कोरबा में 29 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के तत्वावधान में प्रदेश स्तरीय भोजली महोत्सव का आयोजन होगा। ओपन थिएटर घंटाघर से भव्य शोभायात्रा, डेंगुरनाला भोजली घाट पर विसर्जन, लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का अनूठा संगम। पढ़ें पूरी खबर।
कोरबा CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) । छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस वर्ष 29 अगस्त को कोरबा में प्रदेश स्तरीय भोजली महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन का नेतृत्व छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना (गैर राजनीतिक संगठन), जिला कोरबा द्वारा किया जा रहा है। आयोजन समिति के अनुसार कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और लोक परंपराओं से जुड़े हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है।
यह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, लोक आस्था, सामाजिक समरसता और पारंपरिक मूल्यों को सहेजने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि बदलते समय में लोक परंपराओं को जीवित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और भोजली महोत्सव उसी दिशा में एक सार्थक पहल है।
ओपन थिएटर घंटाघर से निकलेगी भव्य शोभायात्रा
कार्यक्रम की शुरुआत ओपन थिएटर, घंटाघर, कोरबा से होगी। यहां विधिवत पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद विशाल भोजली शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए डेंगुरनाला भोजली घाट पहुंचेगी, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भोजली का विसर्जन किया जाएगा।
शोभायात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएं, युवतियां और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य लोकगीतों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ शामिल होंगे। आयोजन समिति का उद्देश्य है कि इस सांस्कृतिक यात्रा के माध्यम से समाज के हर वर्ग को अपनी लोक परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिले।
क्या है भोजली पर्व का महत्व?
भोजली छत्तीसगढ़ का अत्यंत लोकप्रिय और प्राचीन लोकपर्व है। यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं और युवतियों की आस्था से जुड़ा हुआ है। इस दौरान मिट्टी के पात्र में गेहूं, जौ अथवा अन्य अनाज के बीज बोए जाते हैं और कई दिनों तक उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद निर्धारित तिथि पर भोजली की शोभायात्रा निकालकर नदी, तालाब अथवा जलाशय में विसर्जन किया जाता है।
लोक मान्यताओं के अनुसार भोजली समृद्धि, अच्छी वर्षा, हरियाली, खुशहाली और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है। यह पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान और कृषि संस्कृति से जुड़े जीवन मूल्यों को भी दर्शाता है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ अब शहरों में भी भोजली महोत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाने लगा है।
लोक संस्कृति के संरक्षण का प्रयास
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश स्तरीय भोजली महोत्सव का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संस्कृति को संरक्षित करना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है।
आज के डिजिटल दौर में जहां आधुनिकता तेजी से जीवनशैली को प्रभावित कर रही है, वहीं लोक परंपराओं को जीवित रखना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं और समाज में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत बनाते हैं।
प्रदेशभर से लोगों को दिया गया आमंत्रण
आयोजन समिति ने प्रदेश के सभी जिलों से सामाजिक संगठनों, सांस्कृतिक संस्थाओं, धार्मिक समितियों, महिला मंडलों, युवाओं और आम नागरिकों को इस महोत्सव में शामिल होने का आमंत्रण दिया है।
समिति का कहना है कि यह आयोजन किसी एक संस्था का कार्यक्रम नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का उत्सव है। इसलिए सभी समाजों और वर्गों की सहभागिता इसे और अधिक भव्य एवं ऐतिहासिक बनाएगी।
बैठक में तैयारियों की रूपरेखा तय
महोत्सव की तैयारियों को लेकर हाल ही में आयोजित बैठक में आयोजन की तिथि, कार्यक्रम की रूपरेखा और व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि आयोजन को पूरी गरिमा और पारंपरिक स्वरूप के साथ संपन्न कराया जाएगा।
बैठक में शोभायात्रा की व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, स्वागत व्यवस्था, स्वयंसेवकों की जिम्मेदारियां, विसर्जन स्थल की तैयारियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सभी पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपते हुए समय पर तैयारियां पूरी करने का निर्णय लिया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे आकर्षण का केंद्र
आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति पर आधारित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित किए जाने की संभावना है। पारंपरिक लोकगीत, लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को प्रस्तुत किया जाएगा।
लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां इस आयोजन को और अधिक आकर्षक बनाएंगी। इससे स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच भी मिलेगा तथा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर मजबूती मिलेगी।
सामाजिक एकता का भी संदेश देगा महोत्सव
भोजली महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। यह समाज में भाईचारा, सहयोग, एकता और सामूहिक सहभागिता का संदेश भी देता है। विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों से आने वाले लोग जब एक मंच पर एकत्र होते हैं तो सामाजिक समरसता और आपसी सद्भाव को भी मजबूती मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन समाज को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने के साथ-साथ युवाओं में अपनी परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना भी विकसित करते हैं।
लोक विरासत को संजोने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
छत्तीसगढ़ अपनी विविध लोक परंपराओं, लोकगीतों, त्योहारों और सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरे देश में अलग पहचान रखता है। भोजली महोत्सव जैसे आयोजन इस पहचान को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयोजन समिति ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इस सांस्कृतिक उत्सव को सफल बनाएं और आने वाली पीढ़ियों तक अपनी लोक विरासत को पहुंचाने में सहभागी बनें।
29 अगस्त को कोरबा में आयोजित होने वाला यह प्रदेश स्तरीय भोजली महोत्सव निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, लोक आस्था और सामाजिक एकता का एक भव्य उदाहरण बनने की ओर अग्रसर है।

