात्रा में दवाइयां, सिरप की बोतलें और मेडिकल वेस्ट मिलने की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का आरोप है कि खुले में फेंकी गई इन दवाइयों की कीमत लाखों रुपये हो सकती है। हालांकि, इन दवाइयों का वास्तविक मूल्य कितना है, वे एक्सपायरी थीं या उपयोग योग्य थीं, और इन्हें किस परिस्थिति में यहां फेंका गया, इसका खुलासा स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगा।
यह मामला केवल सरकारी दवाइयों की बर्बादी तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल वेस्ट प्रबंधन, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सड़क किनारे बिखरी मिली दवाइयां, लोगों ने जताई चिंता

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र के आसपास काफी समय से कचरे का ढेर जमा है। हाल ही में लोगों की नजर वहां बड़ी संख्या में दवाइयों के पैकेट, सिरप की खाली और भरी बोतलें, दवा के रैपर तथा अन्य मेडिकल सामग्री पर पड़ी। इसके बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में अक्सर मरीजों को कई दवाइयां उपलब्ध नहीं होने की शिकायत रहती है, जबकि दूसरी ओर बड़ी मात्रा में दवाइयों का इस तरह खुले में पड़ा मिलना बेहद चिंताजनक है। लोगों का कहना है कि यदि ये दवाइयां उपयोग योग्य थीं तो यह सरकारी संसाधनों की बर्बादी का मामला हो सकता है और यदि एक्सपायरी दवाइयां थीं तो उनका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाना चाहिए था।
स्कूल के पास मेडिकल वेस्ट मिलने से बढ़ी चिंता
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि जिस स्थान के आसपास यह मेडिकल वेस्ट और दवाइयां पड़ी मिली हैं, उसके नजदीक ही हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालय संचालित हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इसी मार्ग से विद्यालय आते-जाते हैं।
ऐसी स्थिति में खुले में पड़ी दवाइयां और मेडिकल वेस्ट बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। यदि कोई बच्चा अनजाने में दवा उठा ले या उसके संपर्क में आ जाए तो स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकता है। इसके अलावा बारिश के मौसम में यह मेडिकल कचरा आसपास के वातावरण और जल स्रोतों को भी प्रभावित कर सकता है।
मेडिकल वेस्ट के निस्तारण पर उठे सवाल
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट का निस्तारण निर्धारित नियमों के तहत किया जाना अनिवार्य है। दवाइयों, सिरिंज, इंजेक्शन, सिरप की बोतलों और अन्य चिकित्सा सामग्री को खुले में फेंकना पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा माना जाता है।
यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट का उचित प्रबंधन नहीं किया जा रहा है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि संक्रमण फैलने का भी कारण बन सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक माना जाता है।
ग्रामीणों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल मेडिकल वेस्ट हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयां वहां कैसे पहुंचीं।
लोगों ने मांग की है कि—
- पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया जाए।
- चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति की जांच की जाए।
- मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सरकारी दवाइयों के रखरखाव पर भी उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में दवाइयों के भंडारण और वितरण व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में यह सामने आता है कि उपयोग योग्य दवाइयों को बिना प्रक्रिया अपनाए फेंका गया, तो यह सरकारी धन की बर्बादी का मामला भी बन सकता है। वहीं यदि दवाइयां एक्सपायरी थीं, तब भी उनका निस्तारण निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार होना चाहिए था।
स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि दवाइयों की खरीद, भंडारण, उपयोग और निस्तारण की पूरी प्रक्रिया का समय-समय पर ऑडिट किया जाए।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले में स्थानीय लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले की गंभीर जांच नहीं हुई तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा सामने आ सकती हैं।
क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि विभाग न केवल सड़क किनारे पड़े मेडिकल वेस्ट को तत्काल हटाएगा, बल्कि पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगा और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए ठोस व्यवस्था भी करेगा।
जनस्वास्थ्य से जुड़ा है मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल वेस्ट का उचित प्रबंधन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। अस्पतालों से निकलने वाले कचरे का सुरक्षित निस्तारण संक्रमण, पर्यावरण प्रदूषण और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बेहद आवश्यक है। ऐसे मामलों में थोड़ी सी लापरवाही भी आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच करता है, मेडिकल वेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था में क्या सुधार करता है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

