कोरबा में मलेरिया प्रभावित गांवों तक 10 किलोमीटर पैदल पहुंचे विधायक फूलसिंह राठिया, ग्रामीणों से मिलकर जाना हाल, स्वास्थ्य विभाग को दिए सख्त निर्देश

कोरबा के रामपुर विधायक फूलसिंह राठिया ने मलेरिया प्रभावित लेमरू, नकिया, रपता, खम्हूंन और खराखेत जैसे दुर्गम गांवों का 10 किलोमीटर पैदल दौरा किया। ग्रामीणों से मुलाकात कर स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया और स्वास्थ्य विभाग को मलेरिया नियंत्रण के लिए आवश्यक निर्देश दिए।

कोरबा CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) जिले के रामपुर विधानसभा क्षेत्र के दूरस्थ वनांचल इलाकों में इन दिनों मलेरिया का बढ़ता प्रकोप ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। बरसात के मौसम में जलभराव और मच्छरों की बढ़ती संख्या के कारण कई गांवों में लोग बुखार और मलेरिया जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे समय में रामपुर विधायक फूलसिंह राठिया स्वयं प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर हालात का जायजा लेने निकले। उनका यह दौरा केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने दुर्गम रास्तों और नालों को पार करते हुए करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर उन गांवों तक पहुंचने का प्रयास किया, जहां सामान्य दिनों में भी पहुंचना आसान नहीं माना जाता।

विधायक ने लेमरू, नकिया, रपता, खम्हूंन और खराखेत सहित कई गांवों का दौरा किया। इनमें से खम्हूंन और खराखेत जैसे गांवों तक पहुंचने के लिए उन्हें पगडंडी वाले रास्तों से गुजरना पड़ा और बीच में आने वाले कई नालों को पार करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में इन इलाकों तक पहुंचना बेहद कठिन हो जाता है, लेकिन इसके बावजूद विधायक का गांवों तक पहुंचना लोगों के लिए राहत और भरोसे का संदेश लेकर आया।

ग्रामीणों से सीधे संवाद कर जाना स्वास्थ्य का हाल

गांव पहुंचने के बाद विधायक फूलसिंह राठिया ने मलेरिया से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। साथ ही यह भी जाना कि गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम कितनी नियमित रूप से पहुंच रही है, दवाइयों की उपलब्धता कैसी है और जांच की व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं।

उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सा दल से संपर्क करें। समय पर जांच और इलाज से मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग को दिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश

दौरे के दौरान विधायक ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रभावित गांवों में नियमित रूप से चिकित्सा शिविर लगाने, मलेरिया की जांच बढ़ाने और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में संक्रमण के मामले सामने आए हैं, वहां विशेष निगरानी रखी जाए और प्रत्येक घर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं।

उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि मलेरिया रोकथाम के लिए गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि लोग बीमारी के लक्षणों, बचाव के उपायों और समय पर उपचार के महत्व को समझ सकें। इसके साथ ही मच्छरदानी वितरण, लार्वा नियंत्रण और साफ-सफाई जैसे उपायों पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।

‘ग्रामीणों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं’

विधायक फूलसिंह राठिया ने स्पष्ट कहा कि उनके लिए क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक का स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ वनांचल में रहने वाले लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि मलेरिया जैसी बीमारी को केवल दवा से नहीं, बल्कि सामूहिक जागरूकता और समय पर कार्रवाई से भी नियंत्रित किया जा सकता है। यदि सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें और ग्रामीण भी सावधानी बरतें तो संक्रमण को तेजी से रोका जा सकता है।

दुर्गम इलाकों की वास्तविक चुनौतियां भी आईं सामने

इस दौरे के दौरान वनांचल क्षेत्र की भौगोलिक कठिनाइयां भी सामने आईं। कई गांव ऐसे हैं जहां तक पहुंचने के लिए आज भी कच्चे रास्तों और पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के दिनों में छोटे-छोटे नाले उफान पर आ जाते हैं, जिससे आवागमन और अधिक कठिन हो जाता है।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि कई बार स्वास्थ्य कर्मियों और आवश्यक सेवाओं को भी गांव तक पहुंचने में परेशानी होती है। ऐसे में बीमारी फैलने की स्थिति में समय पर इलाज मिलना बड़ी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि इस दौरे के बाद स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।

ग्रामीणों ने जताया आभार

विधायक के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया और अपनी समस्याओं से अवगत कराया। ग्रामीणों का कहना था कि जनप्रतिनिधि का स्वयं दुर्गम रास्तों से होकर गांव पहुंचना उनके प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचायक है।

कई ग्रामीणों ने कहा कि अक्सर दूरस्थ गांवों की समस्याएं केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन जब कोई जनप्रतिनिधि स्वयं मौके पर पहुंचकर हालात देखता है तो लोगों में भरोसा बढ़ता है कि उनकी समस्याओं का समाधान होगा।

बरसात के मौसम में बढ़ जाता है मलेरिया का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वर्षा ऋतु में जलभराव और गंदे पानी के कारण मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ता है। यही कारण है कि वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में मलेरिया के मामले अधिक सामने आते हैं। समय पर जांच, साफ-सफाई, मच्छरदानी का उपयोग और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता संक्रमण रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ग्रामीणों को सलाह दी गई कि वे घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, रात में मच्छरदानी का उपयोग करें और बुखार आने पर घरेलू उपचार के भरोसे न रहकर तुरंत जांच कराएं।

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर रहेगा जोर

विधायक फूलसिंह राठिया ने भरोसा दिलाया कि प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार निगरानी की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी गांव में दवाइयों, जांच किट या चिकित्सा कर्मियों की कमी नहीं होनी चाहिए। यदि कहीं अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होगी तो उसे प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि दूरस्थ वनांचल के लोगों तक शासन की योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे, इसके लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर कार्य करेंगे। मलेरिया नियंत्रण के साथ-साथ ग्रामीणों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

 

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