कोरबा में श्री रानी सती दादीजी का भव्य संगीतमय मंगल पाठ संपन्न, 108 महिलाओं ने किया सामूहिक मंगल पाठ; हरेली उत्सव में उमड़ी आस्था

कोरबा के श्री सप्तदेव मंदिर में श्रावण अमावस्या और हरेली पर्व पर श्री रानी सती दादीजी का भव्य संगीतमय मंगल पाठ संपन्न हुआ। 108 महिलाओं ने सामूहिक मंगल पाठ कर सुख-समृद्धि की कामना की। जानिए पूरे आयोजन और सितंबर में होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों की पूरी जानकारी।

कोरबा CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) श्रावण मास की अमावस्या और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकपर्व हरेली के पावन अवसर पर कोरबा स्थित श्री सप्तदेव मंदिर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठा। मंदिर परिसर में श्री रानी सती दादीजी का भव्य संगीतमय मंगल पाठ श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर 108 महिलाओं ने सामूहिक रूप से मंगल पाठ कर परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की मंगलकामना की।

सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित महिलाओं ने दादीजी के जयकारों के साथ मंगल पाठ का शुभारंभ किया। पूरे वातावरण में भक्ति संगीत, शंखनाद और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती रही। श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर दादीजी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम बना मंदिर परिसर

कार्यक्रम के दौरान मंदिर को आकर्षक फूलों, रंग-बिरंगी सजावट और पारंपरिक श्रृंगार से विशेष रूप से सजाया गया था। भगवान और श्री रानी सती दादीजी की प्रतिमा का दिव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। जैसे ही संगीतमय मंगल पाठ प्रारंभ हुआ, पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया।

भक्तों ने बताया कि श्रावण अमावस्या का दिन सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। इस दिन पूजा-अर्चना और सामूहिक मंगल पाठ करने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण रहा कि बड़ी संख्या में महिलाएं इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुईं।

 

 

108 महिलाओं ने एक स्वर में किया मंगल पाठ

कार्यक्रम की सबसे विशेष बात यह रही कि 108 महिलाओं ने सामूहिक रूप से संगीतमय मंगल पाठ किया। सभी महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में एक स्वर में दादीजी के भजनों और मंगल पाठ का गायन किया। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालु भी भक्ति में लीन होकर जयकारे लगाते रहे।

सामूहिक मंगल पाठ का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सुख-समृद्धि की कामना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की उन्नति, समाज में भाईचारा, परिवारों में खुशहाली और विश्व कल्याण की भावना भी इसमें शामिल रही। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश भी दिया गया।

हरेली पर्व के साथ मनाया गया झूला उत्सव

हरेली पर्व के अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन भी किए गए। श्री रानी सती दादीजी का आकर्षक श्रृंगार कर उन्हें भव्य झूले में विराजित किया गया। श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से झूला झुलाकर अपनी आस्था व्यक्त की और परिवार की खुशहाली की कामना की।

हरेली पर्व छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कृषि प्रधान राज्य में यह पर्व हरियाली, समृद्धि और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में धार्मिक आयोजन के साथ हरेली उत्सव का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना।

भजनों से गूंजता रहा मंदिर परिसर

संगीतमय मंगल पाठ के दौरान विभिन्न भक्ति भजनों की प्रस्तुति ने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। महिलाओं और भजन मंडली ने दादीजी के भजनों का ऐसा मधुर गायन किया कि श्रद्धालु देर तक भक्ति में डूबे रहे।

कार्यक्रम में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। सामूहिक भक्ति और प्रार्थना से लोगों के बीच प्रेम, सहयोग और आपसी विश्वास की भावना मजबूत होती है।

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया प्रसाद

पूजा-अर्चना और मंगल पाठ के पश्चात मंदिर में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर दादीजी का आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्तों का आना-जाना लगा रहा और श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण वातावरण में दर्शन किए।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में समिति के पदाधिकारियों, महिला मंडल और स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन की व्यवस्थाओं की श्रद्धालुओं ने भी सराहना की।

सितंबर में होंगे भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन

मंदिर समिति ने जानकारी दी कि आगामी दिनों में भी धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला जारी रहेगी। 10 सितंबर को मंदिर परिसर में मेहंदी उत्सव, ज्वारा उत्सव, भजन-कीर्तन तथा कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और सांस्कृतिक कलाकारों की भागीदारी रहने की संभावना है।

इसके बाद 11 सितंबर को सूरत से आने वाली विशेष टीम द्वारा श्री रानी सती दादीजी का भव्य संगीतमय मंगल पाठ आयोजित किया जाएगा। समिति ने बताया कि इस आयोजन की तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं और प्रदेश सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का माध्यम

धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बनते हैं। सामूहिक मंगल पाठ, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलता है।

कोरबा में आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी भावना का प्रतीक रहा, जहां महिलाओं की सक्रिय भागीदारी, सामूहिक प्रार्थना और हरेली जैसे लोकपर्व के उत्सव ने धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का सुंदर संदेश दिया।

मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आगामी आयोजनों में भी अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की अपील की।

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