सावन 2026 में भगवान शिव की पूजा, चार सोमवार व्रत, रुद्राभिषेक, कांवड़ यात्रा और शिव आराधना की पूरी विधि जानिए। सावन महीने के धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व के साथ पूजा के नियम और मान्यताएं पढ़ें।
CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) सावन माह 2026: हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। वर्षा ऋतु के इस महीने में चारों ओर हरियाली छा जाती है और वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, मन को शांति मिलती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। यही कारण है कि सावन में कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से और विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन के लिए शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
इस बार सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं। पहला सोमवार 28 जुलाई, दूसरा 4 अगस्त, तीसरा 11 अगस्त और चौथा सोमवार 18 अगस्त को रहेगा। ज्योतिष और धार्मिक विद्वानों के अनुसार चार सोमवार वाला सावन अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान किए गए व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान विशेष फल प्रदान करते हैं।
सावन सोमवार व्रत और शिव पूजा की सही विधि
सावन में भगवान शिव की पूजा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि और संयम का माध्यम भी मानी जाती है। श्रद्धालु पूरे महीने भगवान शिव का ध्यान करते हैं और सोमवार के दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और संकल्प
सावन सोमवार के दिन भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 4 बजे से 6 बजे के बीच उठकर पूजा करना शुभ माना जाता है।
यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करना उत्तम माना जाता है। घर में स्नान करते समय पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर भी पवित्रता का भाव रखा जा सकता है। स्नान के बाद साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनकर भगवान शिव की पूजा का संकल्प लेना चाहिए।
2. व्रत और सात्विक जीवन का महत्व
सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने वाला माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु फलाहार करते हैं या केवल एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन में संयम, सत्य और अच्छे विचारों का पालन करने से मन की शुद्धि होती है। इस महीने मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
सावन का व्रत केवल भोजन त्यागने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने विचारों और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर भी माना जाता है।
3. शिवलिंग जलाभिषेक और पंचामृत पूजा

भगवान शिव की पूजा में जलाभिषेक का विशेष महत्व है। सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है। भक्त गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।
पंचामृत अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन और सफेद पुष्प अर्पित किए जाते हैं।
मान्यता है कि बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी साफ और अखंड पत्तियों का उपयोग करना चाहिए।
रुद्राभिषेक क्यों है सावन में विशेष फलदायी?
सावन में रुद्राभिषेक को सबसे प्रभावशाली धार्मिक अनुष्ठानों में से एक माना जाता है। इसमें वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है।
“रुद्र” भगवान शिव के एक स्वरूप को कहा जाता है। रुद्राभिषेक के दौरान शिवलिंग पर जल, दूध और अन्य पवित्र पदार्थ अर्पित किए जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार के दिन किया गया रुद्राभिषेक घर में सुख-शांति, सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लेकर आता है। कई श्रद्धालु जीवन की परेशानियों, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए भी यह अनुष्ठान करवाते हैं।
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र जाप से मिलता है मानसिक शांति का अनुभव
सावन में मंत्र जाप का भी विशेष महत्व है। भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
भक्त 108 बार इस मंत्र का जाप करते हैं। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
शाम के समय शिव मंदिर में दीप जलाकर शिव चालीसा, शिव तांडव स्त्रोत और शिव पुराण का पाठ करना शुभ माना जाता है।
कांवड़ यात्रा: आस्था, तपस्या और समर्पण का प्रतीक

सावन में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। देशभर से लाखों श्रद्धालु गंगा नदी से जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए शिव मंदिरों तक पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि धैर्य, त्याग और भक्ति की परीक्षा भी मानी जाती है। भक्त कठिन परिस्थितियों में भी भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था बनाए रखते हैं।
सावन के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान
16 सोमवार व्रत
कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए 16 सोमवार व्रत रखती हैं। इस दौरान शिव-पार्वती की पूजा और कथा श्रवण किया जाता है।
मंगला गौरी पूजा
सावन के मंगलवार को महिलाएं मंगला गौरी पूजा करती हैं। मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन में सुख और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है।
नाग पंचमी और हरियाली तीज
सावन में नाग पंचमी और हरियाली तीज जैसे पर्व भी मनाए जाते हैं। ये त्योहार प्रकृति, संस्कृति और महिला शक्ति से जुड़े हुए हैं।
सावन का वैज्ञानिक महत्व भी है खास
धार्मिक महत्व के साथ सावन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी महत्वपूर्ण है। वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी बढ़ जाती है और शरीर की पाचन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
आयुर्वेद में इस मौसम में हल्का और सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। यही कारण है कि सावन में खान-पान को लेकर कई नियम बताए गए हैं।
हरी सब्जियों और कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से दूरी रखने की परंपरा भी स्वास्थ्य कारणों से जुड़ी मानी जाती है।
छत्तीसगढ़ के कोरबा पाली शिव मंदिर में सावन की विशेष तैयारियां
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले स्थित ऐतिहासिक पाली शिव मंदिर में सावन के दौरान विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। करीब 1300 वर्ष पुराने इस मंदिर में सावन सोमवार के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मान्यता है कि यहां स्थित शिवलिंग स्वयंभू है और मंदिर परिसर में प्राकृतिक रूप से शिव आराधना की विशेष ऊर्जा महसूस होती है। सावन के अवसर पर रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
सावन में क्या करें और क्या नहीं करें
क्या करें:
- प्रतिदिन भगवान शिव का स्मरण करें
- शिवलिंग पर जल अर्पित करें
- गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता करें
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें
- मंदिर में दीप जलाएं
क्या नहीं करें:
- क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें
- झूठ और निंदा से दूर रहें
- नशे और तामसिक भोजन का सेवन न करें
- शिव पूजा में अशुद्ध सामग्री का प्रयोग न करें
सावन है आत्मशुद्धि और भक्ति का पर्व
सावन केवल भगवान शिव की पूजा का महीना नहीं है, बल्कि यह अपने जीवन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर भी है। यह महीना हमें संयम, सेवा, प्रकृति प्रेम और आध्यात्मिक शांति का संदेश देता है।
भगवान शिव को भाव का देवता माना जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से चढ़ाया गया एक लोटा जल भी भोलेनाथ को प्रसन्न कर सकता है।
इस सावन भगवान शिव से यही प्रार्थना करें कि हमारे भीतर के अहंकार, क्रोध और नकारात्मकता का अंत हो और जीवन में प्रेम, शांति और सद्भाव का संचार हो।
हर हर महादेव। बोल बम।

