कोरबा (pnews24) रेल यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा एवं संरक्षित रेल परिचालन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके तहत ट्रेनों के कोच में बदलाव किया जा रहा है। धीरे-धीरे सभी ट्रेनों में पुराने आइसीएफ़ (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री) कोच को हटाकर नई तकनीक वाले एलएचबी (लिंक हाफमैन बुश) कोच लगाए जा रहे हैं। वर्तमान में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन के बिलासपुर सहित अन्य स्टेशनों से गुजरने वाली 19 ट्रेनों को नई तकनीक वाले एलएचबी कोच के साथ चलाई जा रही है। 19 ट्रेनों की 21 रैक में 624 एलएचबी कोच है।
रायपुर-कोरबा एक्सप्रेस में एलएचबी कोच की सुविधा दी जा रही है। एलएचबी कोच का नाम इसका निर्माण करने वाली जर्मनी की कंपनी लिंक हाफमैन बुश से पड़ा है। वर्तमान में इसका निर्माण कपूरथला रेलवे कोच फैक्ट्री में किया जा रहा है। एलएचबी कोच यात्रियों के लिए काफी आरामदायक होता है। रेल परिचालन की दृष्टि एलएचबी कोच काफी सुरक्षित है। यह कोच सामान्य कोच की अधिकतम गति 110-130 किमी. की तुलना में 160 से भी अधिक की गति के लिए डिजाईन की गई है। इन कोचों में सामान्य कोचों की तुलना में ज्यादा जगह होती है। एक सामान्य आइसीएफ़ स्लीपर कोच में 72 बर्थ होती है, जबकि एलएचबी स्लीपर कोच में 80 बर्थ होती है। इसी प्रकार आइसीएफ़ एसी-3 कोच में 64 बर्थ होती है, जबकि एलएचबी स्लीपर कोच में 72 बर्थ होती है तथा आईसीएफ़ एसी-2 कोच में 46 बर्थ होती है, जबकि एलएचबी स्लीपर कोच में 62 बर्थ होती है, जिससे इसके स्लीपर एवं एसी कोचों में अधिक बर्थ की सुविधा उपलब्ध कराकर रेल यात्रियों को अधिक से अधिक कन्फर्म बर्थ की सुविधा प्रदान करने में भी सहायता मिलती है। एलएचबी कोच में हाइड्रोलिक सस्पेंशन का प्रयोग किया जाता है। वही दाएं बाएं मूवमेंट के लिए भी सस्पेंशन का प्रयोग किया गया है, जिससे सफर आरामदायक हो जाता है।

