12वें जेबीसीसीआई के गठन की मांग तेज: गेवरा-दीपका में कोयला मजदूर पंचायत का प्रदर्शन, समय पर 12वें वेतन समझौते की उठी मांग

गेवरा-दीपका क्षेत्रीय मुख्यालय में कोयला मजदूर पंचायत (HMS) ने 12वें जेबीसीसीआई के तत्काल गठन और 12वें वेतन समझौते को समय पर लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। जानिए आंदोलन की वजह, मजदूरों की प्रमुख मांगें और आगे की रणनीति।

कोयला CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) उद्योग में कार्यरत लाखों श्रमिकों के वेतन, सेवा शर्तों और भविष्य से जुड़े अहम मुद्दों को लेकर एक बार फिर श्रमिक संगठन सक्रिय हो गए हैं। देशभर के करीब ढाई लाख कोयला कर्मचारियों के हितों की रक्षा और 12वें वेतन समझौते को निर्धारित समय पर लागू कराने की मांग को लेकर कोयला मजदूर पंचायत (हिंद मजदूर सभा – HMS) ने गेवरा-दीपका क्षेत्रीय मुख्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने 12वें ज्वाइंट बाइपार्टाइट कमेटी फॉर द कोल इंडस्ट्री (JBCCI) के तत्काल गठन की मांग उठाई।

प्रदर्शन के बाद संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय प्रबंधन को ज्ञापन सौंपते हुए केंद्र सरकार, कोल इंडिया लिमिटेड और संबंधित प्रबंधन से मांग की कि वे बिना किसी देरी के 12वें जेबीसीसीआई का गठन करें, ताकि 1 जुलाई 2026 से प्रस्तावित 12वां वेतन समझौता समय पर लागू किया जा सके।

क्या है पूरा मामला?

कोयला उद्योग में कर्मचारियों के वेतनमान, भत्तों और अन्य सेवा संबंधी सुविधाओं का निर्धारण समय-समय पर वेतन समझौते के माध्यम से किया जाता है। यह समझौता श्रमिक संगठनों और कोयला कंपनियों के प्रबंधन के बीच गठित जेबीसीसीआई (Joint Bipartite Committee for the Coal Industry) के माध्यम से होता है।

कोयला मजदूर पंचायत का कहना है कि वर्तमान वेतन समझौते की अवधि समाप्त होने के बाद नया समझौता 1 जुलाई 2026 से लागू होना प्रस्तावित है। ऐसे में यदि जेबीसीसीआई का गठन समय पर नहीं हुआ तो वेतन समझौते में देरी होगी, जिसका सीधा असर देशभर के लगभग 2.5 लाख कोयला कर्मचारियों और उनके परिवारों पर पड़ेगा।

गेवरा-दीपका मुख्यालय का किया घेराव

10 अगस्त को आयोजित इस प्रदर्शन में कोयला मजदूर पंचायत के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रमिक गेवरा-दीपका क्षेत्रीय मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने श्रमिक हितों से जुड़े नारे लगाए और मांग की कि वेतन समझौते की प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

संगठन का कहना है कि कर्मचारियों के आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए वेतन समझौता समय पर होना आवश्यक है। यदि प्रक्रिया में विलंब होता है तो कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें

प्रबंधन को सौंपे गए ज्ञापन में श्रमिक संगठन ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • 12वें जेबीसीसीआई का तत्काल गठन किया जाए।
  • 12वें वेतन समझौते की वार्ता बिना देरी शुरू की जाए।
  • 1 जुलाई 2026 से नया वेतन समझौता प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
  • कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं में समयानुकूल संशोधन किया जाए।
  • वेतन समझौते की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।

संगठन ने जताई चिंता

कोयला मजदूर पंचायत के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते समिति का गठन नहीं किया गया तो वेतन समझौते की प्रक्रिया कई महीनों तक प्रभावित हो सकती है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ेगा और उद्योग के संचालन पर भी असर पड़ सकता है।

संगठन ने यह भी कहा कि कोयला कर्मचारी देश की ऊर्जा व्यवस्था की रीढ़ हैं। बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा कोयले पर निर्भर है और ऐसे में कर्मचारियों के हितों की अनदेखी उचित नहीं होगी।

समय पर वेतन समझौते की क्यों है जरूरत?

कोयला उद्योग में कार्यरत कर्मचारियों के लिए वेतन समझौता केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं होता। इसके माध्यम से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय लिए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • मूल वेतन में संशोधन
  • महंगाई भत्ते से जुड़े प्रावधान
  • विभिन्न भत्तों में बढ़ोतरी
  • चिकित्सा सुविधाएं
  • सामाजिक सुरक्षा लाभ
  • सेवा शर्तों में सुधार
  • कर्मचारियों के कल्याण संबंधी प्रावधान

इसी कारण श्रमिक संगठन चाहते हैं कि वेतन समझौते की प्रक्रिया पहले से ही शुरू कर दी जाए ताकि कर्मचारियों को किसी प्रकार की अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

कोयला मजदूर पंचायत ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही 12वें जेबीसीसीआई के गठन की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। संगठन का कहना है कि आने वाले समय में चरणबद्ध आंदोलन, धरना, प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।

पदाधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना है। यदि प्रबंधन और संबंधित एजेंसियां समय पर सकारात्मक पहल करती हैं तो समाधान बातचीत के माध्यम से भी संभव है।

देशभर के कर्मचारियों की निगाहें

कोयला उद्योग में होने वाला प्रत्येक वेतन समझौता केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर देशभर की विभिन्न कोयला परियोजनाओं और कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों पर पड़ता है। यही वजह है कि गेवरा-दीपका में हुआ यह प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

श्रमिक संगठनों का मानना है कि यदि जेबीसीसीआई का गठन शीघ्र कर दिया जाता है तो वेतन वार्ता समय पर शुरू होगी और कर्मचारियों को नए वेतनमान का लाभ निर्धारित तिथि से मिल सकेगा।

आगे क्या?

अब सभी की नजर प्रबंधन और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि जल्द समिति का गठन होता है तो वेतन समझौते की प्रक्रिया समय पर आगे बढ़ सकती है। वहीं यदि इसमें देरी होती है तो श्रमिक संगठनों के आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल गेवरा-दीपका में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि कोयला कर्मचारी अपने वेतन और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर किसी भी तरह की देरी स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं।

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