* मंदिरों में जोर शोर से चल रही चैत्र नवरात्रि की तैयारी,माता के दरबार में प्रज्वलित किए जाएंगे मनोकामना ज्योति कलश
* इस बार चैत्र नवरात्रि 22 मार्च बुधवार से आरंभ
Pnews24- हिन्दू धर्म में चैत्र नवरात्रि के विशेष महत्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होगा। इस वर्ष चैत्र प्रतिपदा तिथि 22 मार्च के दिन पड़ रहा है, लेकिन चैत्र नवरात्रि से कुछ दिन पहले पंचक भी शुरू हो रहा है, जिसमें सभी आध्यात्मिक कार्य रोक दिए जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि पंचक के दौरान किए गए कार्यों में बाधा उत्पन्न होती है और इन 5 दिनों को बहुत ही अशुभ माना जाता है। ऐसे में चैत्र नवरात्रि से पहले और पंचक के दौरान साधकों को कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखने की सलाह ज्योतिष दे रहे हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास में पंचक 19 मार्च रविवार के दिन सुबह 11 बजकर 17 मिनट से शुरू होगा और इसका अंत 23 मार्च शुक्रवार के दिन दोपहर 02 बजकर 08 मिनट पर होगा। रविवार के दिन पंचक शुरू होने के कारण इसे रोग पंचक के नाम से जाना जाएगा। ऐसे में साधकों को पंचक की अवधि में बहुत ही सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि इस अवधि में अनहोनी का भय बना रहता है।
नवरात्री में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। नवरात्रि के बाद 30 मार्च गुरुवार को रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा। पौराणिक व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि व रामनवमी पर किए गए पूजा-पाठ का अनन्त गुणा फल मिलता है। इस दौरान मंदिरों में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाएंगे। मंदिरों में चैत्र नवरात्रि की तैयारी जोर शोर से चल रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल चैत्र नवरात्रि से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। हर साल चार नवरात्रि मनाई जाती है जिसमें से दो गुप्त और दो प्रत्यक्ष नवरात्रि होती है।
चैत्र और अश्विन माह में आने वाली नवरात्रि पर मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। वहीं, आषाढ़ और माघ की गुप्त नवरात्रि में मां अंबे की 10 महाविद्याओं की उपासना होती है। सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। नवरात्रि में देवी के भक्त घटस्थापना कर नौ दिनों तक व्रत रखकर शक्ति साधना करते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस बार चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से शुरू होगा। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 21 मार्च की रात 10.52 बजे से शुरू होकर अगले दिन 22 मार्च की रात 8.20 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, 22 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होगी। वहीं, इस दिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 22 मार्च की सुबह 6.29 से सुबह 7.39 बजे तक रहेगा। यह समय केवल 1 घंटा 10 मिनट का ही रहेगा. इसके अलावा घटस्थापना का अमृत काल सुबह 11.07 बजे से 12.35 तक रहेगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्रि पर ग्रह नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग बन रहा है, इस दौरान शनि और मंगल मकर राशि में रहेंगे।इसके अलावा इन 9 दिनों में रवि पुष्य नक्षत्र के साथ सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग भी बनेंगे। जिसकी वजह से नवरात्रि की शुभता और भी बढ़ जाएगी। इस दौरान किए गए शुभ कार्य में सफलता प्राप्त होगी और हर मनोकामना पूरी होगी। इस दौरान गुरु और शुक्र कुंभ राशि में होंगे और मीन में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनेगा. इसके अलावा मेष राशि में चंद्रमा, वृषभ में राहु, वृश्चिक में केतु विराजमान रहेंगे।

