सूरजपुर के ग्राम करकोटी में जिंदा महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर जमीन का नामांतरण और रजिस्ट्री कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। झिलमिली थाना पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी समेत चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सूरजपुर CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) । छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से राजस्व व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले के झिलमिली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम करकोटी में एक जीवित महिला को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर उसकी जमीन का नामांतरण और बाद में रजिस्ट्री तक करा दी गई। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार, संबंधित पटवारी तथा अन्य सहयोगियों समेत कुल चार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है।
इस घटना ने न केवल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकारी अभिलेखों की विश्वसनीयता और भूमि रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
कैसे रची गई कथित साजिश
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पूरा मामला ग्राम करकोटी की एक कीमती जमीन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि जमीन पर कब्जा करने की नीयत से महिला का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया गया। इसके बाद उसी दस्तावेज को आधार बनाकर राजस्व अभिलेखों में महिला को मृत दर्शाया गया और उसकी जमीन का नामांतरण करा लिया गया।
यहीं तक मामला सीमित नहीं रहा। नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित जमीन की रजिस्ट्री भी कर दी गई। यदि समय रहते इस कथित फर्जीवाड़े का खुलासा नहीं होता, तो वास्तविक भूमि स्वामित्व हमेशा के लिए प्रभावित हो सकता था।
शिकायत के बाद खुली परतें
बताया जा रहा है कि मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू की। जांच के दौरान दस्तावेजों का मिलान, राजस्व रिकॉर्ड और उपलब्ध प्रमाणों की पड़ताल की गई। इसी दौरान कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं।
जांच में प्रथम दृष्टया दस्तावेजों में हेराफेरी और सरकारी प्रक्रिया के दुरुपयोग के संकेत मिलने के बाद झिलमिली थाना पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली।
तत्कालीन तहसीलदार और पटवारी भी जांच के दायरे में
पुलिस द्वारा दर्ज किए गए प्रकरण में तत्कालीन तहसीलदार, संबंधित पटवारी तथा अन्य सहयोगियों को आरोपी बनाया गया है। हालांकि पुलिस ने अभी विस्तृत जांच पूरी नहीं की है, इसलिए सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जाएगा कि कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र किस स्तर पर तैयार हुआ, उसे राजस्व रिकॉर्ड में किस प्रक्रिया के तहत स्वीकार किया गया और नामांतरण तथा रजिस्ट्री की कार्रवाई किन दस्तावेजों के आधार पर पूरी की गई।
भूमि रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर उठे सवाल
यह मामला सामने आने के बाद आम लोगों के बीच भी चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर उसकी संपत्ति का हस्तांतरण संभव हो जाता है, तो यह राजस्व व्यवस्था में मौजूद कमियों की ओर संकेत करता है।
भूमि विवादों से जुड़े मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे मामलों में एक छोटी सी लापरवाही भी किसी व्यक्ति के संपत्ति अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।
दस्तावेजों की होगी गहन जांच
पुलिस और संबंधित विभाग अब पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच करेंगे। जांच में यह भी देखा जाएगा कि—
- फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र किसने तैयार किया।
- राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर किया गया।
- नामांतरण की प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका रही।
- रजिस्ट्री किन दस्तावेजों के आधार पर की गई।
- क्या इस तरह के अन्य मामलों में भी समान तरीका अपनाया गया है।
यदि जांच के दौरान अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं, तो प्रकरण में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ में समय-समय पर भूमि विवाद और फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने के मामले सामने आते रहे हैं। हालांकि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर राजस्व अभिलेखों की सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर बहस तेज कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड होने के बावजूद यदि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण जैसी प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो सत्यापन तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
पुलिस ने शुरू की आगे की कार्रवाई
झिलमिली थाना पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच के आधार पर अपराध दर्ज कर लिया गया है। अब मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों, रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जाएगी। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आवश्यक कार्रवाई होगी।
स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना मामला
ग्राम करकोटी सहित पूरे क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी अभिलेखों में किसी जीवित व्यक्ति को मृत दर्शाया जा सकता है, तो यह बेहद गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
लोगों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

