सक्ती के स्कूल में कथित शराब पार्टी का वीडियो वायरल, शिक्षा विभाग सख्त; 5 शिक्षकों समेत 6 कर्मचारियों को नोटिस

सक्ती जिले के मालखरौदा ब्लॉक स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल किरारी में कथित शराब पार्टी का वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने 5 शिक्षकों और एक स्वीपर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जानिए पूरा मामला, विभाग की कार्रवाई और आगे क्या हो सकता है।

सक्ती CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने अभिभावकों, विद्यार्थियों और आम लोगों के बीच गंभीर चिंता पैदा कर दी है। मालखरौदा विकासखंड के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल, किरारी का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्कूल परिसर के भीतर कुछ कर्मचारी शराब का सेवन करते हुए दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है और मामले को गंभीरता से लेते हुए पांच शिक्षकों तथा एक स्वीपर सहित कुल छह कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो की सत्यता और उससे जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो में स्कूल परिसर के अंदर कुछ लोग एक साथ बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इनमें पांच शिक्षक और एक स्वीपर शामिल हैं तथा वे शराब का सेवन कर रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों के बीच नाराजगी देखने को मिली।

सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से साझा होने के साथ ही लोगों ने स्कूल परिसर में इस तरह की गतिविधियों पर सवाल उठाए। कई लोगों ने शिक्षा विभाग से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी की।

शिक्षा विभाग ने लिया तत्काल संज्ञान

वीडियो सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित सभी छह कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

नोटिस में कर्मचारियों से घटना के संबंध में लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग ने जवाब देने के लिए तीन दिन की समय-सीमा निर्धारित की है। अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों के जवाब प्राप्त होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच की जाएगी।

जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल यह प्रारंभिक कार्रवाई है। जांच के दौरान वायरल वीडियो की सत्यता, वीडियो कब बनाया गया, उसमें दिखाई देने वाले लोगों की पहचान तथा घटना की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि की जाएगी।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों और विभागीय नियमावली के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसमें चेतावनी, वेतनवृद्धि रोकना, निलंबन अथवा अन्य विभागीय कार्रवाई शामिल हो सकती है।

विद्यालय की गरिमा पर उठे सवाल

स्कूल केवल पढ़ाई का स्थान नहीं होता बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में यदि किसी शैक्षणिक परिसर में अनुशासनहीनता या नियमों के उल्लंघन से जुड़ा मामला सामने आता है तो उसका सीधा असर विद्यालय की छवि पर पड़ता है।

अभिभावकों का कहना है कि शिक्षक समाज के लिए आदर्श माने जाते हैं। इसलिए उनसे अपेक्षा रहती है कि वे अपने आचरण से विद्यार्थियों के सामने सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करें। इसी कारण इस तरह के मामलों को लेकर समाज की संवेदनशीलता स्वाभाविक रूप से अधिक होती है।

सोशल मीडिया के दौर में बढ़ी जवाबदेही

बीते कुछ वर्षों में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों से जुड़े मामलों की जानकारी तेजी से सामने आने लगी है। कई मामलों में वायरल वीडियो या तस्वीरों के आधार पर विभागों ने जांच बैठाई है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई भी की है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी भी वायरल वीडियो को अंतिम सत्य मानने से पहले उसकी तकनीकी और प्रशासनिक जांच आवश्यक होती है, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो।

विभाग ने निष्पक्ष जांच का दिया भरोसा

शिक्षा विभाग का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच में कर्मचारियों के लिखित जवाब, उपलब्ध वीडियो, अन्य साक्ष्य तथा आवश्यक होने पर प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी शामिल किए जा सकते हैं।

विभागीय अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई करने में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

अभिभावकों की अपेक्षा

स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उनका मानना है कि किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता के मामलों में पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी कर्मचारी पर लगे आरोप गलत साबित होते हैं तो जांच के माध्यम से यह भी स्पष्ट होना चाहिए, जिससे अनावश्यक विवाद समाप्त हो सके।

फिलहाल जांच जारी

वर्तमान में पूरा मामला जांच के दायरे में है। शिक्षा विभाग संबंधित कर्मचारियों के स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावे कितने सही हैं और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका क्या रही।

तब तक विभाग की ओर से जारी नोटिस को प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है। अंतिम निर्णय जांच पूरी होने और सभी तथ्यों के परीक्षण के बाद लिया जाएगा।

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