कटघोरा नगर पालिका में अटल परिसर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा निर्माण और ब्रॉन्ज सामग्री खरीदी में 13.60 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने कलेक्टर को शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और सीएमओ की बर्खास्तगी की मांग की है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
कटघोरा। नगर पालिका परिषद कटघोरा में अटल परिसर स्थित पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा निर्माण एवं ब्रॉन्ज सामग्री की खरीदी को लेकर कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने नगर पालिका परिषद कटघोरा के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को तत्काल पद से हटाने और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई करने की भी मांग की है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेशभर में सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला होगा, बल्कि जनता के विश्वास के साथ भी गंभीर धोखा माना जाएगा।
क्या है पूरा मामला?

भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र के अनुसार, कटघोरा नगर पालिका के अटल परिसर में स्थापित अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के निर्माण और उसमें प्रयुक्त ब्रॉन्ज सामग्री की खरीदी में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई गई है।
शिकायत में कहा गया है कि विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रकाशित खबरों और स्थानीय नागरिकों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि प्रतिमा निर्माण में वास्तविक ब्रॉन्ज सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। आरोप है कि ब्रॉन्ज के स्थान पर निम्न गुणवत्ता की सामग्री अथवा कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया, जबकि भुगतान ब्रॉन्ज सामग्री के नाम पर किया गया।
इसी आधार पर लगभग 13.60 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता की आशंका व्यक्त की गई है।
भाजपा ने लगाए गंभीर आरोप
गोपाल मोदी का कहना है कि यदि सरकारी अभिलेखों में ब्रॉन्ज सामग्री की खरीदी और उपयोग दर्शाया गया है, जबकि वास्तविक निर्माण में दूसरी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परियोजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। यदि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किया जाता है और भुगतान नियमों के विपरीत किया जाता है, तो इससे आम नागरिकों का सरकारी संस्थाओं पर विश्वास कमजोर होता है।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की तकनीकी, वित्तीय एवं प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
सीएमओ को हटाने की भी मांग
शिकायत में केवल जांच की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि नगर पालिका परिषद कटघोरा के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को तत्काल पद से हटाने की भी मांग की गई है।
गोपाल मोदी का कहना है कि यदि संबंधित अधिकारी अपने पद पर बने रहते हैं तो निष्पक्ष जांच प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए जांच पूरी होने तक उन्हें पद से अलग किया जाना चाहिए ताकि किसी प्रकार का दबाव या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
जनता के पैसे का सवाल
नगर पालिका के माध्यम से होने वाले विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये सार्वजनिक धन के रूप में खर्च किए जाते हैं। ऐसे में किसी भी निर्माण कार्य में गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल स्वाभाविक रूप से जनहित से जुड़े होते हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी प्रतिमा या सार्वजनिक निर्माण में निर्धारित सामग्री का उपयोग नहीं किया गया और उसके बावजूद भुगतान पूरा कर दिया गया, तो इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल दस्तावेजों की जांच पर्याप्त नहीं होती, बल्कि निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच भी कराई जानी चाहिए। यदि आवश्यकता हो तो संबंधित प्रतिमा अथवा निर्माण कार्य का स्वतंत्र विशेषज्ञों से परीक्षण कराया जा सकता है।
प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
भाजपा द्वारा शिकायत सौंपे जाने के बाद अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि प्रशासन शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति गठित करता है, तो दस्तावेजों, भुगतान प्रक्रिया, निविदा, सामग्री की गुणवत्ता तथा निर्माण कार्य की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा सकती है।
प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों का पक्ष सुना जाएगा और उपलब्ध दस्तावेजों एवं तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक माहौल भी हुआ गर्म
इस मुद्दे के सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का संभावित मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि अब तक नगर पालिका प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर उठे ऐसे मुद्दे आम जनता के बीच व्यापक चर्चा का विषय बनते हैं। ऐसे मामलों में समयबद्ध और निष्पक्ष जांच ही किसी भी प्रकार की शंकाओं को दूर कर सकती है।
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
यह उल्लेखनीय है कि फिलहाल भाजपा द्वारा लगाए गए आरोप शिकायत के आधार पर हैं और इनकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासनिक जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी नहीं माना जा सकता।
हालांकि, यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो यह मामला स्थानीय निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं, तो इससे संबंधित अधिकारियों को भी स्पष्टता मिलेगी।
जनता की अपेक्षा यही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आए और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

