छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 17.24 करोड़ रुपये के स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में पुलिस ने सिम्स की पूर्व चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी सहित एसडीएम और तहसील कार्यालय के कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, संदिग्ध मुआवजा दावों और चल रही जांच से जुड़ी पूरी जानकारी पढ़ें।
CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित स्नेक बाइट (सर्पदंश) मुआवजा घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां की हैं। करोड़ों रुपये के सरकारी मुआवजे में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही पुलिस ने सिम्स (SIMS) की पूर्व चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी, एसडीएम कार्यालय तथा तहसीलदार कार्यालय के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन लोगों ने कथित रूप से सर्पदंश से मौत के फर्जी दस्तावेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर सरकारी मुआवजा स्वीकृत कराने में भूमिका निभाई।
यह मामला सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में सरकारी मुआवजा वितरण प्रणाली, मेडिकल प्रमाणन प्रक्रिया और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे तथा गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सर्पदंश से मृत्यु होने पर पात्र परिजनों को आर्थिक सहायता के रूप में मुआवजा दिया जाता है। यह सहायता वास्तविक पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से निर्धारित की गई है।
पुलिस जांच में आशंका जताई गई है कि कुछ मामलों में कथित रूप से फर्जी मेडिकल दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक अभिलेख तैयार कर सर्पदंश से मौत दर्शाई गई, जिसके आधार पर सरकारी मुआवजा स्वीकृत कराया गया।
इसी संदिग्ध प्रक्रिया की जांच के दौरान पुलिस ने अब तक कई दस्तावेजों की जांच की है और संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से पूछताछ की है।
किन लोगों की हुई गिरफ्तारी?
पुलिस ने इस मामले में:
- सिम्स की पूर्व चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी
- एसडीएम कार्यालय के कर्मचारी
- तहसीलदार कार्यालय के कर्मचारी
को गिरफ्तार किया है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन लोगों की भूमिका कथित रूप से दस्तावेजों की प्रक्रिया और मुआवजा स्वीकृति से जुड़े मामलों में रही है। हालांकि आरोपों की पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
आंकड़ों में बड़ा अंतर बना जांच का आधार
पुलिस जांच के दौरान सामने आए आंकड़ों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।
प्रारंभिक जांच के अनुसार:
- जशपुर जिले में पिछले तीन वर्षों में 96 सर्पदंश मौतें दर्ज हुईं।
- वहीं बिलासपुर जिले में इसी अवधि में 431 मौतों को स्नेक बाइट बताकर लगभग 17 करोड़ 24 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया गया।
इन्हीं आंकड़ों में असामान्य अंतर के बाद जांच एजेंसियों ने पूरे रिकॉर्ड की गहन पड़ताल शुरू की।
हालांकि केवल आंकड़ों के अंतर के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। जांच एजेंसियां प्रत्येक मामले का अलग-अलग सत्यापन कर रही हैं।
16 संदिग्ध मामलों की जांच जारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार फिलहाल 16 संदिग्ध मामलों की विस्तृत जांच की जा रही है।
इन मामलों में मृत्यु के कारण, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेज, पंचनामा, राजस्व अभिलेख और मुआवजा स्वीकृति से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन मामलों में प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई और किन मामलों में कथित अनियमितता हुई।
जांच की जद में अन्य डॉक्टर भी
सूत्रों के अनुसार पुलिस जांच अब सिम्स के 4 से 5 अन्य चिकित्सकों तक भी पहुंच चुकी है।
फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार किए जाने की आशंका के आधार पर कई डॉक्टरों से पूछताछ की गई है।
हालांकि अभी तक इन चिकित्सकों के खिलाफ किसी प्रकार की दोषसिद्धि नहीं हुई है और जांच जारी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जो भी व्यक्ति जांच में दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी मुआवजा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे सरकारी राहत योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी राहत योजना में फर्जी दावे किए जाते हैं तो उसका सीधा असर उन वास्तविक पीड़ित परिवारों पर पड़ता है, जिन्हें समय पर सहायता की आवश्यकता होती है।
ऐसे मामलों में मेडिकल सत्यापन, प्रशासनिक जांच और डिजिटल रिकॉर्ड की पारदर्शिता को और मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
जांच अभी जारी, और हो सकते हैं बड़े खुलासे
पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह जांच अभी समाप्त नहीं हुई है।
जैसे-जैसे दस्तावेजों का सत्यापन आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे नए तथ्य सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
यदि नए साक्ष्य सामने आते हैं तो इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
17 करोड़ रुपये से अधिक के कथित स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में हुई हालिया गिरफ्तारियां इस बात का संकेत हैं कि जांच एजेंसियां मामले की गहराई तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। सरकारी राहत योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
हालांकि इस मामले में सभी आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। ऐसे में इस प्रकरण पर आगे आने वाली जांच रिपोर्ट और अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

