हरेली तिहार के सरकारी पोस्टरों में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर नहीं होने पर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने इसे प्रदेश की अस्मिता का अपमान बताया, जबकि भाजपा ने इसे तकनीकी एवं मानवीय भूल बताते हुए जल्द सुधार का आश्वासन दिया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
रायपुर CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24)। छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण पारंपरिक पर्व हरेली तिहार के अवसर पर राजधानी रायपुर में लगाए गए सरकारी प्रचार-प्रसार पोस्टरों को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। विवाद की वजह पोस्टरों में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर का नहीं होना है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर प्रदेश की संस्कृति, परंपरा और अस्मिता की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताते हुए कहा है कि यह किसी भी प्रकार की दुर्भावना नहीं, बल्कि एक तकनीकी या मानवीय भूल है, जिसे शीघ्र सुधार लिया जाएगा।
राजधानी में शुरू हुआ यह विवाद अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया है। दोनों प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और हरेली जैसे सांस्कृतिक पर्व के बीच यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर उठाया मुद्दा
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और नेताओं के माध्यम से आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण पर्व हरेली के सरकारी पोस्टरों में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर शामिल नहीं की गई। पार्टी का कहना है कि छत्तीसगढ़ महतारी केवल एक चित्र नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, गौरव और भावनाओं का प्रतीक हैं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब सरकार प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने का दावा करती है, तब ऐसे पोस्टरों से छत्तीसगढ़ महतारी का गायब होना गंभीर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने इसे करोड़ों छत्तीसगढ़वासियों की भावनाओं से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से जवाब मांगा।
कांग्रेस का कहना है कि यदि यह वास्तव में एक चूक है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
भाजपा का जवाब – दुर्भावना नहीं, मानवीय भूल
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पोस्टरों में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर का नहीं होना किसी भी प्रकार की राजनीतिक सोच या सांस्कृतिक उपेक्षा का परिणाम नहीं है।
भाजपा का कहना है कि यह केवल एक मानवीय अथवा तकनीकी त्रुटि है और इसे जल्द ही सुधार लिया जाएगा। पार्टी नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोक परंपराओं और स्थानीय त्योहारों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रही है।
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह एक सामान्य प्रशासनिक चूक को अनावश्यक रूप से राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि यदि किसी पोस्टर में कोई कमी रह गई है तो उसे स्वीकार कर सुधार करना ही उचित कदम है।
हरेली तिहार का सांस्कृतिक महत्व
हरेली छत्तीसगढ़ का पहला प्रमुख पारंपरिक त्योहार माना जाता है। यह कृषि आधारित समाज की जीवनशैली और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक है। इस दिन किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं और अच्छी फसल की कामना करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में घरों के मुख्य द्वार पर नीम की डालियां लगाई जाती हैं, पशुओं की पूजा की जाती है और पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। बच्चों द्वारा गेड़ी चलाने जैसी लोक परंपराएं भी हरेली की विशेष पहचान हैं।
इसी कारण इस पर्व से जुड़े किसी भी सरकारी प्रचार अभियान में स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों को विशेष महत्व दिया जाता है। छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर भी लंबे समय से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान के प्रमुख प्रतीकों में शामिल रही है।
सोशल मीडिया पर भी बंटी राय
हरेली पोस्टर विवाद सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने कांग्रेस के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए, वहीं कई लोगों ने इसे एक सामान्य प्रशासनिक भूल मानते हुए विवाद को अनावश्यक बताया।
कुछ नागरिकों ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में सरकारी प्रचार सामग्री तैयार करते समय स्थानीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े प्रतीकों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
संस्कृति और राजनीति का पुराना संबंध
छत्तीसगढ़ की राजनीति में सांस्कृतिक प्रतीकों का हमेशा विशेष महत्व रहा है। अलग राज्य बनने के बाद से ही विभिन्न सरकारों ने स्थानीय भाषा, लोककला, त्योहारों और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने के लिए अनेक कार्यक्रम संचालित किए हैं।
ऐसे में जब भी किसी सांस्कृतिक प्रतीक को लेकर कोई विवाद सामने आता है, तो वह केवल प्रशासनिक विषय नहीं रह जाता, बल्कि राजनीतिक विमर्श का हिस्सा भी बन जाता है। हरेली पोस्टर विवाद भी उसी कड़ी का एक नया उदाहरण माना जा रहा है।
क्या आगे होगा?
भाजपा की ओर से पोस्टर में हुई कथित त्रुटि को सुधारने का आश्वासन दिया गया है। यदि पोस्टरों में संशोधन किया जाता है तो विवाद जल्द शांत हो सकता है। हालांकि कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को सांस्कृतिक सम्मान और प्रदेश की अस्मिता से जोड़कर उठाती रहेगी।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाती है और क्या विवाद का समाधान सभी पक्षों की संतुष्टि के साथ हो पाता है।
हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा से जुड़ा पर्व है। ऐसे अवसरों पर तैयार किए जाने वाले सरकारी प्रचार-प्रसार में स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक प्रतीकों का समुचित प्रतिनिधित्व होना स्वाभाविक अपेक्षा है। दूसरी ओर, यदि किसी स्तर पर तकनीकी या मानवीय भूल हुई है और उसे शीघ्र सुधार लिया जाता है, तो विवाद को संवाद और सुधार के माध्यम से समाप्त किया जा सकता है। फिलहाल इस मुद्दे ने प्रदेश में संस्कृति और राजनीति के संबंध पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

