धमतरी जिले के नगरी वनांचल क्षेत्र के कर्राघाटी गांव में देर रात तेंदुआ घर में घुस गया और सो रहे दो ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने तेंदुए को घेरकर मार डाला। वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
धमतरी CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24)। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी वनांचल क्षेत्र से शनिवार देर रात एक बेहद चिंताजनक और सनसनीखेज घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। बिरगुड़ी रेंज के अंतर्गत आने वाले कर्राघाटी गांव में एक तेंदुआ अचानक आबादी के बीच पहुंच गया और एक घर में घुसकर सो रहे दो ग्रामीणों पर हमला कर दिया। इस अप्रत्याशित हमले में दोनों ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। शोर-शराबा सुनकर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद तेंदुए को घेर लिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने उसे मार डाला। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम घटनास्थल पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
आधी रात को घर में घुसा तेंदुआ
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात गांव के अधिकांश लोग अपने-अपने घरों में सो रहे थे। इसी दौरान जंगल की ओर से आया एक तेंदुआ अचानक धरम नेताम और गांधी नेताम के घर में घुस गया। दोनों ग्रामीण उस समय गहरी नींद में थे और उन्हें किसी भी तरह के खतरे का अंदाजा नहीं था।
बताया जा रहा है कि तेंदुए ने अचानक दोनों पर हमला बोल दिया। नींद में होने के कारण दोनों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। तेंदुए के तेज पंजों और दांतों के हमले से दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए।
ग्रामीणों और तेंदुए के बीच चला संघर्ष
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेंदुआ काफी आक्रामक था और लगातार हमला कर रहा था। ग्रामीणों ने पहले घायलों को बचाने की कोशिश की, लेकिन तेंदुआ पीछे हटने को तैयार नहीं था। काफी देर तक ग्रामीणों और तेंदुए के बीच संघर्ष चलता रहा।
स्थिति बिगड़ती देख बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। आत्मरक्षा और अन्य लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों ने तेंदुए को चारों तरफ से घेर लिया। लंबे संघर्ष के बाद तेंदुए की मौत हो गई।
घटना के बाद पूरे गांव में भय और तनाव का माहौल बन गया। ग्रामीण देर रात तक अपने घरों से बाहर रहे और बच्चों तथा महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया।
घायल ग्रामीणों का उपचार जारी

हमले में घायल धरम नेताम और गांधी नेताम को तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। दोनों के शरीर पर पंजों और दांतों के गहरे घाव बताए जा रहे हैं। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
वन विभाग मौके पर पहुंचा, जांच शुरू
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी देर रात ही कर्राघाटी गांव पहुंचे। विभाग ने मृत तेंदुए को अपने कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद वन्यजीव संरक्षण संबंधी नियमों के तहत अंतिम प्रक्रिया पूरी की गई।
वन विभाग ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि तेंदुआ आबादी वाले क्षेत्र तक कैसे पहुंचा और उसने अचानक घर में घुसकर हमला क्यों किया।
जंगल से लगे गांवों में बढ़ रही वन्यजीवों की आवाजाही
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के आसपास बसे गांवों में तेंदुए, भालू और हाथियों जैसे वन्यजीवों की आवाजाही पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें जंगलों में भोजन की कमी, प्राकृतिक आवास में बदलाव और मानव गतिविधियों का बढ़ना प्रमुख माना जाता है।
धमतरी का नगरी वनांचल क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है, जहां तेंदुए सहित कई वन्यजीवों का प्राकृतिक निवास है। ऐसे क्षेत्रों में मानव और वन्यजीवों का आमना-सामना समय-समय पर होता रहा है, लेकिन किसी घर में घुसकर हमला करने जैसी घटनाएं स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा देती हैं।
ग्रामीणों में डर का माहौल
इस घटना के बाद कर्राघाटी गांव के लोगों में भय का वातावरण है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते लोग नहीं पहुंचते, तो बड़ा हादसा हो सकता था। कई परिवार अब रात के समय घरों से बाहर निकलने और खेतों की ओर जाने से भी डर रहे हैं।
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि गांव और आसपास के क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाई जाए। साथ ही जंगल से लगे इलाकों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी गांव या घर के आसपास तेंदुआ दिखाई दे तो घबराने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना देना सबसे सुरक्षित तरीका होता है। भीड़ इकट्ठा करने या वन्यजीव को घेरने से वह और अधिक आक्रामक हो सकता है। हालांकि, कर्राघाटी की घटना में ग्रामीणों ने अपने बचाव और घायल लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रतिक्रिया दी।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को वन्यजीवों के व्यवहार और आपातकालीन सुरक्षा उपायों के बारे में समय-समय पर जागरूक किया जाना चाहिए।
प्रशासन और वन विभाग की जिम्मेदारी बढ़ी
इस घटना ने एक बार फिर जंगल से लगे क्षेत्रों में वन्यजीव प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वन विभाग पहले से गश्त और निगरानी को मजबूत करता, तो शायद इस तरह की घटना टाली जा सकती थी।
अब ग्रामीणों की नजर वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। लोगों को उम्मीद है कि विभाग जल्द ही इलाके में निगरानी बढ़ाएगा और ऐसे उपाय करेगा, जिससे भविष्य में मानव और वन्यजीवों के बीच होने वाले संघर्ष को कम किया जा सके।

