कोरबा जिले के करतला वन परिक्षेत्र के बड़मार गांव में खेत में काम करने गए ग्रामीण जगेशर सिंह राठिया की जंगली हाथी के हमले में मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। पढ़ें पूरी खबर, वन विभाग की कार्रवाई, ग्रामीणों की मांग और मानव-हाथी संघर्ष की गंभीर चुनौती पर विस्तृत रिपोर्ट।
कोरबा CHHATTISHGARH (प्रखर न्यूज 24) । छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से मानव-हाथी संघर्ष की एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। करतला वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बड़मार गांव में शनिवार सुबह खेत में काम करने गए एक ग्रामीण की जंगली हाथी के हमले में मौत हो गई। मृतक की पहचान जगेशर सिंह राठिया के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह रोज की तरह सुबह अपने खेत में कृषि कार्य करने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि खेत के आसपास एक जंगली हाथी पहले से मौजूद है। अचानक हाथी के सामने आने के बाद स्थिति इतनी भयावह हो गई कि ग्रामीण को संभलने का मौका तक नहीं मिला और हाथी ने उन पर हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के अनुसार हाथी ने जगेशर सिंह राठिया को बुरी तरह कुचल दिया, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। परिजन बदहवास हालत में घटनास्थल पहुंचे, वहीं आसपास के ग्रामीणों की भी भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा तथा आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
सुबह खेत में काम करने गए थे जगेशर सिंह
जानकारी के मुताबिक जगेशर सिंह राठिया शनिवार सुबह अपने खेत में खेती से जुड़े नियमित कार्य करने पहुंचे थे। इसी दौरान खेत के आसपास विचरण कर रहे जंगली हाथी से उनका आमना-सामना हो गया। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार जंगली हाथी अचानक इंसानी गतिविधि महसूस होने पर कई बार आक्रामक हो जाते हैं, विशेषकर तब जब वे भोजन की तलाश में गांवों के समीप पहुंच जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथी ने बिना किसी चेतावनी के हमला कर दिया। जगेशर सिंह ने बचने की कोशिश की, लेकिन हाथी के सामने उनकी एक नहीं चली। गंभीर चोटों के कारण उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
घटना के बाद गांव में पसरा मातम
जगेशर सिंह राठिया की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे बड़मार गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने बताया कि मृतक मेहनतकश किसान थे और अपने परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी निभा रहे थे।
गांव के लोगों का कहना है कि खेती-किसानी ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। ऐसे में यदि खेतों तक जाना भी जान जोखिम में डालने जैसा हो जाए, तो ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाता है।
वन विभाग ने शुरू की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी घटनास्थल पहुंचे। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
वन विभाग ने बताया कि शासन के नियमानुसार मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभागीय अधिकारी आवश्यक दस्तावेज तैयार कर रहे हैं ताकि निर्धारित मुआवजा जल्द से जल्द परिजनों तक पहुंचाया जा सके।
इसके साथ ही वन अमला हाथी की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और आसपास के गांवों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
ग्रामीणों में बढ़ा डर, सुरक्षा व्यवस्था की मांग
इस घटना के बाद बड़मार सहित आसपास के गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। कई बार हाथियों के झुंड खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि अब जान का खतरा भी बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि—
- हाथियों की नियमित निगरानी की जाए।
- संवेदनशील गांवों में गश्त बढ़ाई जाए।
- समय पर मुनादी और अलर्ट जारी किया जाए।
- हाथियों की लोकेशन की जानकारी ग्रामीणों तक तुरंत पहुंचाई जाए।
- खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
मानव-हाथी संघर्ष बनता जा रहा बड़ी चुनौती
छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों से लगे जिलों में मानव-हाथी संघर्ष लगातार गंभीर समस्या बनता जा रहा है। कोरबा, सरगुजा, जशपुर, रायगढ़, महासमुंद और बलरामपुर जैसे कई जिलों में हर वर्ष हाथियों की मौजूदगी दर्ज की जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में भोजन और प्राकृतिक आवास की कमी, वन क्षेत्रों का सिकुड़ना तथा मानव गतिविधियों का विस्तार इस संघर्ष को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। कई बार हाथी भोजन की तलाश में गांवों और खेतों तक पहुंच जाते हैं, जिससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आती हैं।
वन विभाग लगातार निगरानी, ट्रैकिंग और जागरूकता अभियान चला रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
वन विभाग की अपील
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में हाथी दिखाई दे तो उसके पास जाने या उसे भगाने की कोशिश न करें। हाथियों की सूचना तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय खेतों तथा जंगल से लगे क्षेत्रों में जाने से पहले आसपास की स्थिति की जानकारी अवश्य लें।
विभाग ने यह भी कहा है कि हाथियों की गतिविधियों वाले क्षेत्रों में समूह बनाकर जाना अधिक सुरक्षित माना जाता है। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल वन अमले को सूचना देना जरूरी है ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
ग्रामीणों की उम्मीद—स्थायी समाधान निकले
बड़मार गांव में हुई इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर मानव-हाथी संघर्ष की गंभीरता को उजागर कर दिया है। एक परिवार ने अपना कमाने वाला सदस्य खो दिया, जबकि पूरे गांव में भय का माहौल है। ग्रामीणों का मानना है कि केवल मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी रणनीति बनाई जानी चाहिए।
वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। यदि समय रहते निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए, हाथियों की गतिविधियों पर आधुनिक तकनीक से नजर रखी जाए और ग्रामीणों को समय पर अलर्ट मिले, तो भविष्य में कई अनमोल जानें बचाई जा सकती हैं।

