Tuesday, April 21, 2026
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स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक …

Pnews24  स्वामी विवेकानंद के विचार
प्रत्येक व्यक्ति को अपने किए कर्मों का फल मिलता है, दूसरे के किए कर्मों का फल नहीं मिलता। *”हां, दूसरे के कर्मों से आपको हानि लाभ हो सकता है, सुख दुख मिल सकता है। परंतु वह आपके कर्मों का फल नहीं है। उसे कर्मों का ‘परिणाम’ या ‘प्रभाव’ तो कह सकते हैं, परन्तु फल नहीं।”*
फल तो कर्ता को ही मिलता है। फिर प्रश्न यह उठता है, कि *”दूसरे के कर्म से आपको दुख क्यों मिला?”* इसका उत्तर है, कि *”वह कर्म करने में स्वतंत्र है। जैसे आप स्वतंत्र हैं। आप अपनी इच्छा और बुद्धि से जो चाहें, सो कर सकते हैं। इसी प्रकार से दूसरा व्यक्ति भी अपनी इच्छा और बुद्धि से जो चाहे, सो कर सकता है। उसके कर्म से दूसरों को हानि या लाभ कुछ भी हो सकता है। सुख या दुख कुछ भी मिल सकता है।”*
*”यदि दूसरे के कर्मों से आपको दुख मिला, तो इसे शास्त्रों की भाषा में ‘आधिभौतिक दुख’ कहते हैं। यह अन्याय से आपको दुख मिला।” “उसके अन्याय करने से उसके अपराध का दंड समाज राजा या ईश्वर उसे देगा। और उसके अन्याय से जो आपकी हानि हुई, उस हानि की पूर्ति = क्षतिपूर्ति ईश्वर आपको कर देगा।”* कभी-कभी समाज और राजा भी क्षतिपूर्ति कर देते हैं। *”यदि ये नहीं करेंगे, तो भी चिंता नहीं करनी चाहिए, तब ईश्वर कर देगा।”* इस प्रकार से दूसरे के कर्म का परिणाम सुख दुख यहां आपको भोगना पड़ सकता है।
जिस व्यक्ति को हानि हुई, उस हानि को देखकर उसके परिवार के लोग भी दुखी हो गए। यह उस अन्यायकारी व्यक्ति के कर्म का ‘प्रभाव’ है। *”परन्तु यह भी उसके कर्म का फल नहीं है”,* क्योंकि न्याय का यह नियम है, कि *”फल तो उसी को मिलेगा, जो कर्म करेगा।”*
*”अब जो व्यक्ति अपने जीवन काल में यज्ञ दान दया तपस्या सेवा परोपकार आदि अच्छे-अच्छे कर्म नहीं करता, तो मरने के बाद उसको अच्छा फल भी नहीं मिलेगा।” “यदि मरने के बाद अगले जन्म में अच्छा फल चाहिए, तो इसी जन्म में जीते जी अच्छे कर्म करने होंगे, जिन्हें ‘मनुष्यता’ के नाम से जाना जाता है। अर्थात सबके साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करना। सत्य का व्यवहार करना।” “झूठ छल कपट चोरी धोखाधड़ी बेईमानी रिश्वतखोरी आदि ऐसे पाप कर्मों से बचना। तभी आपको अगला जन्म अच्छे मनुष्य का मिल पाएगा।” “यदि अच्छे काम नहीं किए और ऊपर बताए बुरे काम किए, तो फिर पशु पक्षी आदि योनियों में भयंकर दंड भोगना पड़ेगा।”* इसलिए ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि *”मैं झूठ छल कपट बेईमानी से खूब पैसे जमा कर लूंगा। और इससे मेरा सुख बहुत बढ़ जाएगा।”* बल्कि इससे तो इस जन्म और अगले जन्म, दोनों में हानि उठानी पड़ेगी।
*”ईश्वर आपके ‘कर्मों पर’ अधिक ध्यान देता है, कि आपने कितने अच्छे कर्म किए और कितने बुरे? आपने ‘बेईमानी से कितनी अधिक संपत्ति’ जमा कर ली, इस बात का ईश्वर की दृष्टि में कोई महत्व नहीं है।”*
*”इसलिए अपने जीवन में अच्छे कर्म करें, दूसरों को सुख देवें, इसका फल क्या होगा? ईश्वर आपको इस जन्म में भी सुख देगा और अगले जन्म में भी।”*
—- *”स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक

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