राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, मांझी-चालकी, परगना मांझी और पद्मश्री सम्मानित विभूतियों का विशेष भोज के साथ सम्मान किया। जानिए इस ऐतिहासिक आयोजन की पूरी कहानी, बस्तर की जनजातीय संस्कृति और छत्तीसगढ़ के लिए इसका महत्व।
नई दिल्ली/रायपुर CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक नेतृत्व व्यवस्था को उस समय राष्ट्रीय स्तर पर अभूतपूर्व सम्मान मिला, जब देश के सर्वोच्च संवैधानिक भवन राष्ट्रपति भवन में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों का विशेष स्वागत किया गया। यह केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि बस्तर की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को पूरे देश के सामने सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करने का एक ऐतिहासिक अवसर भी बन गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुंचे 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस प्रतिनिधिमंडल में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार, परगना मांझी, मांझी, चालकी, जनजातीय समाज के पारंपरिक नेतृत्वकर्ता, पद्मश्री सम्मानित विभूतियां तथा संस्कृति और समाज सेवा से जुड़े प्रतिनिधि शामिल थे।
राष्ट्रपति ने स्वयं परोसा भोजन, भावुक हो उठे अतिथि

कार्यक्रम का सबसे भावुक और ऐतिहासिक क्षण तब आया, जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर उनका सम्मान किया। भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा में ऐसे दृश्य अत्यंत दुर्लभ माने जाते हैं। राष्ट्रपति का यह आत्मीय व्यवहार केवल औपचारिक सम्मान नहीं था, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनके गहरे सम्मान और संवेदनशीलता का प्रतीक भी था।
राष्ट्रपति भवन के भव्य वातावरण में जब बस्तर के पारंपरिक मांझी-चालकी और कलाकार राष्ट्रपति के साथ आत्मीय संवाद करते दिखाई दिए, तो यह पल पूरे प्रतिनिधिमंडल के लिए जीवनभर की याद बन गया। कई प्रतिनिधियों ने इसे अपने जीवन का सबसे गौरवपूर्ण क्षण बताया।
बस्तर की संस्कृति को लेकर राष्ट्रपति ने दिखाई विशेष रुचि

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से विस्तार से बातचीत करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, लोककला, रीति-रिवाज और बस्तर पंडुम के आयोजन के बारे में जानकारी प्राप्त की।
उन्होंने विशेष रूप से मांझी-चालकी व्यवस्था के बारे में जानने की उत्सुकता दिखाई। प्रतिनिधियों ने उन्हें बताया कि बस्तर में मांझी-चालकी केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, सामुदायिक एकता और परंपराओं के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। आज भी अनेक गांवों में यह व्यवस्था सामाजिक समरसता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
राष्ट्रपति ने कलाकारों और जनजातीय नेतृत्वकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, बल्कि पूरे भारत की अमूल्य विरासत है। इसका संरक्षण और संवर्धन प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बस्तर पंडुम बना सांस्कृतिक पहचान का राष्ट्रीय मंच
पिछले कुछ वर्षों में बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा है। यह बस्तर की पहचान, जनजातीय परंपराओं, लोकनृत्य, लोकसंगीत, पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प और सामुदायिक जीवन शैली को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बन चुका है।
बस्तर पंडुम-2026 में बड़ी संख्या में जनजातीय कलाकारों, लोकनर्तकों, पारंपरिक वाद्य यंत्रों के कलाकारों और सामाजिक नेतृत्वकर्ताओं ने भाग लिया था। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया जाना इस आयोजन की बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले समय में बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिलने की संभावनाएं मजबूत होंगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया गौरव का क्षण

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर को पूरे छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर अंचल के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति, परंपरा और जनजातीय समाज की जीवन शैली भारत की सांस्कृतिक विविधता की सबसे अनमोल पहचान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिससे जनजातीय संस्कृति केवल संग्रहालयों तक सीमित न रह जाए, बल्कि नई पीढ़ी तक जीवंत रूप में पहुंचे। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्रपति भवन में मिला यह सम्मान बस्तर के युवाओं, कलाकारों और पारंपरिक नेतृत्व व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए नई प्रेरणा बनेगा।
मांझी-चालकी व्यवस्था क्यों है विशेष?
बस्तर के जनजातीय समाज में मांझी-चालकी व्यवस्था सदियों पुरानी सामाजिक प्रशासन प्रणाली मानी जाती है। गांव स्तर पर मांझी समाज का प्रमुख होता है, जबकि चालकी और परगना मांझी क्षेत्रीय स्तर पर सामाजिक समन्वय, विवाद समाधान और परंपराओं के संरक्षण का कार्य करते हैं।
यह व्यवस्था केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक निर्णय प्रणाली का भी महत्वपूर्ण आधार है। राष्ट्रपति भवन में इस व्यवस्था के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया जाना पूरे जनजातीय समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
जनजातीय कला और परंपरा को मिला राष्ट्रीय सम्मान

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कलाकारों और पद्मश्री सम्मानित विभूतियों ने भी राष्ट्रपति के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बस्तर की लोककला, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, लोकनृत्यों, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक विकास और पारंपरिक संस्कृति दोनों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान भी किया।
छत्तीसगढ़ के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मान?
राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह कार्यक्रम केवल सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच से बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को मिली औपचारिक मान्यता भी थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यटन, जनजातीय हस्तशिल्प, लोककला, सांस्कृतिक शोध और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सकारात्मक बढ़ावा मिलेगा। राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान से बस्तर के कलाकारों और शिल्पकारों के लिए नए अवसर भी खुल सकते हैं।
यह आयोजन इस बात का भी संदेश देता है कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति उसकी विविधता में निहित है और बस्तर जैसी समृद्ध परंपराएं देश की सांस्कृतिक विरासत को और अधिक मजबूत बनाती हैं।
राष्ट्रपति भवन में बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, मांझी-चालकी, परगना मांझी और जनजातीय प्रतिनिधियों का सम्मान केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह बस्तर की सांस्कृतिक अस्मिता, जनजातीय गौरव और परंपरागत सामाजिक व्यवस्था के राष्ट्रीय सम्मान का ऐतिहासिक अध्याय बन गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा स्वयं अतिथियों को भोजन परोसना और उनके साथ आत्मीय संवाद करना इस आयोजन को और भी विशेष बना गया। आने वाले वर्षों में यह सम्मान निश्चित रूप से बस्तर की संस्कृति को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

