चलती कार में सनरूफ स्टंट पर हाईकोर्ट सख्त: बिलासपुर SSP से मांगा व्यक्तिगत शपथपत्र, सड़क सुरक्षा पर उठाए कड़े सवाल

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चलती कार की सनरूफ से बाहर निकलकर स्टंट और रील बनाने के वायरल वीडियो पर स्वतः संज्ञान लिया है। बिलासपुर एसएसपी से व्यक्तिगत शपथपत्र मांगते हुए कोर्ट ने पूछा कि अब तक क्या कार्रवाई हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस क्या कदम उठा रही है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

बिलासपुर CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने की होड़ अब लोगों की जान और सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। चलती कारों की सनरूफ से बाहर निकलकर स्टंट करना, तेज रफ्तार वाहनों में रील बनाना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करना लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी तरह के एक वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह को व्यक्तिगत शपथपत्र (हलफनामा) दाखिल करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल चालान काट देना या औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। पुलिस को यह बताना होगा कि अब तक इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई की गई है और भविष्य में इस तरह के खतरनाक स्टंट रोकने के लिए कौन-सी प्रभावी व्यवस्था बनाई गई है।


क्या है पूरा मामला?

हाल ही में बिलासपुर के कोनी-सेंदरी रोड पर चलती कार की सनरूफ से बाहर निकलकर युवकों और युवतियों द्वारा स्टंट करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में देखा गया कि कार सड़क पर दौड़ रही है और उसमें सवार कुछ लोग सनरूफ से आधा शरीर बाहर निकालकर मोबाइल फोन से वीडियो और रील बना रहे हैं।

वीडियो में न तो यात्रियों द्वारा सुरक्षा के किसी नियम का पालन किया जा रहा था और न ही उनकी हरकतों से आसपास चल रहे अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा का ध्यान रखा गया। कुछ सेकंड की वायरल रील के लिए इस तरह अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालने की यह घटना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।


हाईकोर्ट ने स्वतः लिया संज्ञान

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने न्यायपालिका का भी ध्यान आकर्षित किया। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इसे सड़क सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया।

कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए पूछा कि—

  • वायरल वीडियो सामने आने के बाद क्या कार्रवाई की गई?
  • संबंधित वाहन और उसमें सवार लोगों की पहचान हुई या नहीं?
  • भविष्य में इस प्रकार के स्टंट और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए पुलिस की क्या रणनीति है?
  • आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?

इन सवालों के जवाब में अदालत ने बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह से व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा है।


सड़क पर स्टंट केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, जानलेवा भी

विशेषज्ञों का मानना है कि चलती कार की सनरूफ से बाहर निकलना बेहद जोखिम भरा होता है। अचानक ब्रेक लगने, वाहन के असंतुलित होने या किसी दूसरी गाड़ी के पास से गुजरने जैसी स्थिति में गंभीर दुर्घटना हो सकती है।

ऐसे मामलों में खतरा केवल स्टंट करने वालों तक सीमित नहीं रहता बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालकों और राहगीरों की जान भी जोखिम में पड़ जाती है। कई बार पीछे चल रहे वाहन चालक अचानक ऐसे दृश्य देखकर घबरा जाते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।


सोशल मीडिया की लोकप्रियता बन रही बड़ी वजह

पिछले कुछ वर्षों में इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने की चाहत ने युवाओं के बीच खतरनाक स्टंट का चलन बढ़ाया है। तेज रफ्तार बाइक, कार की खिड़की या सनरूफ से बाहर निकलकर वीडियो बनाना, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करना और सार्वजनिक स्थानों पर जोखिम भरे करतब करना अब आम होता जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ सेकंड की रील या अधिक व्यूज़ पाने की कोशिश कई बार लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ जाती है। ऐसे वीडियो देखकर अन्य युवा भी उनकी नकल करने लगते हैं, जिससे सड़क सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं।


मोटर वाहन कानून क्या कहता है?

यातायात विशेषज्ञों के अनुसार वाहन की सनरूफ का उद्देश्य केवल वेंटिलेशन और सीमित उपयोग है, न कि उसमें खड़े होकर यात्रा करना या स्टंट करना।

चलती गाड़ी से शरीर बाहर निकालना, वाहन में खतरनाक तरीके से यात्रा करना तथा सार्वजनिक सड़क पर दूसरों की सुरक्षा को खतरे में डालना मोटर वाहन कानून के तहत दंडनीय माना जा सकता है। ऐसे मामलों में पुलिस चालान, जुर्माना और अन्य वैधानिक कार्रवाई कर सकती है। यदि स्टंट के कारण दुर्घटना होती है तो संबंधित धाराओं के तहत और भी गंभीर कानूनी कार्रवाई संभव है।


कोर्ट की सख्ती का क्या हो सकता है असर?

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को सड़क सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अदालत की निगरानी के बाद पुलिस ऐसे मामलों में अधिक सक्रिय कार्रवाई कर सकती है। वायरल वीडियो के आधार पर वाहन मालिकों की पहचान, सीसीटीवी फुटेज की जांच, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे स्टंट वीडियो पर त्वरित कार्रवाई जैसे कदम तेज हो सकते हैं।

इसके अलावा पुलिस स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान भी चला सकती है ताकि युवाओं को इस तरह के जोखिम भरे स्टंट से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा सके।


सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। वाहन चालक, अभिभावक, शिक्षण संस्थान और समाज सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि परिवार और समाज युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करें और सोशल मीडिया पर खतरनाक स्टंट को बढ़ावा न दें, तो ऐसी घटनाओं में काफी कमी लाई जा सकती है।

कुछ सेकंड की लोकप्रियता के लिए जीवन को जोखिम में डालना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। सड़क पर किया गया एक छोटा-सा स्टंट न केवल खुद की बल्कि कई निर्दोष लोगों की जान को भी खतरे में डाल सकता है।


आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर हाईकोर्ट में दाखिल होने वाले बिलासपुर एसएसपी के व्यक्तिगत शपथपत्र पर रहेगी। अदालत पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई और भविष्य की कार्ययोजना का परीक्षण करेगी। यदि अदालत को जवाब संतोषजनक नहीं लगता है, तो इस मामले में आगे और सख्त निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।

यह मामला केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा, कानून के पालन और सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है।

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