45 करोड़ रुपये का निवेश दिलाने का झांसा देकर कारोबारी से 1.13 करोड़ की ठगी, रायपुर पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह का किया पर्दाफाश

रायपुर में 45 करोड़ रुपये का निवेश दिलाने का झांसा देकर कारोबारी से 1.13 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय ‘वॉश एंड वॉश ब्लैक मनी स्कैम’ का खुलासा। नागपुर से दो महिला आरोपी गिरफ्तार, कई राज्यों में फैला है गिरोह।

CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) राजधानी रायपुर में करोड़ों रुपये की निवेश धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। रायपुर पुलिस ने 45 करोड़ रुपये का निवेश दिलाने का झांसा देकर एक कारोबारी से 1 करोड़ 13 लाख रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो महिला आरोपियों को महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों में इसी तरह के फर्जी निवेश और ब्लैक मनी को असली नोटों में बदलने के नाम पर लोगों को अपना शिकार बना रहा था।

पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले में जिस तरीके का इस्तेमाल किया गया, उसे अपराध जगत में “वॉश एंड वॉश (Wash & Wash) ब्लैक मनी स्कैम” के नाम से जाना जाता है। इस ठगी में आधुनिक तकनीक, विदेशी केमिकल और भारी निवेश का लालच देकर लोगों को करोड़ों रुपये का सपना दिखाया जाता है और फिर अलग-अलग बहानों से उनसे लगातार रकम वसूली जाती है।

नागपुर से गिरफ्तार हुईं दो महिला आरोपी

रायपुर पुलिस की टीम ने महाराष्ट्र के नागपुर में दबिश देकर दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय (24 वर्ष), निवासी कोलकाता तथा दीपिका पालीवाल (24 वर्ष), निवासी उदयपुर (राजस्थान) के रूप में हुई है।

पुलिस ने दोनों आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, 26 हजार रुपये नकद, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड सहित लगभग 70 हजार रुपये मूल्य का अन्य सामान जब्त किया है। बरामद मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके।

45 करोड़ रुपये का निवेश दिलाने का दिया था भरोसा

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने एक कारोबारी से संपर्क कर दावा किया कि उनके पास ऐसे विदेशी निवेशकों और वित्तीय स्रोतों का नेटवर्क है, जो उसे 45 करोड़ रुपये तक का निवेश उपलब्ध करा सकते हैं।

विश्वास दिलाने के लिए उन्होंने कारोबारी के सामने कई तरह के दस्तावेज, विदेशी संपर्कों का हवाला और कथित वित्तीय प्रक्रिया की जानकारी दी। जब कारोबारी उनके झांसे में आ गया तो आरोपियों ने निवेश प्रक्रिया शुरू करने के नाम पर अलग-अलग चरणों में बड़ी रकम की मांग शुरू कर दी।

कभी विदेशी केमिकल खरीदने, कभी प्रोसेसिंग चार्ज, कभी सरकारी मंजूरी, तो कभी फंड रिलीज शुल्क के नाम पर आरोपी लगातार पैसे लेते रहे। देखते ही देखते कारोबारी से कुल 1.13 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई।

क्या है ‘वॉश एंड वॉश ब्लैक मनी स्कैम’?

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह ठगी का बेहद सुनियोजित तरीका है, जिसमें अपराधी दावा करते हैं कि उनके पास विशेष विदेशी केमिकल और अत्याधुनिक तकनीक है, जिसकी मदद से काले रंग से ढके नोटों को असली भारतीय मुद्रा में बदला जा सकता है।

पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए आरोपी पहले से तैयार असली नोटों का इस्तेमाल करते हैं। वे एक नकली रासायनिक प्रक्रिया दिखाते हैं, जिसमें ऐसा प्रतीत होता है कि काले रंग से ढका कागज या नोट कुछ मिनटों में असली मुद्रा बन गया हो।

इस प्रदर्शन से प्रभावित होकर कई लोग उन्हें असली समझ बैठते हैं। इसके बाद विदेशी केमिकल, मशीन, सुरक्षा मंजूरी, सीमा शुल्क, टैक्स, परीक्षण और फंड रिलीज जैसे बहानों के जरिए लाखों और करोड़ों रुपये की वसूली की जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका वर्षों से दुनिया के कई देशों में अलग-अलग नामों से सक्रिय रहा है और अब भारत में भी समय-समय पर ऐसे मामलों का खुलासा होता रहा है।

15 वर्षों से सक्रिय बताया जा रहा है गिरोह

प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। आरोपियों ने स्वीकार किया है कि गिरोह लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है।

पुलिस के अनुसार यह गिरोह पिछले लगभग 15 वर्षों से विभिन्न राज्यों में लोगों को निवेश, ब्लैक मनी को वैध बनाने और बड़े फंड रिलीज कराने का झांसा देकर ठगी करता आ रहा है।

अब तक की जांच में महाराष्ट्र के नागपुर, उत्तर प्रदेश के लखनऊ सहित कई राज्यों में इसी तरह की घटनाओं की जानकारी सामने आई है। रायपुर पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क कर आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों का रिकॉर्ड जुटा रही है।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार दोनों महिलाएं इस बड़े नेटवर्क का केवल एक हिस्सा हैं। गिरोह में कई अन्य सदस्य भी सक्रिय हैं, जो अलग-अलग राज्यों में बैठकर लोगों से संपर्क करते हैं और उन्हें निवेश का झांसा देते हैं।

जांच एजेंसियां मोबाइल फोन, बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही हैं। इससे गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके वित्तीय नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।

रायपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है और जल्द ही मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

ऐसी ठगी से कैसे बचें?

विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आज के समय में बड़ी रकम का निवेश, विदेशी फंड, ब्लैक मनी को सफेद करने या किसी विशेष तकनीक से नोटों को बदलने जैसे दावे पूरी तरह संदेह के दायरे में रखने चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति बिना वैध दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया के करोड़ों रुपये का निवेश दिलाने या किसी रासायनिक प्रक्रिया से नोटों का मूल्य बढ़ाने का दावा करता है, तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को देना चाहिए।

इसके अलावा किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अग्रिम भुगतान करने से बचना चाहिए और निवेश से पहले संबंधित संस्था की वैधता की पूरी जांच करनी चाहिए।

पुलिस की अपील

रायपुर पुलिस ने आम नागरिकों और कारोबारियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के फर्जी निवेश, ब्लैक मनी बदलने, विदेशी केमिकल या चमत्कारी वित्तीय योजनाओं के झांसे में न आएं। यदि कोई व्यक्ति इस तरह का प्रस्ताव देता है तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और अन्य लोगों को भी ठगी का शिकार होने से बचाया जा सके।

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि ठग अब केवल ऑनलाइन ही नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक तरीके अपनाकर भी लोगों का विश्वास जीत रहे हैं। इसलिए करोड़ों के मुनाफे या बड़े निवेश के किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच करना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

 

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