कोरबा में कांग्रेस का प्रदर्शन: ‘छात्रों की आवाज़ को लाठियों से नहीं दबाया जा सकता’, डॉ. चरणदास महंत ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

कोरबा में जिला कांग्रेस कमेटी ने दिल्ली में छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि छात्रों की आवाज़ को लाठियों और गिरफ्तारियों से नहीं दबाया जा सकता। पढ़ें पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

कोरबा CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में गुरुवार को जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने किया।

कार्यक्रम में कांग्रेस के विभिन्न प्रकोष्ठों और अग्रिम संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई और छात्रों के आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त की गई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि युवाओं और छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज़ को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।


प्रदेश कांग्रेस के निर्देश पर आयोजित हुआ प्रदर्शन

जिला कांग्रेस कमेटी के अनुसार यह कार्यक्रम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर आयोजित किया गया। प्रदर्शन में शहर कांग्रेस, ग्रामीण कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, महिला कांग्रेस, सेवा दल, किसान कांग्रेस, पिछड़ा वर्ग कांग्रेस, अनुसूचित जाति विभाग, अल्पसंख्यक विभाग और अन्य सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां और पार्टी के झंडे लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों के अधिकारों, शिक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।


‘छात्रों की आवाज़ को लाठियों से नहीं दबाया जा सकता’ – डॉ. चरणदास महंत

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि देश का युवा आज अपने भविष्य, अपनी मेहनत और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।

उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों ने करोड़ों विद्यार्थियों का भरोसा कमजोर किया है। ऐसे समय में सरकार की जिम्मेदारी छात्रों की बात सुनने और समाधान निकालने की होनी चाहिए।

डॉ. महंत ने कहा,

“छात्रों की आवाज़ को लाठियों, गिरफ्तारियों और पुलिसिया कार्रवाई से नहीं दबाया जा सकता। लोकतंत्र में असहमति अपराध नहीं होती, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है।”


शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि यदि देश के विद्यार्थी लगातार परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं तो यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक की घटनाओं से लाखों युवाओं का समय, मेहनत और भविष्य प्रभावित होता है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई आवश्यक है ताकि छात्रों का विश्वास फिर से बहाल हो सके।


‘संवाद होना चाहिए, बल प्रयोग नहीं’

डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन किसी भी नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें रख रहे हैं, तो सरकार को उनके साथ संवाद करना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की मांगों को सुनने के बजाय उन पर पुलिस कार्रवाई की गई, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रश्न खड़े होते हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती संवाद, संवेदनशीलता और जवाबदेही से होती है, न कि टकराव से।


कांग्रेस ने छात्रों के समर्थन का किया दावा

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी देशभर के छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी है। उनका कहना था कि शिक्षा, रोजगार और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि यदि छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेंगे।


राजनीतिक माहौल हुआ गर्म

कोरबा में हुए इस प्रदर्शन के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर शिक्षा, छात्र आंदोलन और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है।

एक ओर कांग्रेस केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज़ दबाने का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा का पक्ष पहले भी यह रहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और किसी भी कार्रवाई का उद्देश्य शांति बनाए रखना होता है।

इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।


छात्रों के मुद्दे क्यों हैं महत्वपूर्ण?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना देश के युवाओं के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।

यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो उसका असर केवल परिणामों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और करियर पर भी पड़ता है। इसलिए किसी भी विवाद की निष्पक्ष जांच और समयबद्ध समाधान लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।


लोकतंत्र में विरोध और कानून-व्यवस्था का संतुलन

भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार देता है। साथ ही प्रशासन की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने की भी होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में संवाद, पारदर्शिता और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन ही लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। राजनीतिक दलों और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि वे संवेदनशील मुद्दों पर संयम और जवाबदेही का परिचय दें।

 


आगे क्या?

कोरबा में कांग्रेस द्वारा किए गए इस प्रदर्शन ने छात्र आंदोलनों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार, संबंधित एजेंसियां और राजनीतिक दल इन मुद्दों पर आगे क्या कदम उठाते हैं।

Recent News

उर्जाधानी में आयोजित शतरंज स्पर्धा का हुआ सफल समापन, 120 खिलाड़ियों ने दिखाई प्रतिभा

कोरबा में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रोटरी क्लब ऑफ कोरबा एवं जिला शतरंज एसोसिएशन द्वारा आयोजित जिला स्तरीय शतरंज चैंपियनशिप का सफल...