बस्तर तिरंगा यात्रा का भव्य समापन कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर हुआ। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और सांसद महेश कश्यप ने 600 किलोमीटर की बाइक यात्रा पूरी कर तिरंगा फहराया। पढ़ें बदलते बस्तर, सुरक्षा, विकास और राष्ट्रीय एकता की पूरी रिपोर्ट।
स्वतंत्रता (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशवासियों को भी गर्व से भर दिया। कभी नक्सल हिंसा के कारण देशभर में चर्चा का विषय रहने वाला कर्रेगुट्टा क्षेत्र अब राष्ट्रीय एकता, शांति और विकास की नई पहचान बनकर उभर रहा है। इसी बदलते बस्तर का संदेश देने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय ‘बस्तर तिरंगा यात्रा’ का समापन ऐतिहासिक कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर तिरंगा फहराकर किया गया।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और बस्तर सांसद महेश कश्यप सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सुरक्षा बलों के अधिकारी, जवान, युवा और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे। लगभग 600 किलोमीटर लंबी बाइक यात्रा के दौरान तिरंगे के साथ निकला यह काफिला बस्तर संभाग के कई संवेदनशील और दूरस्थ इलाकों से होकर गुजरा, जिसने यह संदेश दिया कि अब बस्तर भय नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।
600 किलोमीटर की यात्रा ने जोड़ा पूरा बस्तर

तीन दिनों तक चली इस विशेष तिरंगा यात्रा ने नारायणपुर, कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर सहित कई जिलों को जोड़ा। यात्रा के दौरान हर पड़ाव पर स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। जगह-जगह युवाओं ने तिरंगा लहराकर भारत माता के जयकारे लगाए, जबकि महिलाओं और बच्चों ने भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।
यात्रा का उद्देश्य केवल बाइक रैली निकालना नहीं था, बल्कि बस्तर के गांवों तक यह संदेश पहुंचाना था कि प्रदेश सरकार, सुरक्षा बल और स्थानीय समाज मिलकर एक सुरक्षित, समृद्ध और विकसित बस्तर का निर्माण कर रहे हैं।
कर्रेगुट्टा पर फहराया तिरंगा बना बदलाव का प्रतीक

यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव कर्रेगुट्टा की पहाड़ी रही, जहां उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और अन्य जनप्रतिनिधियों ने पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रध्वज फहराया।
कुछ वर्ष पहले तक यह इलाका नक्सली गतिविधियों के कारण बेहद संवेदनशील माना जाता था। यहां आम नागरिकों का आना-जाना भी जोखिम भरा माना जाता था। लेकिन आज उसी स्थान पर तिरंगे का शान से लहराना इस बात का संकेत है कि परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और शासन-प्रशासन की विकास योजनाएं अब दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं।
तिरंगा फहराने के बाद पूरे क्षेत्र में भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों से वातावरण गूंज उठा। उपस्थित लोगों ने इसे बस्तर के इतिहास का एक भावनात्मक और प्रेरणादायक क्षण बताया।
शहीद जवानों को दी गई श्रद्धांजलि
यात्रा के दौरान सुरक्षा बलों के उन वीर जवानों को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया जिन्होंने बस्तर में शांति स्थापित करने के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।

जनप्रतिनिधियों ने शहीद स्मारकों पर पुष्प अर्पित किए और दो मिनट का मौन रखकर वीर सपूतों को नमन किया। इसके साथ ही पौधारोपण अभियान भी चलाया गया। प्रत्येक पौधे को शहीदों की स्मृति और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प से जोड़ा गया।
आयोजकों का कहना था कि पौधारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का अभियान नहीं बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और हरित बस्तर का संदेश भी है।
सुरक्षा बलों के जवानों से किया संवाद
यात्रा के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और सांसद महेश कश्यप ने विभिन्न सुरक्षा शिविरों में पहुंचकर जवानों से मुलाकात की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश सेवा कर रहे जवानों का हौसला बढ़ाया और उनके समर्पण की सराहना की।
जवानों ने भी जनप्रतिनिधियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है और विकास कार्यों के कारण लोगों का विश्वास शासन-प्रशासन के प्रति मजबूत हुआ है।

‘बदलते बस्तर की नई पहचान है तिरंगा’
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि बदलते बस्तर की नई कहानी है।
उन्होंने कहा,
“जिस क्षेत्र को कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, आज वहीं तिरंगा पूरी शान से लहरा रहा है। यह केवल एक झंडा नहीं, बल्कि लोकतंत्र, विकास, विश्वास और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।”
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचाना भी है।
उनके अनुसार बस्तर के युवाओं की ऊर्जा अब खेल, शिक्षा, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है, जो आने वाले समय में पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदलने वाली है।
विकास और विश्वास साथ-साथ
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर प्राकृतिक संपदा, संस्कृति और परंपराओं से समृद्ध क्षेत्र है। अब यहां विकास योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है। सड़क, पुल, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से लोगों का जीवन आसान हो रहा है।
सांसद महेश कश्यप ने कहा कि स्थानीय जनता अब शांति और विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहती है। सरकार और समाज मिलकर बस्तर को नई पहचान देने के लिए काम कर रहे हैं।
ग्रामीणों और युवाओं का मिला भरपूर समर्थन


यात्रा के दौरान अनेक गांवों में स्थानीय लोगों ने तिरंगा यात्रा का स्वागत किया। युवाओं ने बाइक रैली में भाग लिया, जबकि महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से अतिथियों का अभिनंदन किया।
कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया, जहां स्थानीय लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति और बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया।
इस सहभागिता ने स्पष्ट किया कि बस्तर का आम नागरिक अब शांति, विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ना चाहता है।
बस्तर की बदलती कहानी पूरे देश के लिए संदेश
कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर तिरंगा फहराने का दृश्य केवल एक समारोह नहीं था, बल्कि यह उस बदलाव का प्रतीक था जिसकी कल्पना वर्षों से की जा रही थी। सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय लोगों के सहयोग और सरकार की विकासोन्मुखी योजनाओं ने बस्तर को नई दिशा देने का प्रयास किया है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संपन्न हुई यह तिरंगा यात्रा इस संदेश के साथ समाप्त हुई कि बस्तर अब केवल अपने अतीत से नहीं, बल्कि अपने उज्ज्वल भविष्य से पहचाना जाएगा। तिरंगे की यह शान आने वाले समय में शांति, विकास और राष्ट्रीय एकता की प्रेरणा बनकर लंबे समय तक याद रखी जाएगी।

