सूरजपुर के बिहारपुर में तहसीलदार की कार और XUV की टक्कर के बाद विवाद गहरा गया। ग्रामीणों ने बिहारपुर थाने का घेराव कर धरना दिया और तहसीलदार के खिलाफ निष्पक्ष जांच व मेडिकल परीक्षण की मांग उठाई। पढ़ें पूरी खबर।
सूरजपुर।CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के बिहारपुर क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना के बाद प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों के बीच विवाद गहरा गया है। एक वाहन टक्कर की घटना ने देखते ही देखते बड़ा रूप ले लिया, जिसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण बिहारपुर थाने पहुंच गए और तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों का आरोप है कि दुर्घटना के बाद मामले को सामान्य तरीके से सुलझाने के बजाय उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई।
घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित अधिकारी की भूमिका की जांच करने तथा मेडिकल परीक्षण कराने की मांग की है। वहीं पुलिस ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, बिहारपुर क्षेत्र के एक ग्रामीण ने अपनी एक्सयूवी (XUV) कार सड़क किनारे खड़ी की थी। इसी दौरान बिहारपुर तहसीलदार करमचंद जाटवार अपनी ब्रेजा (Brezza) कार से वहां पहुंचे। ग्रामीण का आरोप है कि तहसीलदार द्वारा चलाई जा रही कार उसकी खड़ी एक्सयूवी से टकरा गई, जिससे वाहन को नुकसान पहुंचा।
पीड़ित ग्रामीण का कहना है कि जब उसने वाहन क्षतिग्रस्त होने पर आपत्ति जताई और घटना की जानकारी लेने का प्रयास किया, तब तहसीलदार ने कथित तौर पर अपने पद का प्रभाव दिखाते हुए उसके साथ अभद्र व्यवहार किया। हालांकि, इस संबंध में तहसीलदार का पक्ष समाचार लिखे जाने तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
थाने में शिकायत के बाद बढ़ी हलचल
घटना के तुरंत बाद पीड़ित ग्रामीण बिहारपुर थाने पहुंचा और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की जानकारी क्षेत्र में फैलते ही आसपास के गांवों के लोग भी बड़ी संख्या में थाने पहुंचने लगे।
कुछ ही समय में बिहारपुर थाना परिसर के बाहर ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई। लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया और प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और यदि किसी सामान्य नागरिक के खिलाफ नियम लागू होते हैं तो प्रशासनिक अधिकारियों पर भी वही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने उठाई मेडिकल परीक्षण की मांग
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखीं। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित तहसीलदार का मेडिकल परीक्षण कराने की भी मांग उठाई।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी प्रकार का पक्षपात नहीं होना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष होगी तो आम लोगों का प्रशासन और कानून व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होगा।
प्रदर्शन के दौरान क्या रहा माहौल
बिहारपुर थाना परिसर के बाहर प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग दोहराई। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी प्रकार की हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली।
स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार लोगों से बातचीत कर माहौल शांत रखने का प्रयास करते रहे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि शिकायत के आधार पर सभी तथ्यों की जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस कर रही है मामले की जांच
बिहारपुर पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस दुर्घटना के कारणों, घटनास्थल की परिस्थितियों और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
जांच के दौरान यदि घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों या अन्य तकनीकी साक्ष्यों की उपलब्धता होगी तो उन्हें भी जांच में शामिल किया जा सकता है। साथ ही प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जाने की संभावना है।
तहसीलदार का पक्ष आना बाकी
समाचार लिखे जाने तक तहसीलदार करमचंद जाटवार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में घटना को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के अनुसार किसी भी विवादित मामले में दोनों पक्षों का पक्ष महत्वपूर्ण होता है। जैसे ही प्रशासन या तहसीलदार की ओर से आधिकारिक बयान जारी होगा, समाचार को उसी अनुसार अद्यतन किया जाएगा।
स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बना मामला
बिहारपुर क्षेत्र में यह घटना पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी भी अधिकारी पर आरोप लगते हैं तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं कई लोगों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस मामले का जल्द समाधान निकालकर क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करेगा।
फिलहाल पूरे मामले की निगाहें पुलिस जांच और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और दोनों पक्षों के दावों में कितनी सच्चाई है।

