कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बच्चे के गायब होने की अफवाह से मची अफरा-तफरी, पुलिस जांच में निकला घरेलू विवाद

कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सफाई कर्मी के दो वर्षीय बेटे के गायब होने की सूचना से अफरा-तफरी मच गई। बच्चा चोरी की आशंका के बीच पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की, लेकिन पड़ताल में मामला घरेलू विवाद का निकला। जानिए पूरी घटना।

कोरबा CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) जिले के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार को उस समय अचानक हड़कंप मच गया, जब अस्पताल में कार्यरत एक महिला सफाई कर्मी का दो वर्षीय पुत्र अचानक नजर नहीं आया। कुछ ही देर में यह खबर अस्पताल परिसर में फैल गई कि बच्चा कहीं गायब हो गया है। अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों और मरीजों के बीच बेचैनी का माहौल बन गया। महिला सफाई कर्मी अपने बेटे की तलाश में इधर-उधर भटकती रही, लेकिन जब काफी देर तक उसका कोई पता नहीं चला तो बच्चा चोरी होने की आशंका गहराने लगी।

घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल पुलिस चौकी और सिविल लाइन थाना पुलिस भी सक्रिय हो गई। शुरुआती जांच के दौरान पूरे अस्पताल परिसर में सघन तलाश अभियान चलाया गया। हालांकि कुछ ही देर बाद पुलिस की पड़ताल में जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को राहत की सांस लेने का मौका दिया। जांच में पता चला कि बच्चे का अपहरण या चोरी नहीं हुई थी, बल्कि उसका पिता ही उसे अपने साथ ले गया था। महिला को इसकी जानकारी नहीं होने के कारण पूरे मामले ने अफवाह का रूप ले लिया।


बेटे के अचानक नहीं मिलने से घबरा गई महिला कर्मी

जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कार्यरत महिला सफाई कर्मी रोज की तरह अपने कार्य में लगी हुई थी। इसी दौरान उसका करीब दो वर्षीय पुत्र, जो उसके साथ अस्पताल परिसर में मौजूद था, अचानक दिखाई नहीं दिया। महिला ने पहले अपने स्तर पर आसपास के लोगों से पूछताछ की और अस्पताल परिसर के अलग-अलग हिस्सों में बच्चे की तलाश की।

जब काफी देर तक बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला तो महिला घबरा गई। उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े और वह रोते-बिलखते अपने परिचित कर्मचारियों के साथ अस्पताल पुलिस चौकी पहुंची। वहां उसने पुलिस को सूचना दी कि उसका बेटा गायब हो गया है और उसे आशंका है कि कहीं कोई उसे अपने साथ ले गया है।


बच्चा चोरी की सूचना मिलते ही हरकत में आई पुलिस

बच्चे के गायब होने की सूचना मिलते ही अस्पताल पुलिस चौकी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल सिविल लाइन थाना पुलिस को अवगत कराया। पुलिस अधिकारियों ने बिना समय गंवाए अस्पताल परिसर में जांच शुरू कर दी।

अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों को भी सतर्क कर दिया गया। मुख्य प्रवेश और निकास द्वारों पर निगरानी बढ़ा दी गई। अस्पताल परिसर में आने-जाने वाले लोगों से पूछताछ की जाने लगी। कई स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जानकारी भी जुटाई गई ताकि बच्चे की गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

घटना की सूचना अस्पताल में तेजी से फैल गई, जिससे मरीजों के परिजन भी चिंतित हो गए। कुछ समय के लिए अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।


सुरक्षाकर्मियों ने भी चलाया खोज अभियान

अस्पताल प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया। सुरक्षाकर्मियों ने महिला के साथ मिलकर अस्पताल के हर संभावित स्थान पर बच्चे की तलाश शुरू कर दी। वार्ड, ओपीडी, पार्किंग, अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में खोजबीन की गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई लोग भी बच्चे को ढूंढने में मदद करने लगे। इस दौरान किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच रही थी।


संदेह के आधार पर एक युवक को चौकी लाया गया

तलाशी अभियान के दौरान एक युवक की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर उसे पूछताछ के लिए अस्पताल पुलिस चौकी लाया गया। पुलिस ने उससे विस्तार से पूछताछ की, लेकिन जांच में उसका इस मामले से कोई संबंध नहीं पाया गया।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई केवल जांच के आधार पर ही की जाती है और इस मामले में भी पूरी सतर्कता के साथ तथ्य जुटाए गए।


जांच में सामने आई पूरी सच्चाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बच्चे के परिवार और परिचितों से भी संपर्क किया। पूछताछ के दौरान यह जानकारी सामने आई कि बच्चे का पिता उसे अपने साथ ले गया था।

बताया गया कि पति-पत्नी के बीच किसी घरेलू विवाद के कारण पिता बच्चे को लेकर चला गया था। इस संबंध में महिला को पहले से कोई जानकारी नहीं थी। यही वजह रही कि उसने बेटे के अचानक गायब होने पर बच्चा चोरी होने की आशंका जताई।

जैसे ही यह जानकारी महिला और पुलिस को मिली, सभी ने राहत की सांस ली। बाद में यह पुष्टि हो गई कि बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और उसके साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई है।


अफवाहों से बढ़ी परेशानी

घटना के दौरान अस्पताल परिसर में बच्चा चोरी की चर्चा तेजी से फैल गई। इससे कुछ समय के लिए लोगों में दहशत का माहौल बन गया। हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई और तथ्यात्मक जांच के चलते मामला जल्द ही स्पष्ट हो गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की अपुष्ट सूचना तेजी से फैलने पर अनावश्यक घबराहट की स्थिति बन सकती है। ऐसे मामलों में अफवाहों पर विश्वास करने के बजाय पुलिस और प्रशासन की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना चाहिए।


अस्पतालों में बच्चों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण

यह घटना भले ही बच्चा चोरी का मामला नहीं निकली, लेकिन इसने अस्पताल जैसे सार्वजनिक संस्थानों में छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल जरूर खड़े किए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार अस्पतालों में आने वाले मरीजों और कर्मचारियों के छोटे बच्चों पर लगातार निगरानी रखना आवश्यक है। वहीं अस्पताल प्रशासन को भी सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश-निकास नियंत्रण को और मजबूत बनाए रखना चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।


पुलिस की तत्परता से टला बड़ा भ्रम

इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बिना किसी देरी के जांच शुरू की। अस्पताल प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों के सहयोग से मामले की सच्चाई जल्द सामने आ गई। यदि जांच में विलंब होता तो बच्चा चोरी की अफवाह और अधिक फैल सकती थी, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो सकती थी।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, लेकिन बिना पुष्टि के अफवाहें फैलाने से बचें

 

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