कुसमुंडा एसईसीएल खदान में ड्यूटी के दौरान ट्रेलर की चपेट में आने से सुपरवाइजर बहरता दास की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और कर्मचारियों ने जीएम कार्यालय में तालाबंदी कर मुआवजा, स्थायी नौकरी और न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। पढ़ें पूरी खबर।
कोरबा CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) जिले स्थित दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की कुसमुंडा खदान में बुधवार को एक दर्दनाक औद्योगिक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। ड्यूटी के दौरान ट्रेलर की चपेट में आने से खदान में कार्यरत सुपरवाइजर बहरता दास (पिता – सुनोउदास), निवासी ग्राम जपेली की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की खबर फैलते ही खदान परिसर में शोक की लहर दौड़ गई, वहीं परिजनों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
घटना के बाद बड़ी संख्या में परिजन, ग्रामीण और खदान कर्मी एसईसीएल कुसमुंडा के महाप्रबंधक (जीएम) कार्यालय पहुंच गए और प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने मृतक के परिवार के लिए उचित मुआवजा, एक आश्रित को स्थायी नौकरी तथा अन्य आर्थिक सहायता की मांग करते हुए जीएम कार्यालय में तालाबंदी कर धरना शुरू कर दिया।
कांटा घर के पास हुआ हादसा
मिली जानकारी के अनुसार यह हादसा कुसमुंडा खदान के कांटा घर (वेट ब्रिज) के समीप हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सुपरवाइजर बहरता दास अपने नियमित कार्यों का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक ट्रेलर की चपेट में आने से उन्हें गंभीर चोटें लगीं। हादसा इतना भीषण था कि उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही खदान के अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। इसके बाद पुलिस और संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई।
हादसे के बाद परिजनों का फूटा गुस्सा
सुपरवाइजर की मौत की खबर जैसे ही उनके गांव जपेली और आसपास के क्षेत्रों में पहुंची, परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में कुसमुंडा खदान पहुंचे। कर्मचारियों के साथ मिलकर उन्होंने एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का प्रभावी ढंग से पालन किया जाता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। उनका आरोप है कि भारी वाहनों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
जीएम कार्यालय में तालाबंदी, धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी

आक्रोशित लोगों ने एसईसीएल कुसमुंडा के जीएम कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए कार्यालय में तालाबंदी कर दी। इसके बाद वहीं धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें हैं—
- मृतक के परिवार को उचित और सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए।
- परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी प्रदान की जाए।
- सभी वैधानिक और सामाजिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
- हादसे की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
- भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त बनाया जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उन्हें लिखित रूप में आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
प्रबंधन और प्रदर्शनकारियों के बीच वार्ता जारी
घटना के बाद एसईसीएल प्रबंधन ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की प्रक्रिया शुरू की। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि समाचार लिखे जाने तक किसी अंतिम सहमति की जानकारी सामने नहीं आई थी। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर रहे हैं।
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए।
जांच के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, ट्रेलर चालक की भूमिका क्या थी और सुरक्षा संबंधी सभी मानकों का पालन किया गया था या नहीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
कुसमुंडा एशिया की प्रमुख ओपनकास्ट कोयला खदानों में गिनी जाती है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी वाहन संचालित होते हैं। ऐसे क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता मानी जाती है।
इस हादसे के बाद एक बार फिर कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, भारी वाहनों की निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार चलने वाले डंपर और ट्रेलरों के बीच कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय, स्पष्ट संकेतक, नियंत्रित वाहन गति और नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक हैं।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

बहरता दास की अचानक हुई मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि वह अपने परिवार के जिम्मेदार सदस्य थे और वर्षों से ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनके निधन से परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
इसी वजह से स्थानीय लोग और कर्मचारी मृतक परिवार को तत्काल राहत और दीर्घकालिक सहायता दिए जाने की मांग कर रहे हैं।
आगे क्या?
फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजरें एसईसीएल प्रबंधन और प्रदर्शनकारियों के बीच चल रही वार्ता पर टिकी हैं। यदि मांगों पर सहमति बनती है तो आंदोलन समाप्त हो सकता है, अन्यथा विरोध और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस जांच, प्रबंधन की कार्रवाई और मुआवजे को लेकर होने वाले निर्णय इस पूरे मामले की अगली दिशा तय करेंगे।

