कोरबा में मानसून का असर: जलाशयों में तेजी से बढ़ा जलस्तर, किसानों के चेहरे खिले, अगस्त के पहले सप्ताह तक अधिकांश जलाशयों के भरने की संभावना

कोरबा जिले में लगातार हो रही बारिश से 12 से अधिक जलाशयों में 60 से 80 प्रतिशत तक जलभराव हो चुका है, जबकि कई जलाशय ओवरफ्लो होने लगे हैं। जानिए जिले के 40 जलाशयों की स्थिति, किसानों, सिंचाई और मत्स्य पालन पर इसका क्या पड़ेगा असर।

कोरबा CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) इस वर्ष मानसून ने कोरबा जिले में राहत और खुशहाली दोनों की दस्तक दी है। लगातार हो रही बारिश का सबसे सकारात्मक असर अब जिले के जलाशयों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। बीते 37 दिनों में जिले में औसतन 381.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जिसके चलते जल संसाधन विभाग के अधीन आने वाले कई छोटे-बड़े जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। स्थिति यह है कि कोनकोना, मड़वाढोढ़ा, धौंराभांठा और छुरीकला सहित आधा दर्जन से अधिक जलाशयों से पानी ओवरफ्लो होने लगा है, जबकि 12 से अधिक जलाशयों में 60 से 80 प्रतिशत तक जलभराव हो चुका है।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून की यही रफ्तार बनी रही तो अगस्त के प्रथम सप्ताह तक जिले के अधिकांश जलाशय अपनी पूर्ण क्षमता तक भर जाएंगे। इसका सीधा लाभ किसानों, सिंचाई व्यवस्था और मत्स्य पालन गतिविधियों को मिलेगा।

37 दिनों की बारिश ने बदली जलाशयों की तस्वीर

मानसून की शुरुआत के बाद से कोरबा जिले में लगातार अच्छी वर्षा दर्ज की जा रही है। पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार बारिश का वितरण भी संतुलित रहा है, जिससे जलाशयों में पानी का भराव तेजी से बढ़ा है।

जहां शुरुआती दिनों में जलाशयों का जलस्तर सामान्य से कम था, वहीं जुलाई के अंतिम सप्ताह तक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। कई जलाशयों में जलस्तर निर्धारित सीमा तक पहुंच चुका है और अतिरिक्त पानी बहने लगा है। इससे जल संसाधन विभाग भी राहत महसूस कर रहा है क्योंकि जल संरक्षण की दृष्टि से यह स्थिति बेहद अनुकूल मानी जा रही है।

इन जलाशयों से शुरू हुआ ओवरफ्लो

जिले के जिन जलाशयों से पानी ओवरफ्लो होने लगा है, उनमें प्रमुख रूप से—

  • कोनकोना जलाशय
  • मड़वाढोढ़ा जलाशय
  • धौंराभांठा जलाशय
  • छुरीकला जलाशय

के अलावा अन्य छोटे जलाशय भी शामिल हैं।

इन जलाशयों के ओवरफ्लो होने से आसपास के क्षेत्रों में जल उपलब्धता बेहतर हुई है। वहीं भूजल स्तर में भी सुधार की उम्मीद बढ़ गई है, जिसका लाभ आने वाले महीनों में ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा।

12 से अधिक जलाशयों में 60 से 80 प्रतिशत तक जलभराव

जल संसाधन विभाग के अनुसार जिले के 40 मायनर जलाशयों में से 12 से अधिक जलाशयों में जलभराव 60 से 80 प्रतिशत के बीच पहुंच चुका है। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि यदि आगामी दिनों में सामान्य बारिश जारी रही तो अधिकांश जलाशय जल्द ही अपनी पूर्ण क्षमता तक भर जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों का समय पर भरना केवल वर्तमान खरीफ सीजन के लिए ही नहीं बल्कि आगामी रबी सीजन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

किसानों के लिए राहत भरी खबर

कोरबा जिला कृषि प्रधान क्षेत्रों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए जलाशयों पर निर्भर रहते हैं। इस बार समय पर हुई अच्छी बारिश और जलाशयों में बढ़ते जलस्तर ने किसानों की उम्मीदों को नई मजबूती दी है।

अभी खेतों में पर्याप्त वर्षा जल उपलब्ध होने के कारण सिंचाई नहरों को बंद रखा गया है। किसानों को फिलहाल अतिरिक्त सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। लेकिन यदि बारिश कम भी होती है तो जलाशयों में संग्रहित पानी खरीफ फसलों के अंतिम चरण और रबी फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त साबित हो सकता है।

विशेष रूप से धान की खेती करने वाले किसानों के लिए यह स्थिति बेहद सकारात्मक मानी जा रही है।

रबी फसल की तैयारी भी होगी आसान

जलाशयों का भरना केवल खरीफ फसल तक सीमित नहीं है। जिले में गेहूं, चना, मसूर और अन्य रबी फसलों की सिंचाई भी इन्हीं जलाशयों के पानी पर निर्भर करती है।

यदि अगस्त तक अधिकांश जलाशय पूरी क्षमता तक भर जाते हैं तो किसानों को रबी सीजन में पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी सुधार होने की संभावना है।

मत्स्य पालन को भी मिलेगा बड़ा लाभ

कोरबा जिले के मायनर जलाशयों का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है। इन जलाशयों में बड़े स्तर पर मत्स्य पालन भी किया जाता है।

पर्याप्त जलभराव होने से मछलियों की वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा। इससे मत्स्य सहकारी समितियों और इस व्यवसाय से जुड़े ग्रामीण परिवारों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलाशयों में पर्याप्त पानी रहने से मत्स्य उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

जल संरक्षण की दृष्टि से भी सकारात्मक संकेत

लगातार बढ़ रहा जलभराव केवल कृषि और मत्स्य पालन के लिए ही नहीं बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जलाशयों के भरने से—

  • भूजल स्तर में सुधार होगा।
  • आसपास के कुएं और हैंडपंप लंबे समय तक जलयुक्त रहेंगे।
  • गर्मियों में पेयजल संकट कम होने की संभावना रहेगी।
  • स्थानीय जैव विविधता और वन्यजीवों को भी जल उपलब्ध रहेगा।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वर्षा का यह क्रम जारी रहा तो जिले की जल सुरक्षा आने वाले महीनों तक मजबूत बनी रह सकती है।

अभी मानसून का लंबा समय बाकी

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मानसून का लगभग ढाई से तीन माह का समय अभी शेष है। ऐसे में सामान्य वर्षा जारी रहने पर जिले के सभी 40 मायनर जलाशयों के पूरी तरह भरने की संभावना है।

विभाग लगातार जलाशयों के जलस्तर की निगरानी कर रहा है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पानी के सुरक्षित निकास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

प्रशासन की निगरानी जारी

जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग जलाशयों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में आवश्यक सुरक्षा उपाय समय रहते किए जाएं। साथ ही लोगों से भी अपील की जा रही है कि ओवरफ्लो हो रहे जलाशयों और नहरों के आसपास अनावश्यक रूप से न जाएं।

मानसून ने बढ़ाई जिले की उम्मीदें

इस वर्ष की अच्छी बारिश ने कोरबा जिले के लिए नई उम्मीदें जगाई हैं। जलाशयों में तेजी से बढ़ता जलभराव इस बात का संकेत है कि यदि मौसम का साथ इसी तरह मिलता रहा तो कृषि, मत्स्य पालन और जल संरक्षण—तीनों क्षेत्रों में जिले को बड़ा लाभ मिलेगा। किसानों के लिए यह राहत का समय है, वहीं प्रशासन भी आने वाले महीनों में बेहतर जल प्रबंधन की दिशा में आश्वस्त नजर आ रहा है।

 

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