रायपुर के मेकाहारा (डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल) के इमरजेंसी वार्ड में शॉर्ट सर्किट से आग लगने के बाद अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों ने समय रहते आग पर काबू पाया। जानिए पूरी घटना, कारण और प्रशासन की कार्रवाई।
राजधानी रायपुर CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) स्थित प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मेकाहारा (डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय) में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी, जिससे पूरे वार्ड में कुछ ही मिनटों में काला धुआं फैल गया। धुएं के कारण मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल के कर्मचारियों में घबराहट फैल गई।
हालांकि राहत की बात यह रही कि अस्पताल प्रशासन, सुरक्षा कर्मियों और फायर सेफ्टी टीम की त्वरित कार्रवाई के चलते आग को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। इस घटना में किसी मरीज या कर्मचारी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन घटना ने अस्पताल की विद्युत सुरक्षा व्यवस्था और फायर सेफ्टी सिस्टम पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
पुराने विद्युत उपकरण बने आग की वजह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमरजेंसी वार्ड में लगे कुछ पुराने विद्युत उपकरणों में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसके बाद चिंगारियां निकलने लगीं। देखते ही देखते धुआं पूरे वार्ड में फैल गया। अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन घबरा गए और कई लोग सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे।
कुछ कर्मचारियों ने तत्काल मुख्य बिजली आपूर्ति बंद कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। इसी दौरान अस्पताल प्रशासन को सूचना दी गई, जिसके बाद सुरक्षा दल मौके पर पहुंचा और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया।
मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया
धुआं बढ़ने के बाद अस्पताल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों को दूसरे सुरक्षित वार्डों में शिफ्ट करना शुरू कर दिया। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने मरीजों को बिना घबराहट के बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गंभीर मरीजों को प्राथमिकता देते हुए ऑक्सीजन सपोर्ट और अन्य जरूरी चिकित्सा उपकरणों के साथ सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। अस्पताल के कर्मचारियों की तत्परता के कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
फायर सेफ्टी टीम ने तुरंत संभाला मोर्चा
घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल की फायर सेफ्टी टीम और सुरक्षा कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। प्राथमिक अग्निशमन उपकरणों की मदद से आग पर तेजी से काबू पाने का प्रयास किया गया। कुछ ही देर में स्थिति नियंत्रण में आ गई और आग को अन्य हिस्सों में फैलने से रोक लिया गया।
आवश्यकता पड़ने पर नगर निगम के अग्निशमन विभाग को भी सूचना दी गई, हालांकि प्रारंभिक स्तर पर ही आग नियंत्रित हो जाने के कारण बड़े नुकसान की नौबत नहीं आई।
प्रशासन ने शुरू की जांच
अस्पताल प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन तकनीकी टीम पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि अस्पताल के विद्युत उपकरणों का रखरखाव समय पर किया जा रहा था या नहीं तथा फायर सेफ्टी मानकों का पूरी तरह पालन हो रहा था या नहीं।
बड़े सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाने वाली है। प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने के कारण मेकाहारा में प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में विद्युत प्रणाली का नियमित निरीक्षण और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता बेहद आवश्यक मानी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में पुराने वायरिंग सिस्टम, ओवरलोड बिजली कनेक्शन और समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण इस तरह की घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
अस्पताल प्रशासन की अपील
अस्पताल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि घटना को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें। प्रशासन के अनुसार स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं सामान्य रूप से संचालित की जा रही हैं।
साथ ही विद्युत व्यवस्था की तकनीकी जांच कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
विशेषज्ञों की राय: नियमित ऑडिट है जरूरी
फायर सेफ्टी विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े अस्पतालों में हर छह महीने में विद्युत सुरक्षा ऑडिट, फायर ड्रिल और अग्निशमन उपकरणों की जांच अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। इसके अलावा पुराने विद्युत उपकरणों और वायरिंग को समय रहते बदलना भी जरूरी है।
यदि सुरक्षा मानकों का नियमित पालन किया जाए तो इस प्रकार की दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है।
स्थानीय लोगों में चिंता
घटना के बाद अस्पताल पहुंचे मरीजों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि जिस अस्पताल में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं, वहां फायर सेफ्टी और विद्युत व्यवस्था पूरी तरह आधुनिक और सुरक्षित होनी चाहिए।
फिलहाल राहत की बात यह है कि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना की वास्तविक वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे।

