छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कटघोरा में अटल बिहारी वाजपेयी की कथित कांस्य प्रतिमा विवाद को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। जानिए क्या है पूरा मामला, महंत की प्रमुख मांगें और राजनीतिक मायने।
CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) छत्तीसगढ़ की राजनीति में कटघोरा स्थित अटल परिसर में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस पूरे मामले को केवल निर्माण गुणवत्ता का मुद्दा नहीं, बल्कि सरकारी धन, प्रशासनिक जवाबदेही और देश के एक सर्वमान्य नेता के सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।
डॉ. महंत ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी देश की राजनीति के ऐसे व्यक्तित्व रहे हैं जिन्हें दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर सम्मान मिला। ऐसे नेता की स्मृति में स्थापित की गई प्रतिमा यदि कथित रूप से निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं बनाई गई है तो यह केवल तकनीकी लापरवाही नहीं, बल्कि जनता की भावनाओं के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है।
क्या है पूरा मामला?
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार कटघोरा के अटल परिसर में लगभग 14 लाख रुपये की लागत से कांस्य (ब्रॉन्ज) की प्रतिमा स्थापित किए जाने का प्रावधान था। लेकिन आरोप लगाया गया है कि कांस्य प्रतिमा के स्थान पर सीमेंट से बनी प्रतिमा तैयार कर उस पर रंग-पेंट कर कांस्य जैसा स्वरूप देकर स्थापित कर दिया गया।
हाल ही में हुई बारिश के बाद प्रतिमा की सतह पर उखड़ने और परत निकलने जैसी स्थिति सामने आने के बाद इस निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए हैं। इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर कांग्रेस ने सरकार से पूरे मामले में जवाब मांगा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों या सक्षम अधिकारियों द्वारा अभी सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है। मामले की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार किया जा रहा है।
‘पानी में बह जाने वाली कांस्य प्रतिमा दुनिया में पहली होगी’
डॉ. चरणदास महंत ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि सरकार का दावा है कि प्रतिमा कांस्य की थी, तो बारिश के बाद उसकी सतह कैसे उखड़ गई। उन्होंने कहा कि “पानी में बह जाने वाली कांस्य प्रतिमा शायद दुनिया का पहला उदाहरण होगी।”
उन्होंने सरकार से सीधे सवाल पूछते हुए कहा कि जनता को स्पष्ट बताया जाए कि प्रतिमा वास्तव में कांस्य की थी या सीमेंट की। यदि कांस्य की थी तो उपयोग में लाई गई सामग्री का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए और यदि सीमेंट की थी तो स्वीकृत परियोजना के अनुरूप निर्माण क्यों नहीं किया गया।
‘यह केवल प्रतिमा का नहीं, सरकारी धन का भी मामला’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह विवाद केवल एक प्रतिमा तक सीमित नहीं है। यदि निर्माण में निर्धारित सामग्री का उपयोग नहीं हुआ है तो यह सरकारी धन के उपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।
उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से होने वाले प्रत्येक निर्माण कार्य में गुणवत्ता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि कहीं भी मानकों से समझौता हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
ठेकेदार और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्य से जुड़े लोगों और ठेकेदार के राजनीतिक संबंधों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए—
- निर्माण कार्य का ठेका किस प्रक्रिया के तहत दिया गया।
- किस एजेंसी ने निर्माण की निगरानी की।
- गुणवत्ता परीक्षण किस स्तर पर किया गया।
- भुगतान से पहले तकनीकी सत्यापन हुआ था या नहीं।
उनका कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों और सप्लायरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रदेशभर की अटल प्रतिमाओं के सत्यापन की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने अपनी मांग को केवल कटघोरा तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि राज्य में जहां-जहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, उन सभी का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण कराया जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि विशेषज्ञों की समिति गठित कर प्रत्येक प्रतिमा की सामग्री, निर्माण गुणवत्ता और स्वीकृत तकनीकी मानकों का परीक्षण कराया जाए। यदि कहीं भी घटिया सामग्री, वित्तीय अनियमितता या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
एफआईआर और सरकारी राशि की वसूली की मांग
डॉ. महंत ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सरकारी धन की वसूली की मांग भी उठाई।
उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
राजनीतिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में रहे हैं जिन्हें लगभग सभी राजनीतिक दल सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। ऐसे में उनकी प्रतिमा के निर्माण को लेकर उठे सवाल स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस का विषय बन गए हैं।
एक ओर विपक्ष इसे सरकारी कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता का मुद्दा बना रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार की ओर से जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर भी सभी की नजर बनी हुई है। यह मामला आने वाले दिनों में विधानसभा और प्रदेश की राजनीति में भी प्रमुख मुद्दा बन सकता है।
आगे क्या?
अब इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण पहलू आधिकारिक जांच का रहेगा। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो निर्माण प्रक्रिया, सामग्री की गुणवत्ता और वित्तीय स्वीकृतियों से जुड़े कई सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो सरकार के पक्ष को भी मजबूती मिलेगी।
फिलहाल विपक्ष ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए प्रदेशभर की अटल प्रतिमाओं का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है, जबकि जनता भी इस मामले में पारदर्शी जांच और स्पष्ट तथ्यों का इंतजार कर रही है।

