‘57 हजार शिक्षकों के पद खाली, 12,560 से अधिक स्कूल जर्जर’ – कांग्रेस का भाजपा सरकार पर बड़ा हमला, शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य में 57 हजार से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं, 12,560 से अधिक स्कूल जर्जर हैं और हजारों स्कूल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर।

CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले ढाई वर्षों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ी है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में 57 हजार से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं और 12,560 से अधिक सरकारी स्कूल जर्जर हालत में हैं। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन गया है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नया शिक्षा सत्र शुरू होने के बावजूद अनेक स्कूलों में अभी तक पाठ्यपुस्तकें और गणवेश नहीं पहुंचे हैं। कई विद्यालयों में बारिश के दौरान कक्षाओं की छत से पानी टपक रहा है, प्लास्टर गिर रहा है और छात्रों के बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर तक उपलब्ध नहीं है। पार्टी ने इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते हुए शीघ्र सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।


‘बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कैसे होगी गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई?’

धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य के विकास की आधारशिला होती है, लेकिन यदि स्कूलों में शिक्षक, भवन और आवश्यक संसाधन ही उपलब्ध नहीं होंगे तो बच्चों का भविष्य प्रभावित होना स्वाभाविक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के हजारों सरकारी विद्यालय आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। कई स्थानों पर छात्र-छात्राओं को जर्जर भवनों में पढ़ाई करनी पड़ रही है, जहां बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक कठिन हो जाती है।

कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा का अधिकार केवल स्कूल खोल देने से पूरा नहीं होता, बल्कि वहां पर्याप्त शिक्षक, सुरक्षित भवन, पाठ्य सामग्री और अध्ययन का अनुकूल वातावरण भी होना चाहिए।


57 हजार से अधिक पद रिक्त होने का दावा

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने दावा किया कि वर्तमान में प्रदेश में 57 हजार से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं।

उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद अब तक अपेक्षित स्तर पर नियुक्तियां नहीं हो सकीं।

उनके अनुसार, पिछले ढाई वर्षों में अनेक प्रधान पाठक, व्याख्याता, विषय विशेषज्ञ और शिक्षक सेवानिवृत्त भी हुए हैं, जिससे रिक्त पदों की संख्या और बढ़ गई है।

कांग्रेस ने मांग की कि रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए ताकि विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो।


एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हजारों स्कूल

धनंजय सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रदेश के हजारों सरकारी विद्यालय आज भी केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं।

ऐसी स्थिति में एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाने, प्रशासनिक कार्य करने और अन्य जिम्मेदारियां निभाने का दायित्व उठाना पड़ता है।

शिक्षा विशेषज्ञ भी समय-समय पर इस बात पर जोर देते रहे हैं कि बहुस्तरीय कक्षाओं में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक है।


जर्जर भवनों को लेकर चिंता

कांग्रेस ने दावा किया कि राज्य में 12,560 से अधिक स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं।

बारिश के मौसम में कई स्कूलों की छत से पानी टपकने, दीवारों का प्लास्टर गिरने और कक्षाओं में सुरक्षित वातावरण नहीं होने जैसी समस्याएं सामने आने का आरोप लगाया गया है।

पार्टी का कहना है कि यदि विद्यालय भवन सुरक्षित नहीं होंगे तो विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।


किताबें और गणवेश समय पर नहीं मिलने का आरोप

कांग्रेस ने यह भी कहा कि नया शिक्षा सत्र प्रारंभ हो चुका है, लेकिन अनेक विद्यालयों में अभी तक छात्रों को पाठ्यपुस्तकें और गणवेश उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

पार्टी का कहना है कि शिक्षा सत्र के शुरुआती दिनों में ही आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध होना बेहद जरूरी है, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।


स्वामी आत्मानंद स्कूलों और बंद स्कूलों का मुद्दा

धनंजय सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में भी सैकड़ों पद रिक्त पड़े हैं।

इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि 10,463 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं और नए विद्यालय शुरू करने की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हुई है।

इन दावों के संबंध में सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया इस समाचार के प्रकाशन तक उपलब्ध नहीं हो सकी।


शिक्षा व्यवस्था पर राजनीतिक बहस तेज

शिक्षा का मुद्दा लंबे समय से छत्तीसगढ़ की राजनीति का महत्वपूर्ण विषय रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों समय-समय पर स्कूलों की स्थिति, शिक्षक भर्ती और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षक भर्ती, विद्यालयों के आधारभूत ढांचे का विकास और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता जैसे विषय केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इन पर दीर्घकालिक नीति के तहत काम करने की आवश्यकता है।


सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अब नजर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर रहेगी। यदि सरकार इन आरोपों पर अपना पक्ष रखती है या संबंधित आंकड़ों को स्पष्ट करती है, तो शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शिक्षकों के रिक्त पद, जर्जर स्कूल भवन, बुनियादी सुविधाओं की कमी और नए शिक्षा सत्र में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता जैसे मुद्दे शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि, इस मामले में प्रस्तुत आंकड़े कांग्रेस के सार्वजनिक दावों पर आधारित हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि या सरकार का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद स्थिति का व्यापक मूल्यांकन किया जा सकेगा।

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