गरियाबंद के मैनपुर विकासखंड स्थित देवझर (अमली) शासकीय विद्यालय में दो शिक्षकों के कथित शराब सेवन का वीडियो वायरल होने से हड़कंप मच गया। शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है। पढ़ें पूरा मामला, विभाग की कार्रवाई और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया।
गरियाबंद CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) । छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है। मैनपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला देवझर (अमली) के दो शिक्षकों का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दोनों शिक्षक स्कूल कार्यालय के भीतर बैठकर कथित रूप से शराब पीते और चखना करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों, अभिभावकों और शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें दिखाई गई गतिविधियों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में विद्यालय के दो शिक्षक मनोज कुमार भारद्वाज और कमल सिंह दीवान स्कूल कार्यालय के भीतर बैठे दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उनके सामने कथित रूप से शराब की बोतल और खाने-पीने का सामान रखा हुआ नजर आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो विद्यालय परिसर के कार्यालय कक्ष का है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस समय यह घटना हुई, उस दौरान विद्यालय में छात्र-छात्राएं भी मौजूद थे और नियमित शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। हालांकि इन दावों की भी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल जांच के बाद ही हो सकेगी।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप
वीडियो वायरल होते ही यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। बड़ी संख्या में लोगों ने इस घटना पर नाराजगी जताई और इसे शिक्षा व्यवस्था की गरिमा के विपरीत बताया। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय बच्चों के भविष्य को संवारने का स्थान होता है। यदि शिक्षक ही विद्यालय परिसर में अनुशासनहीनता करते पाए जाते हैं, तो इससे विद्यार्थियों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है।
अभिभावकों ने उठाए गंभीर सवाल
घटना सामने आने के बाद कई अभिभावकों ने भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि बच्चे अपने शिक्षकों को आदर्श मानते हैं और यदि विद्यालय परिसर में इस प्रकार की कथित गतिविधियां होती हैं तो इससे शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
अभिभावकों का कहना है कि विद्यालयों में अनुशासन, नैतिकता और शिक्षण गुणवत्ता बनाए रखना शिक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।
शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच
मामले की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग सक्रिय हो गया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वायरल वीडियो और प्राप्त शिकायतों के आधार पर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि संबंधित शिक्षकों ने विद्यालय परिसर में विभागीय नियमों का उल्लंघन किया है, तो उनके खिलाफ सेवा नियमों के अनुरूप विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
विभाग का कहना है कि बिना जांच पूरी हुए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। इसलिए वीडियो की सत्यता, घटना का समय, स्थान और परिस्थितियों की विस्तार से जांच की जा रही है।
विद्यालयों में अनुशासन को लेकर फिर उठे सवाल
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब प्रदेश में सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी विद्यालय में इस प्रकार की अनुशासनहीनता सामने आती है तो उसका असर केवल संबंधित संस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की छवि पर भी पड़ता है।
इसी कारण विभागीय स्तर पर ऐसे मामलों में त्वरित जांच और आवश्यक कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जाता है।
जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी आधिकारिक पुष्टि
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई गई परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है और संबंधित पक्षों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो कब का है, किस परिस्थिति में बनाया गया और उसमें दिखाई दे रही गतिविधियां वास्तव में क्या थीं।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि—
- पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए।
- यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए।
- भविष्य में विद्यालय परिसर में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।
- विद्यालयों में शिक्षण कार्य और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही जरूरी
विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का आधार भी होते हैं। ऐसे में शिक्षकों का आचरण विद्यार्थियों के लिए उदाहरण माना जाता है। इसलिए किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता के आरोपों की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होती है।
फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजर शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। जांच के निष्कर्ष के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोप कितने सही हैं और आगे संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।

