संघर्ष से सफलता तक: कोंडागांव की दिव्यांग बालिका शिवबती ने संभाग स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में जीता प्रथम स्थान, अब राज्य स्तरीय मुकाबले में दिखाएंगी दम

कोंडागांव के बालिकागृह की श्रवण दिव्यांग खिलाड़ी शिवबती ने संभाग स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल कर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई किया। कठिन परिस्थितियों से निकलकर सफलता की मिसाल बनीं शिवबती की प्रेरणादायक कहानी पढ़ें।

कोंडागांव। कहते हैं कि परिस्थितियां इंसान को कमजोर नहीं बनातीं, बल्कि उसके हौसलों की परीक्षा लेती हैं। यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो और सही समय पर उचित मार्गदर्शन तथा अवसर मिल जाए, तो जीवन की सबसे कठिन चुनौतियां भी सफलता की सीढ़ियां बन जाती हैं। कोंडागांव जिले की श्रवण दिव्यांग बालिका शिवबती ने इस बात को अपने जीवन से साबित कर दिया है।

जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से संचालित छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद, बालिकागृह कोंडागांव की छात्रा शिवबती ने संभाग स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ उन्होंने राज्य स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता के लिए भी अपना स्थान सुनिश्चित कर लिया है। उनकी इस सफलता से न केवल बालिकागृह बल्कि पूरा कोंडागांव जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

कठिनाइयों से भरा रहा बचपन

शिवबती का जीवन शुरुआत से ही संघर्षों से घिरा रहा। बचपन में ही बीमारी के कारण उन्होंने अपनी मां को खो दिया। मां की मृत्यु के कुछ समय बाद नक्सली हिंसा ने उनके पिता को भी उनसे हमेशा के लिए छीन लिया। कम उम्र में माता-पिता दोनों का साया सिर से उठ जाने के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया।

ऐसी परिस्थितियों में उनके चाचा ने उन्हें जिला प्रशासन द्वारा संचालित बालिकागृह में दाखिला दिलाया। यही वह स्थान बना जहां शिवबती को नया परिवार, सुरक्षित वातावरण और अपने भविष्य को संवारने का अवसर मिला। बालिकागृह ने केवल उन्हें आश्रय ही नहीं दिया बल्कि शिक्षा, संरक्षण और आत्मविश्वास भी प्रदान किया।

बालिकागृह बना नई उम्मीदों का आधार

 

छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद के अंतर्गत संचालित बालिकागृह में शिवबती को नियमित शिक्षा के साथ-साथ खेल और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला। यहां के शिक्षकों और अधिकारियों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित किया।

बालिकागृह का उद्देश्य केवल बच्चों को रहने की सुविधा देना नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। इसी सोच का परिणाम है कि शिवबती जैसी प्रतिभाएं आज राष्ट्रीय स्तर की ओर कदम बढ़ा रही हैं।

तीरंदाजी के प्रति रुचि बनी सफलता का रास्ता

बालिकागृह में रहते हुए शिवबती की रुचि तीरंदाजी की ओर बढ़ी। उनकी लगन और सीखने की क्षमता को देखते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।

उन्हें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में तीरंदाजी का प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की देखरेख में शिवबती ने खेल की बारीकियों को सीखा और लगातार अभ्यास के जरिए अपनी तकनीक में उल्लेखनीय सुधार किया।

नियमित प्रशिक्षण, अनुशासन और कड़ी मेहनत ने धीरे-धीरे उन्हें एक बेहतर खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर दिया।

खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में मिला उच्च स्तरीय प्रशिक्षण

शिवबती की प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए उनका चयन खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, बहतराई (बिलासपुर) में किया गया। यहां उन्होंने लगभग एक वर्ष तक उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया।

इस दौरान उन्हें आधुनिक खेल सुविधाएं, तकनीकी मार्गदर्शन, फिटनेस प्रशिक्षण और मानसिक मजबूती विकसित करने के लिए विशेषज्ञों का सहयोग मिला। इस प्रशिक्षण ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खिलाड़ी की सफलता में प्रतिभा के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिसका लाभ शिवबती को समय पर मिला।

संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन

 

हाल ही में आयोजित संभाग स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में शिवबती ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से सभी प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने धैर्य, एकाग्रता और तकनीकी दक्षता का बेहतरीन प्रदर्शन किया।

इस जीत के साथ उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। अब उनसे पूरे जिले को बड़ी उम्मीदें हैं कि वे राज्य स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करेंगी।

दिव्यांग बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

शिवबती की सफलता केवल एक खेल प्रतियोगिता में मिली जीत नहीं है, बल्कि यह उन हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।

श्रवण दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने कभी अपनी कमी को कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने यह साबित किया कि यदि अवसर, संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले तो दिव्यांग बच्चे भी किसी से कम नहीं हैं।

उनकी यह उपलब्धि समाज को यह संदेश देती है कि प्रतिभा किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती।

जिला प्रशासन की पहल लाई सकारात्मक बदलाव

जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बच्चों के लिए संचालित योजनाएं आज कई बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, खेल सुविधाएं, प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन जैसी व्यवस्थाओं के कारण अनेक बच्चे नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे को समय पर उचित अवसर और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो वे अपनी परिस्थितियों से ऊपर उठकर समाज के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।

समाज के लिए एक बड़ा संदेश

शिवबती की कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में आने वाली कठिनाइयां मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकतीं। सही मार्गदर्शन, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी व्यक्ति सफलता प्राप्त कर सकता है।

आज शिवबती केवल बालिकागृह की छात्रा नहीं हैं, बल्कि संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की एक जीवंत मिसाल बन चुकी हैं। उनकी सफलता उन सभी बच्चों को उम्मीद देती है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।

राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अब पूरे कोंडागांव और छत्तीसगढ़ की निगाहें शिवबती के प्रदर्शन पर होंगी। सभी को उम्मीद है कि वे अपने शानदार प्रदर्शन से प्रदेश का नाम और ऊंचा करेंगी।

 

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