रायपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: नशीली प्रतिबंधित टैबलेट की सप्लायर मुस्कान रात्रे गिरफ्तार, महीनों से चल रही थी फरार

रायपुर पुलिस ने ‘सूखे नशे के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस’ अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए नशीली प्रतिबंधित टैबलेट की सप्लायर मुस्कान रात्रे को गिरफ्तार किया। आरोपी कई महीनों से फरार थी और NDPS एक्ट के मामले में पुलिस को उसकी तलाश थी। पढ़ें पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

रायपुर CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस कमिश्नरेट की ‘सूखे नशे के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस’ नीति के अंतर्गत एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा टिकरापारा थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने प्रतिबंधित नशीली टैबलेट की कथित सप्लायर मुस्कान रात्रे (27 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले कई महीनों से फरार थी और उसके खिलाफ पहले से न्यायालय में अभियोग पत्र भी प्रस्तुत किया जा चुका था।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई राजधानी में नशीले पदार्थों की अवैध सप्लाई चेन को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में थी और प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई का नेटवर्क कितना बड़ा था।


4 मई की कार्रवाई से खुला था सप्लाई नेटवर्क

पुलिस के अनुसार इस मामले की शुरुआत 4 मई 2026 को हुई थी। उस दिन एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा टिकरापारा थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए गोकुल नगर श्मशान घाट के पास से दो युवकों—मोहम्मद अनीस और कपिल तिवारी—को गिरफ्तार किया था।

तलाशी के दौरान दोनों आरोपियों के कब्जे से 73 प्रतिबंधित नशीली टैबलेट बरामद की गई थीं। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बरामद दवाएं अवैध रूप से बिक्री के उद्देश्य से रखी गई थीं।

इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 22-बी के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया था।


पूछताछ में सामने आया मुस्कान रात्रे का नाम

पुलिस पूछताछ के दौरान मोहम्मद अनीस और कपिल तिवारी ने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए। दोनों ने बताया कि वे प्रतिबंधित नशीली टैबलेट कबीर नगर निवासी मुस्कान रात्रे से खरीदते थे और बाद में उन्हें अलग-अलग लोगों को बेचते थे।

इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने मुस्कान रात्रे को मामले में आरोपी बनाया और उसकी तलाश शुरू कर दी। हालांकि पुलिस की कार्रवाई की भनक लगने के बाद वह लगातार अपना ठिकाना बदलती रही और गिरफ्तारी से बचती रही।


कई महीनों तक फरार रही आरोपी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी मुस्कान रात्रे लगातार फरार चल रही थी। उसके संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी गई, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं लगी।

जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने न्यायालय में उसके खिलाफ अभियोग पत्र भी प्रस्तुत कर दिया था। इसके बावजूद आरोपी की तलाश जारी रही।

लगातार निगरानी और तकनीकी सूचनाओं के आधार पर आखिरकार पुलिस को उसकी लोकेशन मिली और संयुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।


‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत लगातार अभियान

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट पिछले कुछ समय से राजधानी में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ विशेष अभियान चला रही है। पुलिस का कहना है कि केवल छोटे विक्रेताओं को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क को तोड़ना आवश्यक है।

इसी रणनीति के तहत एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट, स्थानीय थाना पुलिस और खुफिया तंत्र मिलकर ऐसे मामलों की निगरानी कर रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सप्लायर से लेकर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक सभी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


नशीली दवाओं का बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिबंधित नशीली दवाओं का अवैध कारोबार केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और समाज के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

कम कीमत और आसान उपलब्धता के कारण कई युवा ऐसे नशे की चपेट में आ जाते हैं। इससे न केवल उनका स्वास्थ्य प्रभावित होता है बल्कि अपराध की घटनाओं में भी वृद्धि हो सकती है।

इसी वजह से पुलिस और स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाते हैं ताकि लोग ऐसे अवैध कारोबार से दूर रहें और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें।


जांच का दायरा बढ़ा

मुस्कान रात्रे की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि प्रतिबंधित टैबलेट कहां से लाई जाती थीं और उनका वितरण किन क्षेत्रों में किया जाता था।

जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर सकती हैं ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।


समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, शिक्षण संस्थान, सामाजिक संगठन और आम नागरिक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

यदि किसी क्षेत्र में नशीले पदार्थों की बिक्री या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को देना समाज के हित में है।

 


आगे क्या होगा?

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस रिमांड मिलने पर उससे नेटवर्क, सप्लाई चेन और अन्य सहयोगियों के संबंध में विस्तृत पूछताछ कर सकती है। इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

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