कटघोरा नगर पालिका के अटल परिसर में स्थापित अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर कथित वित्तीय अनियमितता और कांस्य की जगह दूसरी धातु इस्तेमाल किए जाने का आरोप सामने आया है। भाजपा ने उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पूरे प्रदेश की अटल प्रतिमाओं की जांच की मांग की है।
कोरबा/कटघोरा CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) । छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा नगर पालिका क्षेत्र में पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में निर्मित अटल परिसर इन दिनों विवादों के केंद्र में है। परिसर में स्थापित अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि जिस प्रतिमा को कांस्य (ब्रॉन्ज) धातु से बनाया जाना था, उसकी जगह कम लागत वाली दूसरी धातु का उपयोग किया गया और उसे कांस्य जैसा दिखाने के लिए केवल रंग कर दिया गया।
मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। नगर पालिका द्वारा ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया है, वहीं जांच टीम ने भी स्थल का निरीक्षण किया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बारिश के बाद उखड़ा रंग, सामने आया विवाद

स्थानीय स्तर पर विवाद उस समय शुरू हुआ जब हाल ही में हुई बारिश के दौरान प्रतिमा पर चढ़ा रंग कई स्थानों से उखड़ने लगा। आरोप है कि रंग हटने के बाद प्रतिमा की वास्तविक धातु दिखाई देने लगी, जिससे यह आशंका व्यक्त की गई कि प्रतिमा कांस्य की नहीं बल्कि किसी अन्य धातु से तैयार की गई है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि योजना के अनुसार कांस्य की प्रतिमा स्थापित की जानी थी, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 13 से 14 लाख रुपये थी। आरोप है कि ठेकेदार ने लगभग 10 लाख रुपये में कार्य लेकर निर्धारित गुणवत्ता का पालन नहीं किया और कम लागत वाली धातु का उपयोग किया।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
₹13.60 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता का आरोप
भाजपा ने कटघोरा नगर पालिका के अटल परिसर में प्रतिमा निर्माण कार्य में लगभग ₹13.60 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित ठेकेदार, जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई गई है।
सीएमओ ने दी सफाई, कहा— टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर दी गई थी अनुमति
कटघोरा नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) मुद्रिका प्रसाद तिवारी ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए बताया कि प्रतिमा स्थापित करने से पहले ठेकेदार द्वारा उपलब्ध कराई गई टेस्ट रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर ही अनुमति प्रदान की गई थी।
उन्होंने कहा कि जैसे ही प्रतिमा पर लगे रंग के उखड़ने की शिकायत प्राप्त हुई, नगर पालिका ने तत्काल संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा। उनके अनुसार बिलासपुर से आई जांच टीम ने भी स्थल का निरीक्षण किया है और अब आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद की जाएगी।
सीएमओ ने यह भी स्पष्ट किया कि नगर पालिका जांच में पूरा सहयोग करेगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रदेश की सभी अटल प्रतिमाओं की जांच की उठी मांग

कटघोरा का मामला अब केवल स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि एक स्थान पर प्रतिमा निर्माण में गुणवत्ता संबंधी प्रश्न उठे हैं तो प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों में स्थापित अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाओं की भी तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए।
पार्टी का तर्क है कि सार्वजनिक धन से निर्मित स्मारकों और प्रतिमाओं में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि कहीं भी निर्माण मानकों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें
वर्तमान में पूरे मामले का केंद्र बिंदु जांच रिपोर्ट बन गई है। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि प्रतिमा निर्माण में निर्धारित सामग्री का उपयोग नहीं किया गया या वित्तीय अनियमितता हुई है, तो संबंधित पक्षों के खिलाफ प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
दूसरी ओर यदि जांच में आरोप सही नहीं पाए जाते हैं, तो इससे विवाद पर विराम लग सकता है। इसलिए स्थानीय नागरिकों से लेकर राजनीतिक दलों तक सभी की निगाहें अब जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं।
सार्वजनिक परियोजनाओं में पारदर्शिता की जरूरत
यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण, तकनीकी परीक्षण और वित्तीय पारदर्शिता की आवश्यकता को सामने लाता है। किसी भी राष्ट्रीय नेता की स्मृति में बनाए गए स्मारक केवल निर्माण कार्य नहीं होते, बल्कि वे जनता की भावनाओं और सार्वजनिक विश्वास का प्रतीक भी होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परियोजनाओं में सामग्री की गुणवत्ता, तकनीकी परीक्षण और भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों की संभावना कम हो।
फिलहाल कटघोरा अटल परिसर में स्थापित प्रतिमा को लेकर उठे सवालों का अंतिम जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मिल सकेगा। तब तक यह मामला प्रशासनिक, राजनीतिक और जनचर्चा—तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रहेगा।

