मिलावटखोरों पर सरकार का शिकंजा होगा और कड़ा, स्वास्थ्य मंत्री बोले— जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को नहीं मिलेगी राहत

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। रायपुर रेलवे स्टेशन पर 500 किलो संदिग्ध पनीर जब्ती, एनालॉग पनीर, दूध, दही और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट पर सरकार की कार्रवाई, पूरी खबर पढ़ें।

रायपुर CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24)। छत्तीसगढ़ सरकार ने खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज करने के संकेत दिए हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतेगी। उन्होंने दो टूक कहा कि “मिलावटखोरों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा।”

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार की कार्रवाई केवल एनालॉग पनीर तक सीमित नहीं है, बल्कि दूध, दही, मक्खन, घी, खोवा और अन्य खाद्य सामग्री में मिलावट करने वाले लोगों और कारोबारियों पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीमें प्रदेशभर में नियमित रूप से जांच अभियान चला रही हैं और जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी हालत में स्वीकार नहीं

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं बल्कि लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण विषय है। यदि खाद्य पदार्थों में मिलावट की जाती है तो उसका सीधा असर बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसलिए सरकार की प्राथमिकता है कि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थ पूरी तरह सुरक्षित और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों।

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर लाइसेंस निरस्त करने, आर्थिक दंड लगाने और कानूनी मुकदमा दर्ज करने जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।

सिर्फ एनालॉग पनीर नहीं, दूध-दही भी जांच के दायरे में

हाल के दिनों में प्रदेश में एनालॉग पनीर को लेकर काफी चर्चा रही है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री ने साफ किया कि सरकार केवल एक उत्पाद पर फोकस नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि दूध, दही, मक्खन, घी, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों सहित सभी खाद्य वस्तुओं की गुणवत्ता की नियमित जांच की जा रही है।

उन्होंने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी लगातार बाजारों, डेयरी प्रतिष्ठानों, होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकानों और थोक व्यापारियों के यहां निरीक्षण कर रहे हैं। संदिग्ध खाद्य सामग्री के नमूने लेकर प्रयोगशालाओं में परीक्षण कराया जा रहा है। रिपोर्ट में अनियमितता मिलने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

रायपुर रेलवे स्टेशन पर 500 किलो संदिग्ध पनीर का मामला भी चर्चा में

स्वास्थ्य मंत्री से रायपुर रेलवे स्टेशन पर लगभग 500 किलो संदिग्ध पनीर जब्त होने के बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशन और रेलवे परिसर से जुड़े मामलों की प्रक्रिया सामान्य मामलों से अलग होती है।

उन्होंने बताया कि रेलवे परिसर में जब किसी खाद्य सामग्री को लेकर मामला सामने आता है तो उसमें रेलवे प्रशासन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे मामलों में संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर आगे की कार्रवाई की जाती है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रक्रिया अलग होने का मतलब यह नहीं है कि कार्रवाई नहीं होगी। जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।

खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन को नियमित जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा सके।

उन्होंने कहा कि त्योहारों के मौसम में मिठाइयों, दूध उत्पादों और अन्य खाद्य वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। इसी वजह से विशेष अभियान चलाकर बाजारों की निगरानी की जाएगी ताकि लोगों तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचे।

विशेषज्ञ भी बताते हैं मिलावटी खाद्य पदार्थों को गंभीर खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन शरीर के लिए गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। नकली या निम्न गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पादों में मौजूद रसायन पाचन तंत्र, लीवर, किडनी और अन्य अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर अपेक्षाकृत अधिक होता है।

इसी कारण खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन और व्यापारियों दोनों की जिम्मेदारी है। उपभोक्ताओं को भी प्रमाणित दुकानों से खाद्य सामग्री खरीदने और संदिग्ध गुणवत्ता दिखाई देने पर संबंधित विभाग में शिकायत करने की सलाह दी जाती है।

उपभोक्ताओं से भी सतर्क रहने की अपील

स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि वे बिना बिल के खाद्य सामग्री खरीदने से बचें। यदि किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता, रंग, गंध या स्वाद को लेकर संदेह हो तो उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं। उपभोक्ताओं की शिकायतों के आधार पर भी विभाग जांच कर कार्रवाई करता है।

सरकार का मानना है कि प्रशासन और आम जनता की संयुक्त भागीदारी से ही खाद्य पदार्थों में मिलावट जैसी गंभीर समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

सरकार का स्पष्ट संदेश

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के बयान से साफ संकेत मिला है कि राज्य सरकार खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाए हुए है। चाहे मामला एनालॉग पनीर का हो, संदिग्ध डेयरी उत्पादों का हो या अन्य खाद्य सामग्री में मिलावट का—सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के पक्ष में है।

आने वाले समय में प्रदेशभर में जांच अभियान और तेज होने की संभावना है। ऐसे में खाद्य कारोबारियों को गुणवत्ता मानकों का पालन करना होगा, जबकि उपभोक्ताओं को भी जागरूक रहकर सुरक्षित खाद्य पदार्थों के उपयोग को प्राथमिकता देनी होगी। सरकार का संदेश स्पष्ट है कि जनता के स्वास्थ्य से समझौता करने वालों के लिए अब कोई राहत नहीं होगी।

 

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