मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दुर्ग जिले के जामगांव (एम) में आयोजित राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव में कहा कि नई पीढ़ी का भविष्य संवारना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं, तकनीकी संसाधन और नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट।
CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में शिक्षा को विकास की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला मानते हुए नई पीढ़ी को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, जामगांव (एम) में आयोजित राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव में विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि नई पीढ़ी का भविष्य संवारना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि बच्चों में नैतिक मूल्यों, वैज्ञानिक सोच, सामाजिक संवेदनशीलता, अनुशासन और राष्ट्रभावना का विकास करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित और संस्कारित समाज ही विकसित छत्तीसगढ़ तथा आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव रख सकता है।
शाला प्रवेशोत्सव में नन्हे विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत बेहद भावनात्मक माहौल में हुई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहली बार विद्यालय में प्रवेश लेने वाले छोटे बच्चों का तिलक लगाकर और मुंह मीठा कराकर स्वागत किया। बच्चों से आत्मीय बातचीत करते हुए उन्होंने उन्हें नियमित रूप से विद्यालय आने, मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी।
विद्यालय परिसर में मौजूद अभिभावकों ने भी इस अवसर को बच्चों के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल का पहला दिन केवल विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए यादगार क्षण होता है।
‘शिक्षा केवल अंक नहीं, व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम है’
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में शिक्षा की परिभाषा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रह गई है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे उनमें तर्कशक्ति, रचनात्मकता, नवाचार की क्षमता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो। नैतिक शिक्षा, अनुशासन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समावेश उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी अच्छे नागरिक बनते हैं तो उसका लाभ पूरे समाज और राष्ट्र को मिलता है।
सरकार का लक्ष्य—कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे।
उन्होंने बताया कि सरकार लगातार ऐसी योजनाओं पर कार्य कर रही है, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधन और समान अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।
सरकार की प्राथमिकता है कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी शहरों के समान शैक्षणिक सुविधाएं प्राप्त हों।
आधुनिक शिक्षा और तकनीकी संसाधनों पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय डिजिटल युग का है और शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक तकनीक के अनुरूप विकसित करना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के विद्यालयों में डिजिटल संसाधनों, स्मार्ट क्लास, आधुनिक प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और बेहतर अधोसंरचना के विकास पर लगातार कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल पढ़ाई को आसान बनाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भविष्य के रोजगार और प्रतिस्पर्धी दुनिया के लिए तैयार करना भी है।
स्वामी आत्मानंद विद्यालयों की भूमिका
मुख्यमंत्री ने स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट विद्यालयों की चर्चा करते हुए कहा कि इन संस्थानों ने सरकारी शिक्षा के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में ऐसे विद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
शिक्षकों को बताया राष्ट्र निर्माण का आधार
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने का कार्य नहीं करते, बल्कि वे समाज के भविष्य का निर्माण करते हैं।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षक की प्रेरणा किसी विद्यार्थी के पूरे जीवन की दिशा बदल सकती है। इसलिए शिक्षकों की भूमिका केवल विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी है।
अभिभावकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
उन्होंने कहा कि विद्यालय और परिवार दोनों मिलकर ही बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित कर सकते हैं। नियमित संवाद, प्रोत्साहन और सकारात्मक वातावरण बच्चों के आत्मविश्वास को मजबूत बनाता है।
नई पीढ़ी ही विकसित छत्तीसगढ़ की ताकत
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आने वाला समय ज्ञान, नवाचार और तकनीक का होगा। ऐसे में प्रदेश की नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि बनेंगे। इसलिए उनकी शिक्षा में किया गया निवेश वास्तव में प्रदेश के भविष्य में किया गया निवेश है।
राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट संदेश दिया कि शिक्षा केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सशक्त, संवेदनशील और जिम्मेदार समाज के निर्माण का माध्यम भी है।
सरकार का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधनों और समान अवसरों के जरिए प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को बेहतर भविष्य प्रदान करना है। यदि शिक्षा व्यवस्था को निरंतर मजबूत किया जाता है और विद्यालयों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित होती है, तो यह विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

