रायपुर प्रेस क्लब के ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में अभिनेता रोहिताश्व गौड़ ने लोकप्रिय धारावाहिक ‘भाभी जी घर पर हैं’ में मनमोहन तिवारी के किरदार, अभिनय यात्रा, टीवी इंडस्ट्री, ओटीटी और कॉमेडी की बदलती दुनिया पर खुलकर बातचीत की। पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट।
रायपुर CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) ।लोकप्रिय हास्य धारावाहिक ‘भाभी जी घर पर हैं’ में अपने दमदार अभिनय से घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता रोहिताश्व गौड़ रविवार को रायपुर प्रेस क्लब के प्रतिष्ठित कार्यक्रम ‘हमर पहुना’ में शामिल हुए। आत्मीय और बेबाक अंदाज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने अपने अभिनय जीवन के कई दिलचस्प अनुभव साझा किए। इस दौरान उन्होंने अपने चर्चित किरदार मनमोहन तिवारी, टीवी जगत में लंबे सफर, कॉमेडी की चुनौती, बदलते मनोरंजन माध्यमों और दर्शकों के साथ अपने रिश्ते पर विस्तार से चर्चा की।
रोहिताश्व गौड़ रायपुर में आयोजित सातवें निर्मल पांडेय स्मृति फिल्म फेस्टिवल में भाग लेने पहुंचे हैं। इसी अवसर पर उन्होंने रायपुर प्रेस क्लब के मंच से मीडिया प्रतिनिधियों के साथ खुलकर संवाद किया। कार्यक्रम के दौरान उनका सहज, विनम्र और हास्यपूर्ण अंदाज उपस्थित लोगों को खूब पसंद आया।
मनमोहन तिवारी का किरदार बना करियर का अहम पड़ाव

बातचीत के दौरान रोहिताश्व गौड़ ने बताया कि ‘भाभी जी घर पर हैं’ में मनमोहन तिवारी का किरदार उनके अभिनय करियर का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। उन्होंने कहा कि जब उन्हें इस भूमिका का प्रस्ताव मिला, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह किरदार इतने लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखेगा।
उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार के लिए ऐसा किरदार मिलना सौभाग्य की बात होती है, जो वर्षों तक लोगों के बीच अपनी पहचान बनाए रखे। मनमोहन तिवारी के चरित्र की सबसे बड़ी खासियत उसकी सरलता, हास्य और मानवीय भावनाएं हैं, जिनसे हर उम्र का दर्शक जुड़ जाता है।
पारिवारिक कॉमेडी ही शो की सबसे बड़ी ताकत
रोहिताश्व गौड़ का मानना है कि ‘भाभी जी घर पर हैं’ की लगातार बनी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसकी पारिवारिक और साफ-सुथरी कॉमेडी है। उन्होंने कहा कि आज भी दर्शक ऐसे कार्यक्रम देखना पसंद करते हैं जिन्हें पूरा परिवार एक साथ बैठकर बिना किसी असहजता के देख सके।
उन्होंने कहा कि धारावाहिक की कहानी किसी बड़े शहर या असाधारण परिस्थितियों की नहीं, बल्कि गली-मोहल्ले के आम लोगों की जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी घटनाओं को हास्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है, जिससे दर्शकों को अपनी जिंदगी की झलक दिखाई देती है।
उनके अनुसार यही जुड़ाव इस धारावाहिक को वर्षों बाद भी लोकप्रिय बनाए हुए है।
किरदारों से भावनात्मक जुड़ाव ही सफलता की कुंजी
रोहिताश्व गौड़ ने कहा कि किसी भी धारावाहिक की सफलता केवल अच्छी पटकथा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके पात्रों के साथ दर्शकों का भावनात्मक जुड़ाव भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
उन्होंने कहा कि जब दर्शक किसी किरदार को अपने परिवार के सदस्य की तरह देखने लगते हैं, तब वह किरदार केवल अभिनय नहीं रह जाता बल्कि लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन जाता है। मनमोहन तिवारी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग उन्हें उनके वास्तविक नाम से कम और “तिवारी जी” के नाम से अधिक पहचानते हैं।
अभिनय में निरंतर सीखना जरूरी
अपने अभिनय सफर का जिक्र करते हुए रोहिताश्व गौड़ ने कहा कि एक कलाकार कभी सीखना बंद नहीं करता। हर नया किरदार, हर नई कहानी और हर नया निर्देशक कलाकार को कुछ नया सिखाता है।
उन्होंने कहा कि अभिनय केवल संवाद बोलने का नाम नहीं है बल्कि किसी चरित्र की सोच, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार को समझना सबसे बड़ी चुनौती होती है। कलाकार को हर भूमिका में पूरी ईमानदारी के साथ उतरना पड़ता है, तभी वह दर्शकों तक प्रभावी तरीके से पहुंच पाता है।
टीवी, सिनेमा और ओटीटी के बदलते दौर पर रखी राय
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए रोहिताश्व गौड़ ने मनोरंजन उद्योग में आए बदलावों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल प्लेटफॉर्म और ओटीटी ने कलाकारों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। पहले जहां सीमित माध्यम थे, वहीं अब प्रतिभाशाली कलाकारों को अपनी क्षमता दिखाने के कई मंच उपलब्ध हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि माध्यम चाहे टीवी हो, फिल्म हो या ओटीटी, अंततः अच्छी कहानी और मजबूत अभिनय ही दर्शकों का दिल जीतते हैं। दर्शक हमेशा ऐसी सामग्री को पसंद करते हैं जिसमें ईमानदारी और संवेदनशीलता हो।
कॉमेडी सबसे कठिन विधाओं में से एक
रोहिताश्व गौड़ ने कहा कि लोग अक्सर कॉमेडी को आसान समझ लेते हैं, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने कहा कि दर्शकों को सहज रूप से हंसाना अभिनय की सबसे कठिन विधाओं में से एक है।
कॉमेडी में संवाद, टाइमिंग, बॉडी लैंग्वेज और सह-कलाकारों के साथ तालमेल बेहद महत्वपूर्ण होता है। छोटी-सी गलती भी दृश्य का प्रभाव कम कर सकती है। इसलिए कॉमेडी कलाकारों को हर दृश्य पर विशेष मेहनत करनी पड़ती है।
रायपुर के लोगों से मिला भरपूर स्नेह
रायपुर प्रवास के दौरान मिले स्वागत पर खुशी व्यक्त करते हुए रोहिताश्व गौड़ ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग बेहद आत्मीय और संस्कृति से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि यहां आकर हमेशा अपनापन महसूस होता है।
उन्होंने सातवें निर्मल पांडेय स्मृति फिल्म फेस्टिवल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सिनेमा के बीच संवाद को मजबूत करते हैं। साथ ही युवा कलाकारों को सीखने और प्रेरणा लेने का अवसर भी मिलता है।
पत्रकारों के सवालों का दिया बेबाक जवाब

‘हमर पहुना’ कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने उनके अभिनय जीवन, लोकप्रियता, नए प्रोजेक्ट्स और टीवी इंडस्ट्री के भविष्य से जुड़े कई सवाल पूछे। रोहिताश्व गौड़ ने सभी सवालों का सहज और स्पष्ट तरीके से जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि कलाकार के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार दर्शकों का प्यार होता है। जब लोग वर्षों बाद भी किसी किरदार को याद रखते हैं, तो उससे बड़ी उपलब्धि कोई नहीं हो सकती।
मनोरंजन के बदलते दौर में अच्छी कहानियों की जरूरत
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि मनोरंजन की दुनिया लगातार बदल रही है, लेकिन अच्छी कहानियों की जरूरत कभी खत्म नहीं होगी। दर्शक आज भी ऐसे किरदारों और कथानकों को पसंद करते हैं जिनमें संवेदनाएं, हास्य और वास्तविक जीवन की झलक हो।
उन्होंने युवा कलाकारों को सलाह देते हुए कहा कि लोकप्रियता के पीछे भागने के बजाय अपने अभिनय कौशल को लगातार बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। मेहनत, धैर्य और सीखने की इच्छा ही लंबे समय तक सफलता दिलाती है।
रायपुर प्रेस क्लब के ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में रोहिताश्व गौड़ की मौजूदगी ने न केवल पत्रकारों बल्कि उपस्थित दर्शकों को भी मनोरंजन जगत के एक अनुभवी कलाकार के जीवन और संघर्ष को करीब से जानने का अवसर दिया। उनकी सादगी, सहजता और अनुभवों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

