कोरबा।
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के मानिकपुर क्षेत्र में प्रस्तावित खदान विस्तार को लेकर एक बार फिर भू-विस्थापित ग्रामीणों की नाराजगी सामने आई है। वर्षों पहले अधिग्रहित जमीन के बदले रोजगार और पुनर्वास की मांग पूरी नहीं होने का आरोप लगाते हुए एसईसीएल मानिकपुर प्रभावित ग्राम भू-विस्थापित समिति के बैनर तले दस गांवों के ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया और महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर जल्द समाधान की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि खदान विस्तार और नाला डायवर्सन परियोजनाओं के लिए उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया, लेकिन आज तक उन्हें रोजगार और समुचित पुनर्वास का लाभ नहीं मिल सका। उनका आरोप है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद जमीन गंवाने वाले परिवार आज भी रोजगार और स्थायी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
दस गांवों के भू-विस्थापित एक मंच पर आए
20 जुलाई को आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में मिलाई खुर्द क्रमांक-1, मिलाई खुर्द क्रमांक-2, मिलाई खुर्द क्रमांक-3, रापाघर्रा, कुदारी खार, दादर खुर्द, डेलवाडीह, बरसपुर, करनारा और कदमाहाबार सहित कुल दस गांवों के प्रभावित ग्रामीण शामिल हुए।
ग्रामीणों ने एकजुट होकर कहा कि खदान परियोजनाओं का विस्तार लगातार हो रहा है, लेकिन जिन लोगों ने अपनी जमीन और आजीविका खोई, उनकी समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं।
‘जमीन गई, लेकिन रोजगार नहीं मिला’
भू-विस्थापितों का सबसे बड़ा आरोप रोजगार को लेकर है। ग्रामीणों के अनुसार, अधिग्रहण के समय प्रभावित परिवारों को रोजगार देने और पुनर्वास की बात कही गई थी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी अधिकांश परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल पाया।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सिंचित और उपजाऊ जमीन परियोजना के लिए चली गई। खेती ही उनकी आय का मुख्य साधन थी। अब जमीन नहीं बची और रोजगार भी नहीं मिला, जिससे कई परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि केवल आश्वासन मिलने से परिवारों का जीवन नहीं चल सकता। उन्हें स्थायी रोजगार और पुनर्वास की आवश्यकता है।
खेती और मकान दोनों हुए प्रभावित
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि खदान विस्तार का असर केवल कृषि भूमि तक सीमित नहीं रहा। कई परिवारों के मकान और आसपास का वातावरण भी परियोजना से प्रभावित हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले जहां खेती से पूरे परिवार का गुजारा हो जाता था, वहीं अब कई परिवार मजदूरी करने को मजबूर हैं। इससे युवाओं के सामने रोजगार का संकट और भी गहरा हो गया है।
उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं का विरोध नहीं है, लेकिन विकास का लाभ प्रभावित लोगों तक भी समान रूप से पहुंचना चाहिए।
दादर खुर्द के किसानों ने उठाया पुराना मुद्दा
ज्ञापन में दादर खुर्द के किसानों ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि करीब 100 किसानों की जमीन पौधारोपण और रोजगार उपलब्ध कराने के वादे के साथ ली गई थी।
ग्रामीणों का दावा है कि अधिग्रहण के समय जो भरोसा दिलाया गया था, वह आज तक पूरा नहीं हुआ। किसानों का कहना है कि कई बार अधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।
महाप्रबंधक को सौंपा गया ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद समिति के प्रतिनिधिमंडल ने SECL मानिकपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में प्रमुख मांगें शामिल हैं—
- प्रभावित परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
- लंबित पुनर्वास संबंधी मामलों का जल्द समाधान किया जाए।
- अधिग्रहित भूमि के बदले किए गए वादों को पूरा किया जाए।
- प्रभावित गांवों के विकास कार्यों में तेजी लाई जाए।
- परियोजना प्रभावित परिवारों के साथ नियमित संवाद स्थापित किया जाए।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि कंपनी प्रबंधन उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करेगा।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
भू-विस्थापित समिति ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
ग्रामीणों ने कहा कि फिलहाल उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के सामने रखी है। यदि समाधान नहीं निकला तो आगे की रणनीति सामूहिक बैठक के बाद तय की जाएगी।
खदान विस्तार और स्थानीय समुदाय
कोयला उत्पादन वाले क्षेत्रों में खदान विस्तार अक्सर स्थानीय समुदायों के लिए कई चुनौतियां लेकर आता है। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, रोजगार, पर्यावरण और सामाजिक ढांचे जैसे मुद्दे लंबे समय तक चर्चा का विषय बने रहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी औद्योगिक परियोजना की सफलता तभी संभव है जब प्रभावित समुदायों की आजीविका, पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जाए।
रोजगार और पुनर्वास क्यों हैं महत्वपूर्ण?
भूमि अधिग्रहण के बाद अधिकांश ग्रामीण परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आजीविका की होती है। यदि समय पर रोजगार या वैकल्पिक आय का साधन उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो इसका असर पूरे परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर पड़ता है।
इसी कारण विभिन्न परियोजनाओं में पुनर्वास और पुनर्स्थापन योजनाओं को विकास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
SECL की भूमिका पर रहेगी नजर
ग्रामीणों द्वारा ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब सभी की नजर SECL प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर रहेगी। यदि कंपनी और प्रभावित ग्रामीणों के बीच सकारात्मक संवाद स्थापित होता है तो समाधान का रास्ता निकल सकता है।
हालांकि, इस संबंध में SECL की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
कोरबा के मानिकपुर क्षेत्र में खदान विस्तार से प्रभावित दस गांवों के ग्रामीणों का प्रदर्शन केवल रोजगार की मांग नहीं, बल्कि आजीविका और सम्मानजनक पुनर्वास की उम्मीद से जुड़ा हुआ है। विकास परियोजनाओं के साथ प्रभावित परिवारों के अधिकारों और भविष्य को लेकर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी प्रबंधन और प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं और क्या लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान संवाद के माध्यम से निकल पाता है।

