राजनांदगांव पुलिस ने अंतर्राज्यीय मोटरसाइकिल चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से रायपुर और महाराष्ट्र से चोरी की गई 6 बाइक बरामद हुई हैं। फर्जी नंबर प्लेट लगाकर वाहन चलाने का भी खुलासा हुआ। पढ़ें पूरी खबर।
राजनांदगांव CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24)। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में पुलिस ने वाहन चोरी की घटनाओं पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतर्राज्यीय मोटरसाइकिल चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। साइबर थाना और लालबाग थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों से पूछताछ के दौरान चोरी की छह मोटरसाइकिलों का खुलासा हुआ, जिन्हें पुलिस ने बरामद कर लिया है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी चोरी के वाहनों की पहचान छिपाने के लिए उनके मूल नंबर प्लेट हटाकर फर्जी नंबर प्लेट लगाते थे, ताकि पुलिस और आम लोगों को भ्रमित किया जा सके।
इस कार्रवाई को राजनांदगांव पुलिस की हालिया महत्वपूर्ण सफलताओं में माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर अन्य मामलों की भी जांच की जा रही है और गिरोह के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए आगे की कार्रवाई जारी है।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में हुई प्रभावी कार्रवाई
इस पूरे अभियान का संचालन पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन में किया गया। वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर तथा नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन के मार्गदर्शन में साइबर थाना और थाना लालबाग की संयुक्त टीम ने तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर तंत्र की सहायता से आरोपियों तक पहुंच बनाई।
पुलिस को लंबे समय से जिले और आसपास के क्षेत्रों में मोटरसाइकिल चोरी की घटनाओं की शिकायतें मिल रही थीं। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने लगातार निगरानी, तकनीकी जांच और संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण किया। इसी क्रम में पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनके आधार पर तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
पूछताछ में हुआ कई चोरी की घटनाओं का खुलासा
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई अहम खुलासे किए। उन्होंने स्वीकार किया कि वे विभिन्न स्थानों से मोटरसाइकिल चोरी कर उन्हें फर्जी नंबर प्लेट लगाकर इस्तेमाल करते थे या फिर बेचने की तैयारी में रहते थे।
पूछताछ में सामने आया कि बरामद छह मोटरसाइकिलों में—
- चार मोटरसाइकिलें रायपुर शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से चोरी की गई थीं।
- एक मोटरसाइकिल महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के आमगांव क्षेत्र से चोरी की गई थी।
- एक अन्य मोटरसाइकिल की भी चोरी का खुलासा हुआ, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है।
पुलिस अब इन सभी वाहनों के वास्तविक मालिकों से संपर्क कर उन्हें वाहन लौटाने की प्रक्रिया पूरी कर रही है।
फर्जी नंबर प्लेट लगाकर पुलिस को दे रहे थे चुनौती
जांच के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। आरोपियों द्वारा चोरी की गई मोटरसाइकिलों के असली नंबर प्लेट निकालकर उनकी जगह फर्जी नंबर प्लेट लगा दी जाती थी। इसका उद्देश्य वाहन की पहचान बदलना और पुलिस जांच से बचना था।
विशेषज्ञों के अनुसार, अपराधी अक्सर चोरी के वाहनों की पहचान बदलने के लिए नंबर प्लेट, चेसिस नंबर अथवा इंजन नंबर से छेड़छाड़ करने की कोशिश करते हैं। हालांकि इस मामले में पुलिस की तकनीकी जांच और साइबर विश्लेषण ने आरोपियों की पूरी योजना को विफल कर दिया।
फर्जी नंबर प्लेट के इस्तेमाल से आरोपी लंबे समय तक वाहनों का उपयोग करते रहे, जिससे वाहन मालिकों को भी अपने वाहन मिलने की उम्मीद कम हो जाती थी। लेकिन इस कार्रवाई के बाद कई पीड़ितों को राहत मिलने की संभावना है।
चोरी का वाहन छिपाकर रखने वाला आरोपी भी गिरफ्त में
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक आरोपी को यह जानकारी थी कि उसके कब्जे में रखा गया वाहन चोरी का है। इसके बावजूद उसने उसे अपने पास रखा और उसका उपयोग करता रहा।
इसी आधार पर पुलिस ने प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अतिरिक्त धाराएं 336(3), 238, 317(2) तथा 3(5) भी जोड़ी हैं। इन धाराओं के तहत चोरी के संपत्ति को जानते हुए अपने पास रखना, फर्जी पहचान का उपयोग करना तथा सामूहिक अपराध में संलिप्तता जैसे आरोपों की जांच की जा रही है।
अंतर्राज्यीय नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
प्रारंभिक जांच में यह मामला केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं बल्कि अंतर्राज्यीय गिरोह से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। क्योंकि चोरी की घटनाएं छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र दोनों राज्यों से जुड़ी हुई हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि—
- गिरोह में कुल कितने सदस्य शामिल हैं।
- चोरी की मोटरसाइकिलें किन-किन जिलों में बेची जाती थीं।
- क्या गिरोह अन्य राज्यों में भी सक्रिय था।
- चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
साइबर टीम मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल, तकनीकी साक्ष्य और अन्य डिजिटल माध्यमों से गिरोह के नेटवर्क की जांच कर रही है।
वाहन मालिकों के लिए राहत की खबर
मोटरसाइकिल चोरी की घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी हैं। ऐसे मामलों में वाहन मिलने की संभावना अक्सर कम रहती है, लेकिन इस कार्रवाई से कई पीड़ितों को राहत मिलेगी। पुलिस ने बरामद वाहनों के दस्तावेजों का मिलान शुरू कर दिया है और विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद वाहनों को उनके वास्तविक मालिकों को सौंपा जाएगा।
पुलिस ने नागरिकों से की अपील
राजनांदगांव पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने वाहन सार्वजनिक स्थानों पर पार्क करते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। वाहन में अतिरिक्त सुरक्षा लॉक का उपयोग करें, पार्किंग स्थल का चयन सोच-समझकर करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।
साथ ही पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को कम कीमत पर संदिग्ध वाहन खरीदने का प्रस्ताव मिले तो उसकी पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें। बिना वैध दस्तावेजों के वाहन खरीदना भविष्य में कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।
लगातार जारी है वाहन चोरों के खिलाफ अभियान
राजनांदगांव पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में वाहन चोरी, संपत्ति संबंधी अपराध और संगठित अपराधों के खिलाफ विशेष अभियान आगे भी जारी रहेगा। आधुनिक तकनीक, साइबर जांच और खुफिया तंत्र की मदद से अपराधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस कार्रवाई ने न केवल वाहन चोरी करने वाले गिरोह को बड़ा झटका दिया है, बल्कि यह भी संदेश दिया है कि तकनीकी जांच और पुलिस की सतर्कता के सामने अपराधियों के लिए बच निकलना अब आसान नहीं है।

